महंगाई की मार और कम वेतन का दंश झेल रहे कामगारों के समर्थन में उतरे अखिलेश, यूपी सरकार पर लगाए शोषण के आरोप
विपक्ष के नेता ने इस बात पर जोर दिया कि केवल एक परिवार चलाने वाला व्यक्ति ही समझ सकता है कि बेहद कम वेतन में इस दौर में घर चलाना कितना कठिन है। उन्होंने सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए कहा कि प्रशासन
- नोएडा में भड़की श्रमिक अशांति की आग, अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार
- पूंजीपतियों का एटीएम भरने वाली सरकार के पास मजदूरों के लिए पैसे नहीं, वेतन वृद्धि विवाद पर समाजवादी पार्टी का बड़ा हमला
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिकों का आंदोलन अचानक हिंसक हो गया, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है। नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों की संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं। इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सीधे तौर पर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी की आर्थिक नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इस पूरे विवाद को केवल एक स्थानीय विरोध प्रदर्शन न मानकर इसे सरकार की एकतरफा नीतियों का परिणाम बताया है, जो उनके अनुसार केवल बड़े उद्योगपतियों के हितों को सुरक्षित करने पर केंद्रित हैं, जबकि आम कर्मचारी और मजदूर वर्ग अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।
अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था में अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर सरकार को विफल बताते हुए कहा कि एक तरफ आसमान छूती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, तो दूसरी तरफ बेरोजगारी और कम वेतन की समस्या ने मजदूरों के जीवन को अंधकारमय बना दिया है। उनके अनुसार, नोएडा की सड़कों पर जो आक्रोश दिखाई दे रहा है, वह लंबे समय से दबे हुए असंतोष का विस्फोट है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब देश के अन्य राज्यों में श्रमिकों के वेतन में समय-समय पर बढ़ोतरी की जाती रही है, तो उत्तर प्रदेश में सरकार ने इन मेहनतकश लोगों को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए, जिससे आज स्थिति इतनी भयावह हो गई है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया ने पूंजीवाद और श्रमिक शोषण के बीच के अंतर्संबंधों को लेकर भी सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां केवल उन दानदाताओं और पूंजीपतियों की तिजोरियां भरने के लिए बनाई गई हैं, जो सत्ता के करीब हैं। उन्होंने एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार पूंजीपतियों के एटीएम को तो रुपयों से लबालब भर रही है, लेकिन जब बात मजदूरों की मजदूरी और उनके हक की आती है, तो वही मशीनें खाली नजर आने लगती हैं। अखिलेश यादव का मानना है कि यह विरोधाभास ही समाज में अशांति का मुख्य कारण है, जहां उत्पादन करने वाला मजदूर खुद अभावों में जी रहा है और व्यवस्था उसे सुरक्षा देने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।
नोएडा की सड़कों पर संग्राम और पुलिसिया कार्रवाई
सोमवार को नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आगजनी की और औद्योगिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। जवाब में पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई श्रमिकों को चोटें आईं। मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाकर कम से कम 20,000 रुपये किया जाए ताकि वे मौजूदा महंगाई में अपने परिवार का गुजारा कर सकें।
विपक्ष के नेता ने इस बात पर जोर दिया कि केवल एक परिवार चलाने वाला व्यक्ति ही समझ सकता है कि बेहद कम वेतन में इस दौर में घर चलाना कितना कठिन है। उन्होंने सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए कहा कि प्रशासन को उन परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए था, जिनके कारण शांतिपूर्ण मांग ने हिंसक रूप ले लिया। अखिलेश यादव के अनुसार, जब मजदूर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता है, तो उसे सुनने के बजाय लाठियों से चुप कराने की कोशिश की जाती है, जो लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है। उन्होंने इस घटना के लिए पूरी तरह से जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की लापरवाही को उत्तरदायी ठहराया है, जिन्होंने समय रहते श्रमिक संगठनों और उद्योग मालिकों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास नहीं किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह रुख पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी की पैठ मजबूत करने की कवायद का हिस्सा भी हो सकता है। उन्होंने अपने बयानों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी श्रमिकों और मध्यम वर्ग के हितों की सच्ची रक्षक है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते मजदूरों की मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया और उन्हें केवल बलपूर्वक दबाने की कोशिश की गई, तो यह असंतोष पूरे प्रदेश में फैल सकता है। अखिलेश यादव ने मांग की है कि सरकार अपनी दमनकारी नीतियों को त्यागकर वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे और मजदूरों को उनके श्रम का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस नीति बनाए।
नोएडा की घटना को लेकर अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज का हर वर्ग आज भाजपा की कार्यप्रणाली से त्रस्त है। उन्होंने दावा किया कि वेतनभोगी कर्मचारी अब यह खुलकर कह रहे हैं कि उन्हें ऐसी सरकार नहीं चाहिए जो केवल वादों का मायाजाल बुनती हो और हकीकत में उनकी जेबों पर डाका डालती हो। उन्होंने उत्तर प्रदेश की तुलना अन्य प्रगतिशील राज्यों से करते हुए कहा कि औद्योगिक शांति केवल संवाद और न्याय से ही आ सकती है, न कि डराने-धमकाने से। उनके अनुसार, सरकार को उन कंपनियों के खिलाफ भी सख्त होना चाहिए जो न्यूनतम मजदूरी के मानकों का उल्लंघन कर रही हैं और मजदूरों का शोषण कर रही हैं।
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