बोतल पर छपे ISI मार्क और कोड से करें शुद्धता की पहचान, जानें IS 14543 और IS 13428 का मतलब।
बाजार में मिलने वाली ₹20 की पानी की बोतल को हम अक्सर 'मिनरल वॉटर' समझकर खरीद लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बोतल बंद पानी
- 'पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर' और 'नेचुरल मिनरल वॉटर' के बीच का असली अंतर जानें
- नकली पानी के कारोबार से ऐसे बचें: सील, एक्सपायरी डेट और टीडीएस लेवल चेक करने का सही तरीका
बाजार में मिलने वाली ₹20 की पानी की बोतल को हम अक्सर 'मिनरल वॉटर' समझकर खरीद लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बोतल बंद पानी असल में मिनरल वॉटर नहीं होता? 2026 में लागू हुए नए मानकों और नियमों के अनुसार, असली मिनरल वॉटर और साधारण शुद्ध पानी (Packaged Drinking Water) के बीच का अंतर समझना अब और भी जरूरी हो गया है। आप असली मिनरल वॉटर की पहचान कैसे करें और यह कैसे सुनिश्चित करें कि आप जो पानी पी रहे हैं वह शुद्ध है या नहीं? आइये जानते हैं इसके बारे में
1. लेबल पर लिखे कोड को ध्यान से देखें
भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने पानी की बोतलों के लिए दो अलग-अलग कोड निर्धारित किए हैं। यही कोड बताते हैं कि आप क्या पी रहे हैं:
IS 14543: अगर बोतल पर यह कोड लिखा है, तो इसका मतलब है कि यह Packaged Drinking Water है। यह पानी किसी भी स्रोत (नल, बोरवेल या नदी) से लिया जा सकता है और फिर इसे RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) जैसी प्रक्रियाओं से शुद्ध किया जाता है। इसमें बाद में खनिज मिलाए जा सकते हैं।
IS 13428: यह कोड Natural Mineral Water के लिए होता है। यह पानी सीधे प्राकृतिक स्रोतों (जैसे पहाड़ों या भूमिगत झरनों) से आता है और इसमें प्राकृतिक रूप से ही खनिज मौजूद होते हैं। इसकी कीमत आमतौर पर ₹20 से कहीं अधिक होती है।
2. सील और पैकेजिंग की जांच
नकली पानी के कारोबारी अक्सर पुरानी बोतलों में नल का पानी भरकर उन्हें दोबारा सील कर देते हैं। इसे पहचानने के लिए:
कैप की सील: बोतल खोलते समय अगर 'कड़क' की आवाज न आए या सील पहले से ढीली लगे, तो उसे न खरीदें।
बोतल की स्थिति: बोतल पर खरोंचें या उसका गंदा होना इस बात का संकेत है कि वह पुरानी है और उसे दोबारा भरा गया है। नई बोतल हमेशा साफ और पारदर्शी होती है।
3. FSSAI लाइसेंस और ISI मार्क
1 जनवरी 2026 से लागू हुए नए नियमों के अनुसार, हर निर्माता को अपनी बोतल पर FSSAI लाइसेंस नंबर और ISI मार्क देना अनिवार्य है। यदि बोतल पर ये दोनों चीजें स्पष्ट नहीं हैं, तो उस पानी की शुद्धता पर संदेह किया जा सकता है। आप 'BIS Care' ऐप के जरिए बोतल पर लिखे CM/L नंबर को डालकर यह भी चेक कर सकते हैं कि वह लाइसेंस वैध है या नहीं।
4. पानी की पारदर्शिता और गंध
शुद्ध पानी हमेशा रंगहीन और गंधहीन होना चाहिए। बोतल को रोशनी के सामने रखकर देखें:
अगर पानी में छोटे कण तैरते दिखें या पानी हल्का धुंधला (Cloudy) लगे, तो वह नल का पानी हो सकता है।
खोलने के बाद अगर पानी में क्लोरीन या किसी रसायन जैसी गंध आए, तो वह असुरक्षित हो सकता है।
5. टीडीएस (TDS) लेवल का महत्व
मिनरल वॉटर में टीडीएस का स्तर अधिक होता है (150-700 के बीच), जो इसे एक विशिष्ट स्वाद और भारीपन देता है। वहीं, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर का टीडीएस आमतौर पर 100 से कम रखा जाता है। अगर पानी का स्वाद बिल्कुल 'सपाट' (Flat) है, तो वह शुद्ध किया हुआ साधारण पानी है, न कि प्राकृतिक मिनरल वॉटर। अक्सर दुकानों के बाहर पानी की बोतलें सीधी धूप में रखी होती हैं। प्लास्टिक की बोतलें गर्मी के संपर्क में आने पर हानिकारक रसायन (जैसे माइक्रोप्लास्टिक्स और BPA) पानी में छोड़ सकती हैं। हमेशा ऐसी जगह से पानी खरीदें जहाँ बोतलें ठंडी और छायादार जगह पर रखी हों।
6. एक्सपायरी डेट जरूर देखें
लोग अक्सर सोचते हैं कि पानी खराब नहीं होता, लेकिन पानी की बोतल पर लिखी तारीख उस प्लास्टिक की बोतल की गुणवत्ता के लिए होती है। समय बीतने के साथ प्लास्टिक पानी में घुलने लगता है, जिससे पानी जहरीला हो सकता है। हमेशा मैन्युफैक्चरिंग डेट से 6-12 महीने के भीतर ही पानी का सेवन करें।
7. बोतल को नष्ट करना न भूलें
इस्तेमाल के बाद बोतल को इस तरह कुचलें या उसका ढक्कन उसके भीतर डाल दें कि उसे दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके। यह उन धोखाधड़ी करने वालों को रोकता है जो कचरे से बोतलें उठाकर उनमें दोबारा असुरक्षित पानी भर देते हैं।
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