चैत्र नवरात्रि 2026 हवन मुहूर्त: महाअष्टमी और महानवमी पर सिद्धि योग का संयोग, जानें पूजा का सटीक समय
हवन की शुरुआत करने से पहले घर की साफ-सफाई और स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना आवश्यक है। हवन कुंड को गंगाजल से शुद्ध कर उस पर स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए। सबसे पहले गणेश जी और पंचदेवों का आह्वान किया जाता है, उसके बाद ही मां दु
- हवन पूजन की संपूर्ण विधि और शुभ मुहूर्त: 26 और 27 मार्च को शक्ति उपासना का महापर्व, नोट करें हर जानकारी
- घर पर हवन के लिए आवश्यक सामग्री की विस्तृत सूची: इन विशेष वस्तुओं के बिना अधूरी मानी जाती है मां दुर्गा की पूजा
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि 2026 में महाअष्टमी का व्रत 26 मार्च, गुरुवार को रखा जा रहा है। इसी दिन मां महागौरी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। जो भक्त अष्टमी तिथि पर हवन करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह का समय अत्यंत शुभ है। पंचांग गणना के अनुसार, 26 मार्च को सुबह 06:18 बजे से 07:50 बजे तक अमृत चौघड़िया का मुहूर्त रहेगा, जो हवन के लिए श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त, जो लोग दोपहर में अनुष्ठान करना चाहते हैं, उनके लिए 10:55 AM से 01:59 PM तक का समय भी अनुकूल है। अष्टमी के दिन किया जाने वाला हवन घर में सुख-शांति और समृद्धि का संचार करता है।
इस वर्ष महानवमी और भगवान श्री राम का जन्मोत्सव यानी राम नवमी 26 और 27 मार्च के संधि काल में मनाया जा रहा है। उदया तिथि के मान से महानवमी का मुख्य पर्व 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ ही नवरात्रि का समापन होता है। महानवमी पर हवन के लिए सबसे शुभ समय सुबह 06:17 बजे से 10:54 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, दोपहर में 12:27 PM से 01:59 PM के बीच भी हवन किया जा सकता है। विशेष रूप से राम नवमी के अवसर पर मध्याह्न काल (दोपहर 12 बजे के आसपास) में किया गया हवन और पूजन विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि इसी समय भगवान राम का प्राकट्य हुआ था।
हवन के सफल संपादन के लिए पूजन सामग्री का पूर्ण होना अनिवार्य है। मुख्य हवन सामग्री में आम की सूखी लकड़ियां, कलावा, शुद्ध देसी घी (गाय का), हवन कुंड, और हवन सामग्री का मिश्रण (जिसमें काले तिल, जौ, चावल, गुग्गल, लोबान और शक्कर मिली हो) शामिल हैं। इसके अलावा कपूर, लौंग का जोड़ा, इलायची, बताशे, सूखा नारियल (गोला), और पंचमेवा भी आवश्यक है। मां दुर्गा को अर्पित करने के लिए लाल चुनरी, नारियल, शहद और गंगाजल का प्रबंध भी पहले से कर लेना चाहिए। हवन के दौरान आहुति देने के लिए 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा' मंत्र का जप करना सबसे प्रभावशाली माना गया है। चैत्र नवरात्रि में 'संधि पूजा' का एक विशेष महत्व है। यह पूजा तब की जाती है जब अष्टमी तिथि समाप्त हो रही होती है और नवमी तिथि का आगमन होता है। 2026 में संधि पूजा का विशेष समय 26 मार्च को सुबह 11:24 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक रहेगा। यह 48 मिनट की अवधि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है, जिसमें देवी चामुंडा ने असुरों का संहार किया था।
हवन की शुरुआत करने से पहले घर की साफ-सफाई और स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना आवश्यक है। हवन कुंड को गंगाजल से शुद्ध कर उस पर स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए। सबसे पहले गणेश जी और पंचदेवों का आह्वान किया जाता है, उसके बाद ही मां दुर्गा के नाम की आहुतियां दी जाती हैं। हवन के अंत में सूखे नारियल के गोले में घी भरकर और उसे लाल कपड़े या कलावा से लपेटकर 'पूर्णाहुति' दी जाती है। मान्यता है कि बिना पूर्णाहुति के हवन संपन्न नहीं माना जाता। हवन के बाद कपूर से मां की आरती करनी चाहिए और अग्नि को प्रणाम कर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।
हवन के पश्चात कन्या पूजन का विधान है, जिसे 'कंजिका पूजन' भी कहा जाता है। 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उन्हें घर आमंत्रित किया जाता है। उनके पैर धोकर, उन्हें तिलक लगाकर और भोजन (हलवा, पूरी, चना) कराकर आशीर्वाद लिया जाता है। 2026 में जो भक्त अष्टमी पर कन्या पूजन करना चाहते हैं, वे 26 मार्च को सुबह के मुहूर्त में यह कार्य कर सकते हैं। वहीं, नवमी पर कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु 27 मार्च को सुबह के शुभ समय में अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं। कन्याओं को उपहार और दक्षिणा देकर विदा करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्त की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से चैत्र नवरात्रि का समापन 'पारण' के साथ होता है। जो लोग नौ दिनों का उपवास रखते हैं, वे 27 मार्च 2026 को सुबह 10:06 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं, क्योंकि इस समय नवमी तिथि समाप्त होगी और दशमी का आरंभ होगा। हवन से निकलने वाला धुआं न केवल आध्यात्मिक शुद्धि करता है, बल्कि वातावरण को भी शुद्ध और जीवाणु मुक्त बनाता है। यह पर्व हमें नकारात्मकता का त्याग कर सकारात्मकता और शक्ति के संचय की प्रेरणा देता है। तिथियों और मुहूर्तों के सही पालन से साधक को मानसिक शांति और दैवीय कृपा की प्राप्ति होती है।
What's Your Reaction?







