बस्तर में लाल आतंक पर बड़ा प्रहार: कांकेर मुठभेड़ में 5 लाख की इनामी नक्सली कमांडर रूपी ढेर

कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों को छोटे बेठिया के जंगलों में नक्सलियों के जमावड़े की खबर मिली थी। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए जिला बल और डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के ज

Apr 13, 2026 - 17:58
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बस्तर में लाल आतंक पर बड़ा प्रहार: कांकेर मुठभेड़ में 5 लाख की इनामी नक्सली कमांडर रूपी ढेर
बस्तर में लाल आतंक पर बड़ा प्रहार: कांकेर मुठभेड़ में 5 लाख की इनामी नक्सली कमांडर रूपी ढेर

  • छोटे बेठिया के जंगलों में सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता, भारी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री बरामद
  • छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित करने के अभियान के बीच मुठभेड़, इलाके में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत कांकेर जिले में सुरक्षाबलों ने सोमवार सुबह एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कांकेर के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घने जंगलों में हुई एक भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 5 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली कमांडर रूपी को मार गिराया है। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान के तहत इलाके की तलाशी ले रही थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन गुप्त सूचनाओं के आधार पर शुरू किया गया था, जिसमें नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली थी। मुठभेड़ के बाद घटना स्थल से महिला नक्सली का शव और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है, जो इस क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों को छोटे बेठिया के जंगलों में नक्सलियों के जमावड़े की खबर मिली थी। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए जिला बल और डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के जवानों ने एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सोमवार की सुबह जब जवान जंगलों के भीतर पहुंचे, तो घात लगाए नक्सलियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और काफी देर तक दोनों ओर से रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। जब गोलीबारी रुकी और इलाके की गहनता से तलाशी ली गई, तब एक महिला नक्सली का शव मिला, जिसकी पहचान परतापुर एरिया कमेटी की सदस्य और एरिया कमांडर रूपी के रूप में हुई है।

मृतक महिला नक्सली रूपी के प्रोफाइल पर गौर करें तो वह संगठन के भीतर काफी सक्रिय और प्रभावशाली मानी जाती थी। उसके ऊपर शासन द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो उसकी सक्रियता और नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता की गंभीरता को दर्शाता है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रूपी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी, जो पिछले वर्ष मानपुर-मोहला इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान मारा गया था। रूपी को बस्तर क्षेत्र में सक्रिय अंतिम कुछ वरिष्ठ तेलुगु कैडरों में से एक माना जा रहा था। उसकी मौत से नक्सलियों के नेतृत्व ढांचे को इस विशेष सेक्टर में गहरी चोट पहुँची है, क्योंकि वह लंबे समय से स्थानीय युवाओं को संगठन में शामिल करने और वारदातों की योजना बनाने में मुख्य भूमिका निभा रही थी। उल्लेखनीय है कि यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित करने के दावों के ठीक 12 दिन बाद हुई है। 31 मार्च 2026 को सरकार ने बस्तर के बड़े हिस्से को नक्सल प्रभाव से बाहर बताया था। हालांकि, रूपी जैसे सक्रिय कमांडर की मौजूदगी और यह ताजा संघर्ष दर्शाता है कि घने जंगलों के भीतर अभी भी कुछ पॉकेट्स में नक्सली सक्रिय हैं, जिन्हें जड़ से खत्म करने के लिए अभियान जारी है।

मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने केवल शव ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में युद्ध सामग्री भी जब्त की है। तलाशी अभियान के दौरान एक .315 बोर की राइफल, वायरलेस सेट, विस्फोटक, नक्सली साहित्य और दैनिक उपयोग के सामान बरामद किए गए हैं। बरामद हथियारों और गोला-बारूद से यह स्पष्ट होता है कि नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी. ने बताया कि क्षेत्र में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं अन्य नक्सली घायल अवस्था में छिपे न हों। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील कर रही है, लेकिन जो लोग हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ेंगे, उनके विरुद्ध इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

कांकेर का यह इलाका लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों की बढ़ती सक्रियता के कारण नक्सली बैकफुट पर हैं। पिछले 26 महीनों में लगभग 2700 से अधिक माओवादियों ने सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। हाल ही में 24 मार्च को वरिष्ठ कमांडर पापा राव ने भी अपने 17 साथियों के साथ हथियार डाले थे। इसके बावजूद, रूपी जैसे कुछ कट्टर कैडर अभी भी जंगलों में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इस एनकाउंटर के बाद बचे हुए नक्सलियों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ेगा और वे या तो आत्मसमर्पण करेंगे या इलाका छोड़ने पर मजबूर होंगे। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग अब इस सफलता के बाद ग्रामीणों के बीच विश्वास बहाली के कार्यों में जुट गया है। सुरक्षाबलों का उद्देश्य केवल नक्सलियों को खत्म करना ही नहीं, बल्कि उन इलाकों में विकास कार्यों को पहुँचाना भी है जहाँ अब तक लाल आतंक का साया था। एसपी निखिल राखेचा ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षाबलों की मुस्तैदी के कारण नक्सलियों की रसद और सूचना तंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने बचे हुए कैडरों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके पास आत्मसमर्पण करने और गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए अब बहुत कम समय बचा है।

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