एलन मस्क का व्हाट्सऐप पर सीधा हमला: "भरोसे के लायक नहीं है ऐप", प्राइवेसी को लेकर चेताया।

एलन मस्क ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट को रीट्वीट किया, जिसमें व्हाट्सऐप के खिलाफ दायर एक नए कानूनी मामले का

Apr 10, 2026 - 11:38
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एलन मस्क का व्हाट्सऐप पर सीधा हमला: "भरोसे के लायक नहीं है ऐप", प्राइवेसी को लेकर चेताया।
एलन मस्क का व्हाट्सऐप पर सीधा हमला: "भरोसे के लायक नहीं है ऐप", प्राइवेसी को लेकर चेताया।
  • एक्स चैट बनाम व्हाट्सऐप: मस्क ने वॉयस-वीडियो कॉलिंग के लिए पेश किया नया विकल्प, प्राइवेसी को बताया सर्वोपरि।
  • प्राइवेसी की जंग में कूदे एलन मस्क: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर मुकदमे के बाद व्हाट्सऐप को घेरा, सुरक्षित संचार का किया आह्वान।

एलन मस्क ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट को रीट्वीट किया, जिसमें व्हाट्सऐप के खिलाफ दायर एक नए कानूनी मामले का विवरण दिया गया था। इस मुकदमे में दावा किया गया है कि मेटा अपने कर्मचारियों और एक्सेंचर जैसे तीसरे पक्ष के कॉन्ट्रैक्टर्स को गुप्त रूप से उपयोगकर्ताओं के निजी संदेशों को पढ़ने और स्टोर करने की अनुमति देता है। मस्क ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि व्हाट्सऐप का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है और उपयोगकर्ता इस पर अपनी गोपनीयता के लिए निर्भर नहीं रह सकते। मस्क के इस बयान ने तकनीकी जगत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि व्हाट्सऐप दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है और इसके सुरक्षा दावों पर सवाल उठना करोड़ों उपयोगकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है।

व्हाट्सऐप की आलोचना करने के साथ ही एलन मस्क ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'एक्स चैट' पर जोर दिया। मस्क ने बताया कि एक्स चैट के माध्यम से की जाने वाली वॉयस और वीडियो कॉल न केवल सुविधाजनक हैं, बल्कि वे "वास्तविक प्राइवेसी" (Actual Privacy) का लाभ भी प्रदान करती हैं। मस्क का दावा है कि एक्स का संचार तंत्र एक ऐसी वास्तुकला पर आधारित है जो डेटा गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। मस्क पिछले काफी समय से एक्स को एक 'एवरीथिंग ऐप' (Everything App) बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, और व्हाट्सऐप की सुरक्षा खामियों को उजागर करना उनकी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि वे अधिक से अधिक उपयोगकर्ताओं को अपने प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित कर सकें।

इस विवाद के बीच मेटा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। व्हाट्सऐप के आधिकारिक हैंडल ने मस्क के दावों को "पूरी तरह से गलत और हास्यास्पद" करार दिया। मेटा का कहना है कि व्हाट्सऐप पिछले एक दशक से 'सिग्नल प्रोटोकॉल' का उपयोग करके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान कर रहा है, जिसका अर्थ है कि संदेशों को केवल भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही पढ़ सकता है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि एन्क्रिप्शन की चाबियां केवल उपयोगकर्ता के डिवाइस पर होती हैं और कंपनी के पास उन्हें एक्सेस करने का कोई तकनीकी माध्यम नहीं है। मेटा ने मुकदमे के दावों को कल्पना मात्र बताते हुए अपनी सुरक्षा व्यवस्था का बचाव किया है। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) एक ऐसी सुरक्षा पद्धति है जिसमें संदेशों को 'स्क्रैम्बल' यानी कोड में बदल दिया जाता है। इसे डिकोड करने की चाबी केवल संचार कर रहे दो पक्षों के पास होती है। मस्क का तर्क है कि यदि कोई कंपनी 'बैकडोर' एक्सेस रखती है, तो यह एन्क्रिप्शन बेकार हो जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव भी शामिल हो गए हैं। ड्यूरोव ने मस्क के सुर में सुर मिलाते हुए व्हाट्सऐप के एन्क्रिप्शन को "इतिहास का सबसे बड़ा उपभोक्ता धोखाधड़ी" बताया। उनका दावा है कि व्हाट्सऐप अपने सुरक्षा दावों से अरबों उपयोगकर्ताओं को गुमराह कर रहा है और वास्तव में डेटा को तीसरे पक्षों के साथ साझा करता है। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञ मस्क और ड्यूरोव के इन बयानों को 'प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति' के रूप में भी देख रहे हैं, क्योंकि दोनों ही नेता अपने-अपने प्लेटफॉर्म (एक्स और टेलीग्राम) को व्हाट्सऐप के प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

मस्क ने यह भी रेखांकित किया कि एक्स चैट का उपयोग करने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपना फोन नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होती, जो कि गोपनीयता की एक अतिरिक्त परत जोड़ता है। उनके अनुसार, 'बिटकॉइन-स्टाइल' एन्क्रिप्शन और रस्ट (Rust) प्रोग्रामिंग भाषा पर आधारित इसकी संरचना इसे अन्य पारंपरिक ऐप्स की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित बनाती है। मस्क का मानना है कि भविष्य में लोग ऐसे ऐप्स को प्राथमिकता देंगे जो मेटा जैसे बड़े डेटा-माइनिंग दिग्गजों के नियंत्रण से मुक्त हों। उन्होंने उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपनी संवेदनशील बातचीत के लिए एक्स चैट के वॉयस और वीडियो फीचर्स का अनुभव करें।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से अंततः उपयोगकर्ताओं का ही लाभ होता है, क्योंकि इससे कंपनियों पर अपनी सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ता है। हालांकि, व्हाट्सऐप के खिलाफ दायर मुकदमे में अभी तक कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं किए गए हैं जो यह साबित कर सकें कि एन्क्रिप्शन से समझौता किया गया है। लेकिन मस्क जैसे प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा बार-बार प्राइवेसी का मुद्दा उठाना व्हाट्सऐप की ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है। डिजिटल युग में डेटा ही सबसे कीमती संपत्ति है, और इसकी सुरक्षा को लेकर मस्क की चिंताएं कई मायनों में जायज भी प्रतीत होती हैं।

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