संभल में अतिक्रमण पर बड़ा प्रहार: ईदगाह और इमामबाड़े के बाद अब मस्जिद और मदरसे पर चला प्रशासन का बुलडोजर।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान अब अपने निर्णायक चरण

Apr 17, 2026 - 11:32
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संभल में अतिक्रमण पर बड़ा प्रहार: ईदगाह और इमामबाड़े के बाद अब मस्जिद और मदरसे पर चला प्रशासन का बुलडोजर।
संभल में अतिक्रमण पर बड़ा प्रहार: ईदगाह और इमामबाड़े के बाद अब मस्जिद और मदरसे पर चला प्रशासन का बुलडोजर।
  • सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त करने की मुहिम: संभल के मुबारकपुर बंद गांव में अवैध निर्माण ढहाने पहुंची भारी पुलिस फोर्स
  • कानूनी कार्रवाई और कड़े तेवर: खेल के मैदान और खाद के गड्ढे की भूमि पर बने अतिक्रमण को हटाने के लिए चला ध्वस्तीकरण अभियान

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान अब अपने निर्णायक चरण में पहुँच गया है। जिला प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए मुबारकपुर बंद गांव में एक मस्जिद और मदरसे के अवैध निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की है। यह कार्रवाई उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत पूर्व में ईदगाह और इमामबाड़े जैसे धार्मिक स्थलों को भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के कारण हटाया गया था। राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी में बुलडोजर के जरिए इन संरचनाओं को ढहाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया। प्रशासन का स्पष्ट तर्क है कि कानून की नजर में सरकारी जमीन पर किया गया कोई भी कब्जा, चाहे वह धार्मिक हो या निजी, बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उसे अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा। मुबारकपुर बंद गांव में हुई इस कार्रवाई की जड़ें राजस्व अभिलेखों की गहन जांच से जुड़ी हैं। जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशन में हुई जांच में यह पाया गया कि जिस भूमि पर मस्जिद और मदरसे का निर्माण किया गया था, वह सरकारी रिकॉर्ड में 'खेल के मैदान' और 'खाद के गड्ढे' के लिए सुरक्षित थी। प्रशासन के अनुसार, इन जमीनों का उपयोग सार्वजनिक हित और गांव के विकास के लिए होना चाहिए था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहाँ अनधिकृत रूप से पक्के निर्माण खड़े कर दिए गए। जब इन निर्माणों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुईं और राजस्व टीम ने पैमाइश की, तो अतिक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद, अवैध कब्जा करने वालों को नियमानुसार नोटिस जारी किए गए, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने और कब्जा न हटाने की स्थिति में बलपूर्वक ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया।

ध्वस्तीकरण के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या सांप्रदायिक तनाव की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की थी। कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ पीएसी (PAC) के जवानों को गांव के चारों ओर तैनात किया गया था। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था ताकि असामाजिक तत्व कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ न कर सकें। उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी रैंक के अधिकारियों ने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें सरकारी आदेशों और भूमि के मूल रिकॉर्ड दिखाकर शांत कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुविधाओं जैसे खेल के मैदान के लिए आरक्षित भूमि का स्वरूप बदलना पूरी तरह से गैरकानूनी है। उत्तर प्रदेश सरकार की वर्तमान नीति के अनुसार, सार्वजनिक मार्गों, तालाबों, चारागाहों और खेल के मैदानों पर बने किसी भी अवैध धार्मिक या निजी निर्माण को चिन्हित कर हटाया जाना है। संभल में हाल के महीनों में हुई कार्रवाइयां इसी जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम हैं, जहाँ अवैध निर्माण के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के अभियान चलाया जा रहा है। संभल में चल रहे इस अभियान का एक विशेष पैटर्न यह है कि प्रशासन केवल उन निर्माणों को निशाना बना रहा है जो सीधे तौर पर सरकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक भूमि पर हैं। मुबारकपुर बंद की घटना से पहले जिले के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही कार्रवाइयां हुई थीं, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि जिला प्रशासन अतिक्रमण को लेकर अत्यंत गंभीर है। राजस्व विभाग की टीम ने बताया कि खेल के मैदान की भूमि ग्राम समाज की संपत्ति होती है और उस पर गाँव के बच्चों का अधिकार होता है। इसी तरह खाद के गड्ढे की जमीन कृषि और स्वच्छता व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है। इन संपत्तियों को वापस ग्राम समाज के सुपुर्द करना ही प्रशासन की प्राथमिकता है, ताकि भविष्य में इन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए उपयोग में लाया जा सके।

इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने जिले में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने सभी धार्मिक और सामाजिक समूहों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कार्रवाई से पहले स्थानीय प्रभावशाली लोगों और धर्मगुरुओं के साथ संवाद स्थापित किया था ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर किया जा सके। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि उनकी कार्रवाई केवल उन विशिष्ट खसरा नंबरों तक सीमित है जो सरकारी रिकॉर्ड में अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं। इस अभियान के कारण अन्य उन क्षेत्रों में भी हड़कंप मचा हुआ है जहाँ सरकारी जमीन पर धार्मिक या अन्य प्रकार के कब्जे मौजूद हैं। ध्वस्तीकरण के बाद खाली कराई गई भूमि पर अब प्रशासन ने घेराबंदी करने की योजना बनाई है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जमीन को खाली कराने के बाद तुरंत उसका सीमांकन किया जाएगा और वहां संबंधित सरकारी उपयोग का बोर्ड लगाया जाएगा। खेल के मैदान के लिए आवंटित भूमि पर जल्द ही खेल गतिविधियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अतिक्रमणकारी दोबारा वहां पैर न पसार सकें। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से भू-माफियाओं और अवैध कब्जा करने वालों के हौसले पस्त होंगे और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। संभल में बुलडोजर की यह गूंज अब पड़ोसी जनपदों में भी सुनाई दे रही है, जहाँ प्रशासन ने इसी तरह के डेटा का संकलन शुरू कर दिया है।

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