यूट्यूब के मुफ्त क्रैश कोर्स से तैयार की जीत की राह, बरेली के कनिष्क सूर्यवंशी ने 98.8% अंकों के साथ पाया दूसरा स्थान।

उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणामों की घोषणा के साथ ही मेधावी छात्रों की सफलता की कहानियां सामने

Apr 16, 2026 - 16:29
 0  1
यूट्यूब के मुफ्त क्रैश कोर्स से तैयार की जीत की राह, बरेली के कनिष्क सूर्यवंशी ने 98.8% अंकों के साथ पाया दूसरा स्थान।
यूट्यूब के मुफ्त क्रैश कोर्स से तैयार की जीत की राह, बरेली के कनिष्क सूर्यवंशी ने 98.8% अंकों के साथ पाया दूसरा स्थान।
  • कंप्यूटर में हासिल किए शत-प्रतिशत अंक: सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का सपना संजोए कनिष्क बने युवाओं के लिए रोल मॉडल

उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणामों की घोषणा के साथ ही मेधावी छात्रों की सफलता की कहानियां सामने आने लगी हैं। इसी कड़ी में शहर के पीलीभीत रोड स्थित प्रतिष्ठित बीबीएल पब्लिक स्कूल के छात्र कनिष्क सूर्यवंशी ने अपनी असाधारण प्रतिभा और समर्पण से जिले का मान बढ़ाया है। कनिष्क ने बोर्ड की परीक्षा में कुल 98.8 प्रतिशत अंक अर्जित कर पूरे बरेली जनपद में दूसरा स्थान हासिल किया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे स्कूल परिसर में हर्ष का माहौल पैदा कर दिया है। परिणाम आने के बाद से ही कनिष्क के घर पर शुभचिंतकों और शिक्षकों का तांता लगा हुआ है, जो इस मेधावी छात्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। कनिष्क सूर्यवंशी की इस सफलता की सबसे विशेष बात उनकी अध्ययन पद्धति और अनुशासन रहा है। शहर के नार्थ सिटी एक्सटेंशन, कुर्मांचल नगर के निवासी कनिष्क ने अपनी पढ़ाई के लिए किसी महंगे कोचिंग संस्थान या व्यक्तिगत ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। उन्होंने बताया कि वे रोजाना केवल दो से तीन घंटे की नियमित और केंद्रित पढ़ाई करते थे। कनिष्क का मानना है कि पढ़ाई के घंटों से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस दौरान आपने कितनी एकाग्रता के साथ विषयों को समझा है। उन्होंने अपनी दिनचर्या में पढ़ाई और विश्राम के बीच एक आदर्श संतुलन बनाए रखा, जिससे उन्हें मानसिक थकान का अनुभव नहीं हुआ और वे लंबे समय तक विषयों को याद रखने में सफल रहे।

वर्तमान डिजिटल युग में जहां इंटरनेट को अक्सर ध्यान भटकाने वाला माना जाता है, कनिष्क ने इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने अपनी तैयारी को धार देने के लिए यूट्यूब पर उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक चैनलों और निःशुल्क ऑनलाइन क्रैश कोर्स का भरपूर उपयोग किया। उन्होंने किसी भी सशुल्क प्लेटफॉर्म के बजाय केवल उन संसाधनों का चुनाव किया जो बिना किसी फीस के उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर रहे थे। कनिष्क ने जटिल विषयों और कठिन अवधारणाओं को समझने के लिए डिजिटल सामग्री का सहारा लिया, जिससे उनके मूलभूत ज्ञान में अत्यधिक स्पष्टता आई। उनकी यह रणनीति उन छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी या आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित रहते हैं। कनिष्क सूर्यवंशी ने अपनी परीक्षा में कंप्यूटर विज्ञान विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं। यह अंक उनकी इस विषय के प्रति गहरी रुचि और तकनीकी समझ को प्रमाणित करते हैं। शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करना यह दर्शाता है कि उन्होंने विषय के हर सूक्ष्म पहलू का गहन अध्ययन किया था। कनिष्क के भविष्य के लक्ष्यों की बात करें तो उनकी नजरें अब प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने पर टिकी हैं। कंप्यूटर विषय में मिले पूरे अंकों ने उनके इस आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है कि वे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। उनका सपना एक सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर देश की डिजिटल प्रगति में योगदान देना है। कनिष्क का मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत कोडिंग का है, इसलिए वे अभी से अपने तकनीकी कौशल को निखारने पर ध्यान दे रहे हैं। उनके माता-पिता ने हमेशा उनके सपनों का समर्थन किया है और कनिष्क ने अपनी सफलता का श्रेय भी अपने परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है।

अनुशासन कनिष्क की जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है। उन्होंने अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने बताया कि समय प्रबंधन और सही संसाधनों का चुनाव ही उनकी जीत का आधार बना। अक्सर छात्र परीक्षा के अंतिम दिनों में भारी दबाव महसूस करते हैं, लेकिन कनिष्क ने अपनी तैयारी को पहले ही व्यवस्थित कर लिया था। उन्होंने अपने नोट्स खुद तैयार किए और पुराने प्रश्नपत्रों को हल करने का नियमित अभ्यास किया। उनकी इस कार्यप्रणाली ने उन्हें परीक्षा हॉल में आत्मविश्वास के साथ बैठने और कठिन प्रश्नों को सरलता से हल करने में मदद की, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। बरेली के शैक्षणिक परिदृश्य में कनिष्क की यह रैंक एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। बीबीएल पब्लिक स्कूल के प्रबंधन और शिक्षकों ने कनिष्क की सराहना करते हुए कहा कि वह शुरू से ही एक मेधावी और जिज्ञासु छात्र रहा है। स्कूल की कक्षाओं में भी कनिष्क की भागीदारी हमेशा सक्रिय रहती थी और वह जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान खोजने में अग्रणी रहता था। उनकी सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि आपके पास सही दिशा और स्पष्ट विजन है, तो आप सीमित संसाधनों के साथ भी शिखर पर पहुँच सकते हैं। जिले में दूसरा स्थान पाना कनिष्क की मेहनत के साथ-साथ उनके स्कूल की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी जीत है।

Also Read- बरेली में इंस्टाग्राम कमेंट का खूनी अंजाम: दोस्त ने ही ईंट से कुचलकर ली जान, सनक की भेंट चढ़ी 24 साल के युवक की जिंदगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow