मायावती का कड़ा प्रहार: कांग्रेस और सपा पर महिला आरक्षण के नाम पर वादाखिलाफी और धोखेबाजी का आरोप।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी
- बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख ने विपक्षी एकजुटता पर उठाए सवाल, एससी, एसटी और ओबीसी अधिकारों की अनदेखी का लगाया आरोप
- आरक्षण की राजनीति में नया उबाल: मायावती ने कांग्रेस को 'गिरगिट' की तरह रंग बदलने वाली पार्टी बताते हुए पुराने रिकॉर्ड को खंगाला
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। अप्रैल 2026 के मध्य में लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन के बीच विपक्षी दलों की मंशा पर गहरे सवाल उठाए। मायावती ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल के दौरान कभी भी महिला आरक्षण के वादे को गंभीरता से पूरा नहीं किया और आज वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे पर शोर मचा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन दलों ने दशकों तक देश और उत्तर प्रदेश पर राज किया, उन्होंने कभी भी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में अलग कोटे की वकालत नहीं की, जबकि अब वे अचानक 'सामाजिक न्याय' की बात करने लगे हैं।
मायावती ने कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को खंगालते हुए उसे 'जातिवादी' मानसिकता से ग्रसित बताया। उन्होंने याद दिलाया कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री के पद से इसलिए इस्तीफा देना पड़ा था क्योंकि उस समय की कांग्रेस सरकार ने पिछड़ों और महिलाओं के अधिकारों के लिए ठोस कदम उठाने से इनकार कर दिया था। बसपा प्रमुख ने तर्क दिया कि यदि कांग्रेस वास्तव में महिलाओं का भला चाहती, तो उसे संविधान संशोधन के माध्यम से बहुत पहले ही 33 या 50 प्रतिशत आरक्षण लागू कर देना चाहिए था। उन्होंने कांग्रेस द्वारा अब 'सब-कोटा' (कोटे के भीतर कोटा) की मांग करने को केवल एक पाखंड बताया, क्योंकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने बसपा द्वारा उठाई गई इन मांगों को लगातार दरकिनार किया था। मायावती के अनुसार, कांग्रेस का यह नया रुख केवल चुनावी लाभ के लिए जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मायावती ने उसे भी आरक्षण विरोधी मानसिकता का पोषक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकारों के दौरान कभी भी पिछड़ों और दलितों के संवैधानिक हितों की रक्षा नहीं की। उन्होंने जुलाई 1994 की पिछड़ा वर्ग आयोग की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन सपा सरकार ने पिछड़े मुस्लिमों को आरक्षण का लाभ देने वाली सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया था, जिसे बाद में 1995 में बसपा सरकार ने सत्ता में आते ही लागू किया था। मायावती ने सपा को 'गिरगिट' की तरह रंग बदलने वाली पार्टी बताते हुए कहा कि जो दल दलितों और पिछड़ों के प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करते रहे हैं, वे आज महिला आरक्षण में कोटे की मांग करके केवल भ्रम फैला रहे हैं।
बसपा का स्टैंड
मायावती ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का संसद में समर्थन करेगी, भले ही इसमें एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटे का प्रावधान न हो। उन्होंने कहा कि "कुछ न मिलने से बेहतर है कि कुछ तो मिले", हालांकि उन्होंने अपनी मांग दोहराई कि महिलाओं को उनकी आबादी के अनुसार 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बोलते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि असली सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीति से आता है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी समाज के वंचित वर्गों की महिलाएं सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई हैं। उनके अनुसार, यदि महिला आरक्षण बिल में दलित और पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान नहीं किए जाते, तो इस कानून का वास्तविक उद्देश्य काफी हद तक विफल हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केवल उच्च वर्ग की महिलाओं का ही प्रतिनिधित्व बढ़ा, तो यह 'सामाजिक न्याय' की अवधारणा के विरुद्ध होगा। मायावती ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा से संसद में 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग की है, लेकिन अन्य दलों ने अपने स्वार्थों के कारण इसे कभी स्वीकार नहीं किया।
संसद के आगामी विशेष सत्र और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए प्रस्तावित 850 सीटों के खाके पर भी मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीटों का बढ़ना और परिसीमन होना एक तकनीकी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इसमें हाशिए पर रहने वाले समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह किया कि आरक्षण के क्रियान्वयन में देरी और जनगणना जैसे बहाने बनाकर इसे और अधिक नहीं लटकाना चाहिए। मायावती ने साफ किया कि वह और उनकी पार्टी इस मुद्दे पर किसी भी राजनीतिक गठबंधन के दबाव में नहीं आएंगी और केवल बहुजन समाज के हितों को सर्वोपरि रखेंगी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे कांग्रेस और सपा जैसी 'धोखेबाज' पार्टियों के बहकावे में न आएं जो केवल चुनाव के समय जाति और आरक्षण का राग अलापती हैं। मायावती के इस बयान ने उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (I.N.D.I.A) के भीतर भी खलबली मचा दी है। उनका कांग्रेस और सपा पर एक साथ हमला करना यह संकेत देता है कि आगामी चुनावों में बसपा अपनी स्वतंत्र राह पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बार-बार यह संदेश दिया कि कांग्रेस का 'आरक्षण बचाओ' का नारा केवल एक छलावा है, क्योंकि जब उनके पास सत्ता थी, तब उन्होंने ओबीसी को संवैधानिक मान्यता देने में देरी की। मायावती ने सवाल किया कि जो दल खुद को पिछड़ों का मसीहा कहते हैं, वे तब कहां थे जब बसपा ने निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग उठाई थी। उनका कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि वह दलित-पिछड़ा वोट बैंक पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहतीं।
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