सुरों की मल्लिका का महाप्रयाण: पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोसले, शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बेहद भावुक क्षणों से भरी रही, जहाँ परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पूरा देश शोक में डूबा नजर आया। शिवाजी पार्क में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, क्योंकि वहां न केवल सिनेमा जगत के दिग्गज बल्कि राजनीति के ब
- संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत: नम आंखों से विदा हुईं सबकी चहेती 'ताई', अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
- विरासत छोड़ गईं आशा भोसले: पोती जनाई ने दी मुखाग्नि, अंतिम विदाई में एक साथ नजर आए दिग्गज राजनेता और फिल्मी हस्तियां
भारतीय संगीत जगत की अनमोल रत्न और सात दशकों से अधिक समय तक अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। मुंबई के दादर स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क श्मशान घाट में सोमवार को उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जहाँ वे अनंत यात्रा पर निकल गईं। संगीत की दुनिया में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। उनकी अंतिम यात्रा उनके आवास 'प्रभु कुंज' से शुरू हुई, जहाँ सुबह से ही प्रशंसकों और करीबियों का तांता लगा रहा। फूलों से सजे वाहन में जब उनकी पार्थिव देह को अंतिम सफर पर ले जाया गया, तो पूरी मुंबई की सड़कें 'आशा ताई अमर रहें' के नारों से गूंज उठीं। राजकीय सम्मान के साथ दी गई इस विदाई ने यह सिद्ध कर दिया कि वे केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर थीं।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बेहद भावुक क्षणों से भरी रही, जहाँ परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पूरा देश शोक में डूबा नजर आया। शिवाजी पार्क में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, क्योंकि वहां न केवल सिनेमा जगत के दिग्गज बल्कि राजनीति के बड़े चेहरे भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। जैसे ही उनकी देह को चिता पर रखा गया, माहौल में भारी सन्नाटा पसर गया। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और तिरंगे में लिपटी उनकी देह ने देश के प्रति उनके योगदान की गवाही दी। अपनी चंचल आवाज और बहुमुखी गायन शैली के लिए जानी जाने वाली आशा ताई के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ उनकी व्यापक लोकप्रियता का प्रमाण थी, जिसने भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर लोगों को जोड़ा था।
आशा भोसले की पोती जनाई भोसले इस पूरे दुखद समय के दौरान सबसे अधिक भावुक दिखाई दीं। अपनी दादी के बेहद करीब रहने वाली जनाई ने भारी मन से अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। चिता को मुखाग्नि देते समय उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जनाई न केवल उनकी पोती हैं बल्कि वे आशा जी के संगीत की विरासत को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। दादी और पोती के बीच के इस अटूट बंधन ने अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों को भावविभ्वल कर दिया। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी एक-दूसरे को ढांढस बंधाया, लेकिन आशा ताई के व्यक्तित्व का जो प्रभाव उनके परिवार पर था, उसकी कमी वहां स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही थी।
सुरों के सफर का अनंत विश्राम
आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था। 1943 में शुरू हुआ उनका यह संगीतमय सफर 2026 में आकर थम गया, लेकिन उनके गीत आने वाली कई पीढ़ियों के कानों में रस घोलते रहेंगे।
सिनेमा जगत से जुड़े अनगिनत सितारे अपने प्रिय 'ताई' को विदाई देने पहुंचे थे। बॉलीवुड के बड़े नामों से लेकर दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के कलाकारों तक, सभी ने उन्हें अपनी अंतिम श्रद्धांजलि दी। कई अभिनेताओं ने उनके गाए गीतों को याद करते हुए उन्हें एक ऐसी संस्था बताया जिससे हर गायक को सीखने की प्रेरणा मिलती है। फिल्मी हस्तियों के अलावा, पार्श्व गायकों और संगीतकारों का जमावड़ा यह बताने के लिए काफी था कि संगीत उद्योग में उनका कद कितना ऊंचा था। उन्होंने अपनी लंबी पारी में कई पीढ़ियों के संगीतकारों के साथ काम किया था, इसलिए वहां मौजूद हर पीढ़ी के कलाकार के पास उनसे जुड़ी कोई न कोई व्यक्तिगत स्मृति थी।
राजनीतिक जगत के दिग्गजों ने भी दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक, सभी ने शिवाजी पार्क पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किए। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आशा जी की आवाज भारत की सॉफ्ट पावर थी, जिसने वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ाया। उनके जाने से न केवल महाराष्ट्र ने अपनी एक गौरवशाली बेटी खोई है, बल्कि देश ने एक ऐसी आवाज खो दी है जो हर उत्सव और हर गम में भारतीयों का सहारा बनती थी। प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि राजकीय सम्मान के दौरान प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो और इस महान विभूति को वह सम्मान मिले जिसकी वे हकदार थीं। शिवाजी पार्क का वह श्मशान घाट, जहां इससे पहले स्वर कोकिला लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था, आज एक बार फिर इतिहास का गवाह बना। दोनों बहनों ने भारतीय संगीत को जो ऊंचाइयां दीं, वे अतुलनीय हैं। वहां मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा आम थी कि अब मंगेशकर परिवार की उस जादुई जोड़ी का भौतिक अस्तित्व समाप्त हो गया है, लेकिन उनके स्वर हमेशा अमर रहेंगे। श्मशान घाट के आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने अपनी दुकानें स्वतः स्फूर्त तरीके से बंद रखीं और हजारों लोग छतों और बालकनियों से अपनी प्रिय गायिका की अंतिम झलक पाने के लिए खड़े रहे। यह दृश्य किसी महान लोकनायक की विदाई जैसा प्रतीत हो रहा था।
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