वार्ता से पहले ही बिगड़ा समीकरण: ईरानी स्पीकर बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर लगाया 10-सूत्रीय प्रस्ताव के उल्लंघन का आरोप।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण तनाव में हाल ही में लगे अल्पविराम ने वैश्विक समुदाय को राहत की सांस लेने का अवसर दिया

Apr 9, 2026 - 12:57
 0  6
वार्ता से पहले ही बिगड़ा समीकरण: ईरानी स्पीकर बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर लगाया 10-सूत्रीय प्रस्ताव के उल्लंघन का आरोप।
वार्ता से पहले ही बिगड़ा समीकरण: ईरानी स्पीकर बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर लगाया 10-सूत्रीय प्रस्ताव के उल्लंघन का आरोप।
  • ईरान-अमेरिका संघर्ष: अल्पविराम के 48 घंटों में ही सीजफायर पर संकट, विश्वास की कमी ने फिर बढ़ाई तल्खी
  • मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों को लगा गहरा झटका, 3 प्रमुख शर्तों के उल्लंघन ने खड़ा किया युद्ध की वापसी का डर

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण तनाव में हाल ही में लगे अल्पविराम ने वैश्विक समुदाय को राहत की सांस लेने का अवसर दिया था, लेकिन यह शांति अधिक समय तक टिकती नहीं दिख रही है। सीजफायर लागू हुए अभी महज 48 घंटे भी नहीं बीते हैं कि दोनों देशों के बीच फिर से जुबानी जंग और गंभीर आरोपों का दौर शुरू हो गया है। इस ताजा विवाद ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है जो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली आगामी वार्ता से जुड़ी थीं। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सीधे तौर पर अमेरिका पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा है कि शांति के लिए रखे गए 10-सूत्रीय प्रस्ताव की शर्तों को अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा तोड़ा गया है। गालिबाफ का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि दोनों शक्तियों के बीच ऐतिहासिक अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि एक छोटी सी चूक भी पूरे समझौते को ध्वस्त कर सकती है।

ईरानी स्पीकर ने अपने बयान में उन विशिष्ट बिंदुओं का उल्लेख किया है जिन्हें लेकर विवाद की स्थिति बनी है। गालिबाफ के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले ही 10-सूत्रीय प्रस्ताव में से कम से कम तीन महत्वपूर्ण शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया है। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाइयों और ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ से जुड़ा है। ईरान का दावा है कि एक घुसपैठिया ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गया था, जिसे नष्ट कर दिया गया। गालिबाफ ने तर्क दिया है कि जब शांति की बात चल रही हो और सीजफायर पर सहमति बनी हो, तब ऐसी कार्रवाइयां समझौते की मूल भावना के विरुद्ध हैं। उन्होंने अमेरिका के प्रति अपने "गहरे ऐतिहासिक अविश्वास" को एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि वाशिंगटन अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने में हमेशा विफल रहा है और इस बार भी वही सिलसिला दोहराया गया है।

सीजफायर के उल्लंघन के आरोपों ने इस्लामाबाद में होने वाली द्विपक्षीय वार्ता के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका एक ओर बातचीत की मेज पर आने का दिखावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पर्दे के पीछे से आक्रामक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि 10-सूत्रीय प्रस्ताव का छठा बिंदु, जो ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से संबंधित है, उसे भी अमेरिका द्वारा नकारा जा रहा है। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी संवर्धन की संप्रभुता को मान्यता नहीं दी जाती, तब तक किसी भी स्थाई समझौते पर पहुंचना असंभव है। अमेरिका की ओर से आई प्रतिक्रियाओं ने इस तनाव को और हवा दी है, क्योंकि वहां के प्रशासन ने ईरान के कुछ प्रस्तावों को "अस्वीकार्य" करार दिया है, जिससे टकराव की स्थिति फिर से पैदा हो गई है। ईरान द्वारा प्रस्तुत 10-सूत्रीय प्रस्ताव में न केवल सैन्य संघर्ष को रोकने की बात कही गई है, बल्कि इसमें मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना की वापसी, ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना और ईरान के परमाणु अधिकारों की मान्यता जैसे कड़े बिंदु शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस प्रस्ताव को "काम करने योग्य आधार" कहा था, लेकिन अब संवर्धन अधिकारों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़ गए हैं। इस प्रस्ताव के उल्लंघन के आरोपों ने अब इस कूटनीतिक पहल को एक ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया है जहां से युद्ध की वापसी का मार्ग अधिक सुगम लग रहा है।

पश्चिम एशिया के इस जटिल परिदृश्य में ईरान का आरोप है कि अमेरिका अपने मित्र देशों के माध्यम से संघर्ष को जीवित रखना चाहता है। गालिबाफ ने आरोप लगाया कि लेबनान में होने वाले हमले सीधे तौर पर सीजफायर की पहली शर्त का उल्लंघन हैं। उनके अनुसार, शांति का अर्थ सभी मोर्चों पर युद्धविराम होना चाहिए, न कि केवल चयनित क्षेत्रों में। इस तनातनी के बीच इराक जैसे पड़ोसी देशों ने अपना हवाई क्षेत्र फिर से खोल दिया था, लेकिन अब ताजा बयानों के बाद वहां भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि उल्लंघन का यह सिलसिला जारी रहा, तो ईरान के लिए बातचीत की मेज पर बने रहना या एकतरफा युद्धविराम का पालन करना संभव नहीं होगा। यह स्थिति पूरे क्षेत्र को फिर से एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर धकेल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह सीजफायर केवल एक रणनीति थी ताकि दोनों पक्ष अपनी सैन्य तैयारियों को पुनः व्यवस्थित कर सकें। गालिबाफ के बयानों ने इस संदेह को और पुख्ता किया है कि शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा वह विश्वास की कमी है जो दशकों से इन दोनों देशों के बीच बनी हुई है। ईरानी स्पीकर ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता है, तो ईरान अपनी रक्षा और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उनके भाषण में राष्ट्रवाद और धार्मिक प्रतिरोध की झलक स्पष्ट थी, जो ईरानी जनता को एक बार फिर संघर्ष के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का प्रयास मानी जा रही है।

Also Read- होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का 'टोल प्लान': ट्रंप का दावा- "हम ईरान से युद्ध जीत चुके हैं, अब वसूली की बारी"

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow