ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भारत के बढ़ते कदम: पीएम मोदी ने राज्यसभा में पेश किया ईंधन और गैस आपूर्ति का मेगा प्लान।
दुनिया के कई हिस्सों में, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
- पश्चिम एशिया संकट के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सात सशक्त समूहों का गठन, वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर
- रणनीतिक तेल भंडार में ऐतिहासिक वृद्धि और 41 देशों से तेल-गैस आयात: राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने देश को दिया निर्बाध आपूर्ति का भरोसा
दुनिया के कई हिस्सों में, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 24 मार्च 2026 को राज्यसभा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। प्रधानमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि हालांकि वैश्विक स्तर पर ईंधन और गैस की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हुए हैं, लेकिन भारत सरकार ने समय रहते ऐसे ठोस कदम उठाए हैं जिनसे देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिक पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने ईंधन, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 'सात सशक्त समूहों' (7 Empowered Groups) का गठन किया है। ये समूह ठीक उसी तरह कार्य करेंगे जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान देश की व्यवस्था को संभालने के लिए बनाए गए थे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और दूरगामी निर्णय लिए जा सकें।
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में देश को आश्वस्त करते हुए बताया कि सरकार की रणनीति केवल तात्कालिक संकट को टालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर आधारित है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए अपने आयात नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार किया है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी के आयात के लिए अपने स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर अब 41 देशों तक पहुंचा दिया है। आपूर्ति स्रोतों का यह विविधीकरण (Diversification) भारत को किसी एक क्षेत्र या मार्ग, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य, में होने वाले व्यवधानों से सुरक्षा प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया के जिस भी कोने से संभव हो, वहां से भारत के लिए किफायती और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
देश की रणनीतिक तैयारी का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने राज्यसभा में 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) के आंकड़ों को साझा किया, जो किसी भी बड़े संकट के समय भारत की 'लाइफलाइन' साबित होंगे। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक तेल भंडार सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है। इतना ही नहीं, सरकार अब दूसरे चरण में 65 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त क्षमता विकसित करने पर तेजी से काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि भारत की तेल शोधन क्षमता (Refining Capacity) में भी पिछले 10 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे हम न केवल कच्चे तेल का अधिक भंडारण कर सकते हैं बल्कि उसे घरेलू जरूरतों के अनुसार तेजी से प्रोसेस भी कर सकते हैं। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत के पास पर्याप्त भंडार और निरंतर आपूर्ति के लिए एक मजबूत तंत्र मौजूद है, जिससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण अपडेट साझा करते हुए बताया कि भारतीय एलपीजी वाहक जहाजों, 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' ने हाल ही में तनावपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक पारगमन किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत के कूटनीतिक संबंध और नौसेना की सुरक्षात्मक निगरानी ऊर्जा गलियारों को खुला रखने में प्रभावी साबित हो रही है।
गैस आपूर्ति के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने 'गैस आधारित अर्थव्यवस्था' (Gas-based Economy) की ओर भारत के संक्रमण को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सरकार एलपीजी के साथ-साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के नेटवर्क को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए 'नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026' जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए गए हैं, ताकि पाइपलाइन बिछाने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-mile connectivity) में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ ईंधन तक पहुंच न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह आयातित ईंधन पर हमारी निर्भरता को कम कर मध्यम वर्ग की जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी कम करेगा। उन्होंने राज्यों से भी अपील की कि वे अनिवार्य वस्तुओं और ईंधन की आपूर्ति सुचारू रखने के लिए केंद्र के साथ मिलकर विशेष व्यवस्था करें।
खेती और किसानों पर ऊर्जा संकट के प्रभाव को रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में एक विशेष कार्ययोजना पेश की। उन्होंने बताया कि सरकार ने उर्वरकों (Fertilizers) की आपूर्ति और उत्पादन के लिए अलग से रणनीति बनाई है ताकि आने वाले बुवाई सीजन में किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। ईंधन की कीमतों में होने वाली वैश्विक अस्थिरता का असर उर्वरकों की कीमतों और उपलब्धता पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने पहले ही पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित कर लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'अन्नदाता' की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को हर हाल में सुरक्षित रखा जाएगा। सशक्त समूहों में से एक समूह विशेष रूप से उर्वरक और कृषि संबंधी रसद की निगरानी कर रहा है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर वैश्विक युद्ध का साया न पड़े।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत के विजन को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ते हुए 'ग्रीन हाइड्रोजन' और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के बढ़ते योगदान की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत ने 2026 की शुरुआत तक 143 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली है, जो 2014 में मात्र 2.8 गीगावाट थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, बिजली क्षेत्र में किया जा रहा यह निवेश सीधे तौर पर जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के आयात को कम करेगा। उन्होंने 'ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026' का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरेगा। परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देना भी इसी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक हिस्सा है, जिससे पेट्रोल-डीजल की मांग को नियंत्रित किया जा सकेगा।
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