फरीदाबाद में फूटा मजदूरों का गुस्सा: सेक्टर-37 और सराय ख्वाजा में सड़क जाम, वेतन वृद्धि की मांग पर अड़े कामगार
सड़क जाम की सूचना मिलते ही फरीदाबाद पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। सराय ख्वाजा और सेक्टर-37 के संगम स्थल पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को समझाने की
- औद्योगिक शांति की जगह अब सड़कों पर संग्राम: नोएडा और मानेसर के बाद फरीदाबाद भी श्रमिक आंदोलन की चपेट में
- महंगाई के बोझ तले दबे श्रमिकों का सड़कों पर उतरना सरकार और प्रशासन के लिए बनी बड़ी चुनौती, जाम से यातायात ठप
दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर फरीदाबाद में पिछले कुछ दिनों से पनप रहा श्रमिकों का असंतोष अब सड़कों पर एक बड़े आंदोलन के रूप में तब्दील हो गया है। सोमवार की सुबह फरीदाबाद के सेक्टर-37 और सराय ख्वाजा इलाके में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के सैकड़ों वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। श्रमिकों ने मुख्य मार्गों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे दिल्ली-मथुरा नेशनल हाईवे और आसपास की लिंक सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यह प्रदर्शन उस समय शुरू हुआ जब मानेसर और नोएडा में जारी श्रमिक अशांति की खबरें फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में फैलीं। कामगारों का कहना है कि वे लंबे समय से न्यूनतम वेतन में सम्मानजनक बढ़ोतरी और काम के घंटों में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन और प्रशासन उनकी मांगों को अनसुना कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी श्रमिकों का मुख्य विरोध वेतन विसंगतियों और आसमान छूती महंगाई को लेकर है। सराय ख्वाजा के पास जमा हुए श्रमिकों ने आरोप लगाया कि जिस दर से खाने-पीने की वस्तुओं और रहने के खर्च में बढ़ोतरी हुई है, उस अनुपात में उनका वेतन कई वर्षों से स्थिर बना हुआ है। फरीदाबाद के इन औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गारमेंट एक्सपोर्ट हाउस और ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाली इकाइयां स्थित हैं, जहाँ काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि उन्हें मिलने वाला मौजूदा वेतन परिवार के गुजारे के लिए नाकाफी है। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि हरियाणा में घोषित न्यूनतम वेतन की नई दरों को तत्काल प्रभाव से सभी निजी कंपनियों में कड़ाई से लागू किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो वे अपना काम पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
औद्योगिक क्षेत्रों में फैली इस अशांति की जड़ें काफी गहरी हैं, जहाँ श्रमिकों के बीच यह संदेश फैल गया है कि पड़ोसी राज्यों और शहरों में वेतन में भारी वृद्धि की गई है। सराय ख्वाजा और सेक्टर-37 के श्रमिक इस बात से खासे नाराज हैं कि एक ही जैसी मेहनत और कौशल के बावजूद उन्हें मिलने वाली राशि अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि कुशल और अकुशल दोनों श्रेणियों के मजदूरों के वेतन में कम से कम 35 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। इसके अलावा, काम के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ओवरटाइम के भुगतान में की जा रही कटौती ने भी श्रमिकों के गुस्से में घी डालने का काम किया है। श्रमिकों का तर्क है कि वे औद्योगिक उत्पादन का मुख्य आधार हैं, लेकिन उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी कर उन्हें आर्थिक संकट में धकेला जा रहा है।
समन्वय की कमी और प्रशासनिक विफलता
फरीदाबाद के औद्योगिक गलियारों में उपजा यह विवाद प्रशासन की समय पर कार्रवाई न करने का भी परिणाम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जब मानेसर और नोएडा में आंदोलन की आहट शुरू हुई थी, तभी फरीदाबाद प्रशासन को स्थानीय श्रमिक संघों और उद्योग मालिकों के बीच वार्ता का दौर शुरू करना चाहिए था। संवादहीनता के कारण अब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है, जिससे करोड़ों रुपये के उत्पादन का नुकसान होने की आशंका है।
सड़क जाम की सूचना मिलते ही फरीदाबाद पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। सराय ख्वाजा और सेक्टर-37 के संगम स्थल पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन श्रमिक अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक हटने को तैयार नहीं थे। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों की आलोचना की। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वे उनकी मांगों को श्रम विभाग और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे, लेकिन श्रमिकों का कहना है कि पूर्व में मिले मौखिक आश्वासन अब तक धरातल पर नहीं उतरे हैं। पुलिस की तैनाती को देखते हुए इलाके में तनाव व्याप्त है, हालांकि किसी बड़ी हिंसा की सूचना फिलहाल नहीं मिली है।
फरीदाबाद की इस घटना का असर केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के पूरे औद्योगिक तंत्र पर पड़ रहा है। नोएडा और मानेसर के बाद फरीदाबाद में श्रमिकों का सड़कों पर आना एक बड़े क्षेत्रीय श्रमिक आंदोलन की ओर इशारा करता है। सराय ख्वाजा जैसे घनी आबादी वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में सड़क जाम होने से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने यातायात को डाइवर्ट करने के लिए अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को लगाया है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर की सड़कें अभी भी प्रदर्शनकारियों के कब्जे में हैं। उद्योग संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि यदि विरोध लंबा खिंचता है, तो निर्यात और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित हो जाएगी, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। श्रमिकों के इस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। गारमेंट सेक्टर की महिला कर्मियों ने सामूहिक रूप से काम छोड़कर प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिससे कई छोटी-बड़ी इकाइयों में काम ठप हो गया। उनका कहना है कि रसोई गैस और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना अब उनके वश से बाहर होता जा रहा है। सराय ख्वाजा इलाके के स्थानीय निवासियों ने भी कहीं न कहीं श्रमिकों की समस्याओं के प्रति सहानुभूति दिखाई है, क्योंकि महंगाई एक साझा समस्या बनकर उभरी है। हालांकि, सड़क जाम से होने वाली असुविधा ने आम जनता के सब्र का इम्तिहान भी लिया है। प्रशासन ने देर शाम तक एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है जिसमें श्रम आयुक्त और औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।
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