सलीम खान और आदित्य पंचोली को चूना लगाने वाले 'करोड़पति मजदूर' का पर्दाफाश, ठगी के पैसों से बनाई फिल्म और की चार शादियां।
सपनों के सौदागरों और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों को अपनी मीठी बातों और वेश बदलकर ठगने वाले एक शातिर 'नटवरलाल' का अंत
- रंगमंच से कम नहीं ठगी का खेल: वेश बदलकर फिल्म स्टार्स को ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार
- 25 साल का आपराधिक सफर: ठगी के पैसों से बनाई फिल्म और की चार शादियां, गुरुग्राम पुलिस ने दबोचा मास्टरमाइंड
सपनों के सौदागरों और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों को अपनी मीठी बातों और वेश बदलकर ठगने वाले एक शातिर 'नटवरलाल' का अंत आखिरकार सलाखों के पीछे हुआ है। गुरुग्राम पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली और दिग्गज पटकथा लेखक सलीम खान के करीबियों को भी नहीं बख्शा। अप्रैल 2026 में हुई इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के सरगना सोलंकी प्रभुभाई उर्फ कल्पेश और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पिछले 25 वर्षों से सक्रिय था और इसका काम करने का तरीका इतना शातिर था कि बड़े-बड़े शिक्षित और अनुभवी लोग भी इनके जाल में फंस जाते थे। पुलिस ने इनके पास से 2.30 करोड़ रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद किया है, जो इनकी ठगी के साम्राज्य की गवाही दे रहा है। इस गिरोह की कार्यप्रणाली किसी फिल्मी पटकथा जैसी थी। आरोपी प्रभुभाई और उसके साथी अक्सर फटे-पुराने कपड़े पहनकर और खुद को मजदूर या जेसीबी ऑपरेटर बताकर रईस लोगों के पास जाते थे। वे खुद को बेहद डरा हुआ और मजबूर दिखाते हुए दावा करते थे कि उन्हें किसी निर्माण स्थल या रेलवे लाइन की खुदाई के दौरान सोने के सिक्कों और ईंटों का पुराना खजाना मिला है। वे शिकार को यह झांसा देते थे कि वे इन सिक्कों को खुले बाजार या सुनार के पास नहीं बेच सकते क्योंकि उन्हें पुलिस और आयकर विभाग का डर है। इसी डर और मजबूरी का नाटक करके वे पीड़ितों को सस्ते दाम पर सोने के सिक्के बेचने का प्रस्ताव देते थे। लोग कम कीमत में सोने के लालच में आकर इनके झांसे में फंस जाते थे और अपनी जमा पूंजी इन्हें सौंप देते थे।
पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए यह गिरोह एक विशेष तरकीब अपनाता था। शुरुआत में, वे संभावित खरीदार को जांच के लिए एक या दो असली सोने के सिक्के देते थे। जब पीड़ित उन सिक्कों को किसी प्रतिष्ठित सुनार से चेक करवाता और वे असली निकलते, तो उसका विश्वास अटूट हो जाता था। एक बार जब शिकार पूरी तरह से इनके जाल में फंस जाता, तो गिरोह एक बड़ी डील फाइनल करता था। असली सिक्के दिखाकर और भरोसा दिलाकर, वे करोड़ों रुपये और जेवर लेकर उन्हें पीतल या तांबे पर सोने की परत चढ़े हुए नकली सिक्के थमा देते थे और फरार हो जाते थे। फिल्म अभिनेता आदित्य पंचोली से करीब 25 लाख रुपये और सलीम खान के निजी सहायक से लगभग 20 लाख रुपये की ठगी इसी 'असली दिखाकर नकली थमाने' वाली तरकीब से की गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड प्रभुभाई ने ठगी के पैसों से न केवल आलीशान होटल खरीदे, बल्कि उसने 'लव यू' (Love You) नाम की एक गुजराती फिल्म भी बनाई थी। इतना ही नहीं, उसने अपनी काली कमाई के दम पर चार शादियां कीं और एक पत्नी को नगर निकाय चुनावों में भी उतारा था ताकि वह राजनीतिक संरक्षण हासिल कर सके। गुरुग्राम पुलिस की अपराध शाखा सेक्टर-43 की टीम ने इस गिरोह तक पहुँचने के लिए तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों का जाल बिछाया था। हाल ही में इस गिरोह ने गुरुग्राम के एक बड़े निर्यातक (Exporter) से करीब 2.49 करोड़ रुपये और 500 ग्राम सोना ठगा था। पीड़ित निर्यातक को उस समय निशाना बनाया गया जब वह अपनी महंगी गाड़ी सड़क किनारे ठीक कर रहा था। पुलिस ने जांच में पाया कि ये लोग हाईवे पर उन रईस लोगों की रेकी करते थे जो लग्जरी कारों में सफर करते थे। इसके बाद, 'मजदूर' बनकर उनसे संपर्क साधा जाता था। गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में कड़ी मेहनत की और वडोदरा व गुजरात के अन्य हिस्सों से इन चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में दर्जनों मामले दर्ज हैं। गिरोह का सरगना प्रभुभाई दिल्ली-मुंबई हाईवे पर होटल पीएम (Hotel PM) का मालिक भी है, जिसे उसने ठगी के पैसों से खरीदा था। पुलिस अब इस मामले में आयकर विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को भी शामिल करने की योजना बना रही है ताकि उनकी अवैध संपत्ति को जब्त किया जा सके। जांच में यह भी पता चला है कि इनके साथ कुछ सुनार भी मिले हुए थे जो पीतल के सिक्कों पर इतनी सफाई से सोने की परत चढ़ाते थे कि नग्न आंखों से उनकी पहचान करना लगभग नामुमकिन होता था। पुलिस ने दो महिला सदस्यों की भी पहचान की है जो वर्तमान में अन्य मामलों में राजस्थान की जेल में बंद हैं। इस गिरफ्तारी के बाद बॉलीवुड गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई ऐसी हस्तियां जो अपनी प्रतिष्ठा के डर से शिकायत करने से कतराती थीं, अब सामने आ सकती हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी 'सस्ते सोने' के प्रस्ताव पर भरोसा न करें। सड़कों पर या अनधिकृत रूप से सोने के सिक्के बेचने वाले अक्सर इसी तरह के गिरोहों का हिस्सा होते हैं। यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो अधिक लाभ के चक्कर में अपनी सुरक्षा और समझदारी को ताक पर रख देते हैं। प्रभुभाई जैसे अपराधी समाज की इसी लालच और 'डिस्काउंट' की मानसिकता का फायदा उठाकर अपना साम्राज्य खड़ा करते हैं।
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