उत्तर भारत में 'लू' का भीषण तांडव: यूपी-बिहार में पारा 44 डिग्री के पार, राजस्थान में तपती सड़कों ने बढ़ाई मुश्किलें।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के मध्य में ही उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े
- आईएमडी का 'ऑरेंज अलर्ट': अगले 72 घंटों तक जारी रहेगा गर्मी का सितम, लू के थपेड़ों से जनजीवन अस्त-व्यस्त
- 'आग के गोले' जैसे दहक रहे हैं शहर: लू की चपेट में आने से बीमारियों का खतरा बढ़ा, प्रशासन ने जारी की स्वास्थ्य एडवाइजरी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के मध्य में ही उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से ने भीषण गर्मी की चपेट में आकर 'मई-जून' जैसे हालात का सामना करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में 'कातिल' लू (Heatwave) का प्रकोप अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। राजस्थान के कई जिलों में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिससे ये राज्य 'आग का गोला' बनता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और बिहार के दक्षिणी हिस्सों में भी गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं और पारा अभी और ऊपर चढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में सुबह 10 बजे से ही लू का असर दिखने लगता है। दोपहर होते-होते सड़कें सुनसान हो जाती हैं और गर्म हवाएं शरीर को झुलसाने लगती हैं। बिहार के गया और भागलपुर जिलों में भी भीषण गर्मी का रिकॉर्ड टूट रहा है। आईएमडी के विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने और शुष्क पछुआ हवाओं के हावी होने के कारण मैदानी इलाकों में नमी का स्तर गिरा है, जिससे गर्मी का अहसास और अधिक तीखा हो गया है। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि अब रातें भी उतनी ही बेचैन करने वाली हो गई हैं जितने कि दिन।
राजस्थान में गर्मी का आलम यह है कि वहां के कई शहरों, जैसे चूरू, जैसलमेर और बाड़मेर में सूरज की तपिश असहनीय हो गई है। राज्य के रेतीले इलाकों में चलने वाली गर्म हवाएं 'लू' नहीं बल्कि झुलसाने वाली आग की तरह महसूस हो रही हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के लिए विशेष 'येलो' और 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि आसमान से बरसती आग के कारण जल संकट भी गहराने लगा है और पशु-पक्षियों के लिए भी स्थिति काफी नाजुक हो गई है। राजस्थान के कुछ हिस्सों में दोपहर के वक्त तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस सीजन का अब तक का उच्चतम स्तर है। लू के दौरान 'हीट स्ट्रोक' का खतरा सबसे अधिक होता है। यदि आपको चक्कर आना, तेज सिरदर्द, मतली या शरीर का तापमान अचानक बढ़ना महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। यह लू लगने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और चिकित्सकीय परामर्श लें। भीषण गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लू की चपेट में आने से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और बुखार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं, तब बाहरी गतिविधियों से बचना चाहिए। यदि बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो सिर को सफेद सूती कपड़े या छाते से ढक कर रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और नियमित अंतराल पर ओआरएस (ORS), नींबू पानी, छाछ या लस्सी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करते रहें। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम विशेष रूप से खतरनाक है, इसलिए उनकी देखभाल में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी लू का कहर जारी रहेगा। हालांकि, उत्तर भारत के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में हल्के पश्चिमी विक्षोभ की संभावना जताई गई है, लेकिन मैदानी इलाकों में इसका असर नगण्य रहने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर में भी पारा 42 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिससे काम पर जाने वाले लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। आईएमडी के बुलेटिन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में जहां गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है, वहीं उत्तर और मध्य भारत पूरी तरह से सूखे और गर्म मौसम की चपेट में हैं। यह दोहरे मौसम का मिजाज भारत के भौगोलिक विविधता को भी प्रदर्शित कर रहा है। इस भीषण गर्मी का सीधा असर कृषि और बिजली की मांग पर भी पड़ रहा है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण बिजली की खपत में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कई राज्यों में पावर कट की समस्या भी उभरने लगी है। वहीं, खेतों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए किसानों को अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ रहा है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्रशासन ने टैंकरों के जरिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। स्कूलों के समय में भी बदलाव किया जा रहा है ताकि छोटे बच्चों को दोपहर की झुलसाने वाली गर्मी से बचाया जा सके।
What's Your Reaction?







