'सूर्य नूतन' से बदलेगी रसोई की सूरत: इंडियन ऑयल ने पेश किया बिना गैस और बिजली से चलने वाला स्वदेशी सोलर चूल्हा।
भारत में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने
- महंगे गैस सिलेंडर से मिलेगी स्थायी मुक्ति: इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम की प्री-बुकिंग शुरू, जानें कीमत और खूबियां
- रसोई घर के भीतर सौर ऊर्जा से पकेगा खाना: हाइब्रिड तकनीक से लैस 'सूर्य नूतन' चूल्हा दिन और रात दोनों समय इस्तेमाल के लिए तैयार
भारत में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 'सूर्य नूतन' (Surya Nutan) नामक इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम को बाजार में उतारने की तैयारी कर ली है। यह उपकरण एक स्वदेशी, नवीन और टिकाऊ समाधान है, जिसे विशेष रूप से भारतीय रसोई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद स्थित इंडियन ऑयल के अनुसंधान और विकास केंद्र द्वारा विकसित किया गया है। सूर्य नूतन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे धूप में रखने की आवश्यकता नहीं है; इसके सोलर पैनल छत पर लगाए जाते हैं, जबकि चूल्हा सीधे रसोई के अंदर स्थापित किया जाता है। यह तकनीक उन लाखों परिवारों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जो हर महीने एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते खर्च से परेशान हैं, क्योंकि यह पूरी तरह से मुफ्त सौर ऊर्जा पर आधारित है।
सूर्य नूतन प्रणाली के काम करने का तरीका बेहद आधुनिक और प्रभावी है। इसमें छत पर स्थापित एक सोलर पैनल सौर ऊर्जा को ग्रहण करता है और इसे एक विशेष केबल के माध्यम से रसोई में रखे थर्मल स्टोरेज यूनिट तक पहुंचाता है। यह यूनिट ऊर्जा को स्टोर करने की क्षमता रखती है, जिससे न केवल तेज धूप के समय, बल्कि शाम को और रात के अंधेरे में भी खाना पकाया जा सकता है। यह एक हाइब्रिड सिस्टम है, जिसका अर्थ है कि बादलों वाले दिनों या अत्यधिक आवश्यकता के समय इसे बिजली के वैकल्पिक स्रोत से भी चलाया जा सकता है। इस उपकरण को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह भारतीय परिवारों की कुकिंग आदतों, जैसे कि रोटी बनाना, तलना, उबालना और सब्जी पकाना, को आसानी से पूरा कर सके। इस उपकरण की कार्यक्षमता और इसके मॉडल्स के बारे में विस्तार से बात करें तो कंपनी ने इसे तीन अलग-अलग वेरिएंट्स में पेश करने की योजना बनाई है। इसके एलडी (लो डोमेस्टिक) मॉडल को उन छोटे परिवारों के लिए बनाया गया है जिनकी जरूरतें सीमित हैं, जबकि एलडीबी (लो डोमेस्टिक विद हाइब्रिड) मॉडल रात में भी खाना बनाने की सुविधा देता है। वहीं, प्रीमियम मॉडल में अधिक स्टोरेज क्षमता और बिजली बैकअप की सुविधा दी गई है। सूर्य नूतन का रखरखाव भी बहुत आसान है और इसके निर्माण में ऐसे पदार्थों का उपयोग किया गया है जो लंबे समय तक चलते हैं। सौर ऊर्जा का उपयोग करने के कारण यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है, जो भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होगा। सूर्य नूतन सिस्टम में इस्तेमाल किया गया थर्मल चार्जिंग सिस्टम ऊर्जा की हानि को न्यूनतम करता है। यह सिस्टम एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर चार लोगों के परिवार के लिए दोपहर और रात का भोजन आसानी से तैयार कर सकता है। इसकी हीटिंग प्लेट का तापमान बहुत ही कम समय में खाना पकाने के अनुकूल हो जाता है।
इंडियन ऑयल ने सूर्य नूतन की प्री-बुकिंग की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके। शुरुआती दौर में इसकी कीमत को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार बेस मॉडल लगभग 12,000 से 15,000 रुपये के बीच हो सकता है, जबकि टॉप-एंड हाइब्रिड मॉडल की कीमत 25,000 से 30,000 रुपये तक जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से सौर उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी के बाद इसकी प्रभावी लागत काफी कम होने की उम्मीद है। कंपनी का लक्ष्य इसे बड़े पैमाने पर उत्पादित करना है ताकि आने वाले समय में इसकी कीमत घटकर 10,000 रुपये के आसपास आ सके, जिससे यह ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच में आसानी से आ सके।
सुरक्षा के नजरिए से भी सूर्य नूतन पारंपरिक गैस चूल्हों की तुलना में कहीं अधिक भरोसेमंद है। चूंकि इसमें किसी भी प्रकार की ज्वलनशील गैस का प्रवाह नहीं होता, इसलिए सिलेंडर फटने या आग लगने जैसी घटनाओं का जोखिम शून्य हो जाता है। इसके अलावा, यह चूल्हा रसोई के तापमान को भी नियंत्रित रखता है क्योंकि इसमें केवल कुकिंग प्लेट गर्म होती है, जिससे खाना बनाने वाले को भीषण गर्मी का सामना नहीं करना पड़ता। यह उपकरण उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहां एलपीजी की डिलीवरी पहुंचना कठिन है या जहां बिजली की कटौती एक बड़ी समस्या है। इसके टिकाऊपन को देखते हुए कंपनी इस पर लंबी वारंटी देने की भी योजना बना रही है ताकि ग्राहकों का भरोसा जीता जा सके। पर्यावरण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से 'सूर्य नूतन' का महत्व और भी बढ़ जाता है। पारंपरिक चूल्हों या लकड़ी पर खाना बनाने से निकलने वाला धुआं महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। सोलर कुकिंग सिस्टम पूरी तरह से धुआं रहित है और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है। इंडियन ऑयल का दावा है कि यदि देश का एक बड़ा हिस्सा इस तकनीक को अपना लेता है, तो भारत के एलपीजी आयात बिल में भारी कटौती हो सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यह 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है, क्योंकि यह पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित तकनीक है।
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