अमेरिका में विज्ञान जगत में मची खलबली: 11 चोटी के वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौत और गुमशुदगी ने दुनिया को चौंकाया।
संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिक समुदाय में पिछले कुछ महीनों से एक ऐसा डर व्याप्त है जिसने आधुनिक युग की सबसे बड़ी अनसुलझी
- इत्तेफाक के पीछे किसी गहरी साजिश का साया? जैव-प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं के अचानक गायब होने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क।
- अमेरिकी प्रयोगशालाओं से जुड़े विशेषज्ञों की संदिग्ध मौत की जांच हुई तेज: एफबीआई और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां खंगाल रही हैं डेटा चोरी और हत्या के तार।
संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिक समुदाय में पिछले कुछ महीनों से एक ऐसा डर व्याप्त है जिसने आधुनिक युग की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेलियों में से एक को जन्म दे दिया है। एक के बाद एक, कुल 11 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत और कुछ के अचानक गायब होने के मामलों ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। ये सभी वैज्ञानिक अपने-अपने क्षेत्रों में महारत रखते थे, जिनमें से अधिकांश जैव-युद्ध (Bio-warfare), नैनो-टेक्नोलॉजी और उन्नत रक्षा प्रणालियों पर गोपनीय शोध कर रहे थे। शुरुआती तौर पर इन्हें व्यक्तिगत दुर्घटनाएं या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं माना जा रहा था, लेकिन जब मरने वाले वैज्ञानिकों की संख्या दहाई के आंकड़े को पार कर गई, तो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए। अब इस बात की गहन पड़ताल की जा रही है कि क्या इन मौतों के पीछे कोई सामान्य इत्तेफाक है या फिर यह किसी बड़े वैश्विक षड्यंत्र का हिस्सा है। रहस्य की परतें तब और गहरी हो गईं जब इन वैज्ञानिकों की मौत के तरीके और उनके शोध के विषयों के बीच एक अजीब सा संबंध पाया गया। मरने वालों में से तीन वैज्ञानिक वाशिंगटन और कैलिफोर्निया की उन प्रयोगशालाओं में कार्यरत थे, जो भविष्य के महामारियों और उनके काट के रूप में 'जेनेटिक इंजीनियरिंग' पर काम कर रही थीं। इनमें से एक वैज्ञानिक की लाश उनके घर के पास एक सुनसान इलाके में मिली, जबकि दो अन्य अपनी प्रयोगशाला से घर लौटते समय रास्ते से ही गायब हो गए और हफ्तों बाद उनके अवशेष बरामद हुए। स्थानीय पुलिस के पास इन मामलों में कोई ठोस सुराग नहीं है, क्योंकि न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने आया है और न ही किसी प्रकार के संघर्ष के निशान मिले हैं। यह पैटर्न किसी पेशेवर हत्यारे या किसी ऐसी संस्था की ओर इशारा करता है जो इन वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए तथ्यों को दुनिया के सामने आने से रोकना चाहती है।
वैज्ञानिकों की इस संदिग्ध श्रृंखला में सबसे चौंकाने वाला मामला एक ऐसे गणितज्ञ का है जो पेंटागन के लिए उन्नत एनक्रिप्शन एल्गोरिदम विकसित कर रहे थे। उनकी मृत्यु एक सड़क दुर्घटना में दिखाई गई, लेकिन फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी कार के सॉफ्टवेयर को दूर बैठकर हैक किया गया था, जिससे ब्रेक फेल हो गए। इसी तरह, फ्लोरिडा में एक प्रसिद्ध सूक्ष्मजीवविज्ञानी (Microbiologist) अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए, जिनकी मौत का कारण पहले कार्डियक अरेस्ट बताया गया, लेकिन बाद में उनके रक्त के नमूनों में एक अत्यंत दुर्लभ और अज्ञात विष के अंश मिले। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि निशाना बनाए गए लोग कोई साधारण शोधकर्ता नहीं थे, बल्कि वे विज्ञान के उन क्षेत्रों का नेतृत्व कर रहे थे जो भविष्य में वैश्विक सत्ता के समीकरणों को बदल सकते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) ने इन सभी 11 मामलों को एक विशेष 'प्रायोरिटी थ्रेट' की श्रेणी में डाल दिया है। जांच के दायरे में कुछ विदेशी खुफिया एजेंसियां और शक्तिशाली बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनियां भी हैं, जो पेटेंट युद्ध और वैज्ञानिक प्रभुत्व की दौड़ में शामिल हैं। डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन वैज्ञानिकों के गायब होने के साथ-साथ उनके पर्सनल क्लाउड स्टोरेज और प्रयोगशाला के गुप्त सर्वर से भी महत्वपूर्ण डेटा गायब हुआ है, जो इस संदेह को पुख्ता करता है कि यह केवल जान लेने का नहीं, बल्कि बौद्धिक संपदा की चोरी का भी मामला है।
जांच के बढ़ते दबाव के बीच, सुरक्षा अधिकारियों ने उन सभी संस्थानों की सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दी है जहां ये वैज्ञानिक काम करते थे। यह देखा गया है कि गायब होने वाले वैज्ञानिकों में से कुछ ने अपनी मौत से ठीक पहले अपने सहयोगियों को ईमेल के माध्यम से कुछ 'असामान्य' होने का संकेत दिया था। एक वैज्ञानिक ने अपने अंतिम संदेश में लिखा था कि उन्हें महसूस हो रहा है कि उनका पीछा किया जा रहा है और उनका शोध कार्य किसी के लिए खतरा बन गया है। हालांकि, इन संदेशों में किसी विशिष्ट व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं था, जिससे जांचकर्ता अभी भी अंधेरे में तीर चला रहे हैं। वैज्ञानिक समुदाय में इस समय असुरक्षा का ऐसा माहौल है कि कई विशेषज्ञों ने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है और कुछ ने तो संवेदनशील परियोजनाओं से खुद को अलग कर लिया है। विदेशी हस्तक्षेप की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता। वैश्विक राजनीति में जिस तरह से तकनीक और जैविक हथियारों की होड़ मची है, उसमें किसी प्रतिद्वंद्वी राष्ट्र द्वारा चोटी के दिमागों को खत्म करना एक पुरानी लेकिन प्रभावी रणनीति रही है। शीत युद्ध के दौरान भी ऐसी घटनाएं देखी गई थीं, लेकिन वर्तमान मामलों में तकनीक का इस्तेमाल इसे अधिक घातक और पहचानना मुश्किल बना देता है। जासूसी के इस आधुनिक खेल में 'साइलेंट किलिंग' की तकनीकें इतनी उन्नत हो गई हैं कि वे प्राकृतिक मौत का भ्रम पैदा कर देती हैं। जांच एजेंसियां अब उन सभी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और संपर्कों की सूची खंगाल रही हैं जो इन 11 वैज्ञानिकों ने पिछले एक साल में किए थे, ताकि किसी संभावित 'ट्रिगर पॉइंट' को ढूंढा जा सके।
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