पालक मंत्री संजय शिरसाट का अजीबोगरीब दावा: छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम मुख्यालय में 'आत्माओं' का साया।

महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले छत्रपति संभाजीनगर के जिला पालक मंत्री

Apr 16, 2026 - 16:19
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पालक मंत्री संजय शिरसाट का अजीबोगरीब दावा: छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम मुख्यालय में 'आत्माओं' का साया।
पालक मंत्री संजय शिरसाट का अजीबोगरीब दावा: छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम मुख्यालय में 'आत्माओं' का साया।
  • कब्रिस्तान की जमीन पर बनी है महानगरपालिका की इमारत: संजय शिरसाट ने मुख्यालय शिफ्ट करने की उठाई मांग
  • अंधविश्वास या प्रशासनिक चिंता? नगर निगम मुख्यालय की जमीन को लेकर छिड़ा सियासी घमासान, मंत्री के बयान से सनसनी

महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले छत्रपति संभाजीनगर के जिला पालक मंत्री संजय शिरसाट ने एक बार फिर एक ऐसा दावा किया है जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। शिरसाट ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम (CSMC) का वर्तमान मुख्यालय जिस भूमि पर स्थित है, वहां पहले एक कब्रिस्तान हुआ करता था। उनके अनुसार, इस भौगोलिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण कार्यालय के वातावरण में 'अतृप्त आत्माओं' का वास है, जो वहां काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अशांति पैदा करती हैं। मंत्री ने इस स्थिति को नगर निगम की प्रगति में एक बड़ी बाधा बताते हुए सुझाव दिया है कि महानगरपालिका के मुख्यालय को किसी अन्य उपयुक्त और 'दोषमुक्त' स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब संजय शिरसाट छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम के बेगमपुरा स्थित मुख्यालय में एक आधिकारिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम नगर निगम के अग्निशमन विभाग के बेड़े में एक नई अत्याधुनिक दमकल गाड़ी को शामिल करने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। अपने संबोधन के दौरान अचानक उन्होंने इमारत की वास्तु स्थिति पर बात करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी इमारत एक साये के नीचे है और यहाँ होने वाली नकारात्मक अनुभूतियाँ किसी न किसी रूप में प्रशासन के कामकाज को प्रभावित करती हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे, क्योंकि एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से इस तरह की अलौकिक बातें अमूमन सुनने को नहीं मिलती हैं। संजय शिरसाट ने अपने तर्क को विस्तार देते हुए कहा कि कब्रिस्तान की जमीन पर निर्माण होने के कारण वहां की ऊर्जा नकारात्मक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यालय के भीतर मौजूद 'आत्माएं' शांत नहीं हैं, जिसकी वजह से अक्सर निगम के महत्वपूर्ण कार्यों में अड़चनें आती हैं या बेवजह के विवाद खड़े होते हैं। मंत्री का मानना है कि जब तक मुख्यालय इस जमीन पर रहेगा, तब तक नगर निगम का पूर्ण विकास और प्रशासनिक शांति संभव नहीं है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और शहर के किसी अन्य हिस्से में एक नई, आधुनिक और सकारात्मक ऊर्जा वाली इमारत बनाने के लिए जमीन की तलाश शुरू करें। छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम का वर्तमान मुख्यालय जिस क्षेत्र में बना है, वह ऐतिहासिक रूप से काफी पुराना है। स्थानीय मान्यताओं और पुराने रिकॉर्ड्स के अनुसार, शहर के इस हिस्से में प्राचीन काल में कई छोटे-बड़े कब्रिस्तान और समाधियां हुआ करती थीं। मंत्री शिरसाट ने इन्हीं ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग करते हुए अपना नया प्रशासनिक प्रस्ताव रखा है।

मंत्री के इस बयान ने न केवल प्रशासन बल्कि सामाजिक संगठनों के बीच भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। तर्कवादी संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे आधुनिक युग में अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी की बात करती है, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट स्तर के मंत्री आत्माओं और कब्रिस्तान के साये जैसे दावों के आधार पर सरकारी मुख्यालय को शिफ्ट करने की बात कर रहे हैं। यह मुद्दा अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य स्तर पर भी इसकी चर्चा हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासनिक विफलता को छुपाने के लिए इस तरह के अलौकिक कारणों का सहारा लिया जा रहा है या वाकई इसके पीछे कोई गंभीर चिंता छिपी है।

संजय शिरसाट के इस प्रस्ताव का असर नगर निगम के आगामी बजट और योजना बैठकों पर भी पड़ सकता है। यदि मुख्यालय को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो इसमें करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन खर्च होगा। वर्तमान इमारत में पहले से ही करोड़ों रुपये का निवेश किया जा चुका है और वहां तमाम आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में केवल 'आत्माओं के साये' के आधार पर नई इमारत का निर्माण करना वित्तीय रूप से कितना उचित होगा, इस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, शिरसाट अपनी बात पर कायम हैं और उनका कहना है कि वे केवल वही बोल रहे हैं जो वहां महसूस किया जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस विषय पर मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा करेंगे। इस मामले में दिलचस्प पहलू यह है कि नगर निगम के कर्मचारियों के बीच भी अब दबी जुबान में इस पर बातें शुरू हो गई हैं। कुछ पुराने कर्मचारी मंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए कहते हैं कि शाम के बाद कार्यालय का माहौल भारी महसूस होता है, जबकि अधिकांश युवा अधिकारी इसे पूरी तरह से निराधार और तर्कहीन मानते हैं। शहर के वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जमीन का इतिहास उसकी संरचना को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसे आत्माओं से जोड़ना वैज्ञानिक आधार पर गलत है। फिलहाल, नगर निगम आयुक्त ने इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन चर्चा है कि इस बयान के बाद मुख्यालय में सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर कुछ नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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