जब सेट पर बिगड़ा था अनुशासन, जब मोहन बाबू ने अभिनेत्री मीना को दी थी मजेदार 'धमकी', वायरल हुआ पुराना किस्सा।
दक्षिण भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं जो फिल्मी पर्दे के पीछे के रिश्तों और कलाकारों के बीच के आपसी तालमेल की
- दक्षिण भारतीय सिनेमा के दो दिग्गजों के बीच हंसी-मजाक: मीना की शरारतों से परेशान हुए मोहन बाबू
- अभिनय के साथ मस्ती का तड़का: मीना और मोहन बाबू के बीच की केमिस्ट्री और वह यादगार घटना जिसने सबको हंसाया
दक्षिण भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं जो फिल्मी पर्दे के पीछे के रिश्तों और कलाकारों के बीच के आपसी तालमेल की एक अनूठी झलक पेश करती हैं। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित और मजेदार घटना दिग्गज अभिनेता मोहन बाबू और मशहूर अभिनेत्री मीना के बीच की है। मोहन बाबू, जिन्हें फिल्म जगत में उनके सख्त अनुशासन, दमदार आवाज और गंभीर व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है, एक बार अभिनेत्री मीना की चुलबुली हरकतों और निरंतर चलने वाली शरारतों के कारण अपना धैर्य खो बैठे थे। यह वाकया एक पुरानी सुपरहिट फिल्म की शूटिंग के दौरान का है, जहां मीना के बचपने ने न केवल क्रू के सदस्यों को हंसने पर मजबूर कर दिया, बल्कि अनुशासनप्रिय मोहन बाबू को भी एक अनोखा रुख अपनाने पर विवश कर दिया।
घटना के बारे में विस्तार से बात करें तो अभिनेत्री मीना उस समय अपने करियर के शिखर पर थीं और सेट पर उनके चंचल स्वभाव के चर्चे आम थे। शूटिंग के दौरान जब गंभीर दृश्य फिल्माए जा रहे होते थे, तब भी मीना अपनी हंसी नहीं रोक पाती थीं या फिर सह-कलाकारों के साथ मज़ाक करने का कोई मौका नहीं छोड़ती थीं। दूसरी ओर, मोहन बाबू अपने काम को लेकर अत्यंत समर्पित रहते थे और उन्हें सेट पर किसी भी प्रकार का व्यवधान पसंद नहीं था। एक विशेष दृश्य के रिहर्सल के दौरान मीना ने अपनी किसी हरकत से मोहन बाबू को इतना विचलित कर दिया कि उन्होंने मजाकिया अंदाज में ही सही, लेकिन एक ऐसी चेतावनी दे दी जिसने पूरे सेट का माहौल बदल दिया। मोहन बाबू ने मीना की लगातार बढ़ती शरारतों को सहन न कर पाने की स्थिति में उन्हें एक मजेदार धमकी दी। उन्होंने कहा कि यदि मीना ने तुरंत अपनी हरकतें बंद नहीं कीं और काम पर ध्यान नहीं दिया, तो वे उन्हें अगले शॉट के लिए तैयार होने की अनुमति नहीं देंगे या फिर उन्हें किसी ऐसी सजा का सामना करना पड़ेगा जिसे सुनकर कोई भी अपनी हंसी नहीं रोक सका। मोहन बाबू का यह कड़ा लेकिन मजाकिया अंदाज वास्तव में मीना को अनुशासन में लाने की एक कोशिश थी। फिल्म उद्योग में मोहन बाबू का दबदबा ऐसा रहा है कि उनके सामने बड़े-बड़े कलाकार भी संभलकर रहते हैं, लेकिन मीना के साथ उनका रिश्ता पिता और पुत्री जैसा रहा है, इसीलिए उन्होंने इस स्थिति को हल्के-फुल्के अंदाज में संभाला। फिल्म निर्माण के दौरान तनावपूर्ण माहौल को हल्का करने के लिए अक्सर कलाकार इस तरह की नोंक-झोंक करते हैं। मोहन बाबू और मीना के बीच की यह घटना न केवल उनके निजी संबंधों की प्रगाढ़ता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वरिष्ठ कलाकार कैसे कनिष्ठों को अनुशासन के साथ-साथ स्नेह भी प्रदान करते हैं।
इस घटना के बाद सेट पर मौजूद सभी लोग अपनी हंसी नहीं दबा सके। मीना, जो स्वयं मोहन बाबू का बहुत सम्मान करती हैं, उनकी इस 'धमकी' के बाद थोड़े समय के लिए शांत हो गईं, लेकिन उनका शरारती अंदाज जल्द ही फिर से लौट आया। बताया जाता है कि मोहन बाबू की इस चेतावनी का उद्देश्य वास्तव में उन्हें डराना नहीं, बल्कि फिल्म के प्रति उनकी गंभीरता को पुनः जागृत करना था। इस मजेदार वाकये ने फिल्म की पूरी यूनिट के बीच के तनाव को कम कर दिया और बाकी की शूटिंग बहुत ही खुशनुमा माहौल में पूरी हुई। आज भी जब कभी पुराने दौर की फिल्मों और कलाकारों की यादें ताजा की जाती हैं, तो इस किस्से का जिक्र जरूर होता है।
दक्षिण भारतीय सिनेमा के इन दो सितारों ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया है और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। मोहन बाबू और मीना के बीच की यह आपसी समझ ही थी कि वे एक-दूसरे की कमियों और खूबियों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने में सहज महसूस करते थे। मीना ने कई बार साक्षात्कारों में स्वीकार किया है कि मोहन बाबू के साथ काम करना एक स्कूल में रहने जैसा है, जहां आपको सीखने के साथ-साथ अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया जाता है। उनकी वह धमकी आज भी एक मजेदार संस्मरण के रूप में फिल्म प्रेमियों के बीच साझा की जाती है, जो यह साबित करती है कि सेट पर केवल काम ही नहीं होता, बल्कि यादें भी बनती हैं। फिल्मी गलियारों में इस तरह की कहानियां अक्सर वर्षों बाद बाहर आती हैं और प्रशंसकों के लिए मनोरंजन का बड़ा साधन बनती हैं। मोहन बाबू का अनुशासन और मीना की मासूमियत का यह मेल भारतीय सिनेमा के उस दौर की याद दिलाता है जब तकनीक से अधिक महत्व मानवीय संवेदनाओं और आपसी रिश्तों को दिया जाता था। इस घटना ने यह भी सिखाया कि कैसे एक वरिष्ठ अभिनेता अपने कनिष्ठ कलाकार की ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ सकता है। मोहन बाबू की धमकी भले ही शब्दों में सख्त रही हो, लेकिन उसके पीछे का भाव पूरी तरह से सकारात्मक और मनोरंजक था, जिसे मीना ने भी उसी भावना के साथ ग्रहण किया।
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