लखनऊ के विकास नगर में भीषण अग्निकांड: 280 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख, मासूमों की मौत से पसरा मातम।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर सेक्टर-11 और 14 के निकट स्थित स्लम बस्ती में बुधवार शाम को लगी भीषण आग ने
- राजधानी में आग का तांडव: 50 से ज्यादा सिलेंडर धमाकों से दहला इलाका, हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
- उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा एक्शन: विकास नगर हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश, प्रभावितों के लिए राहत शिविर स्थापित
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर सेक्टर-11 और 14 के निकट स्थित स्लम बस्ती में बुधवार शाम को लगी भीषण आग ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया, जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा। इस विनाशकारी घटना में लगभग 280 से अधिक झोपड़ियां पूरी तरह से जलकर खाक हो गई हैं, जिससे 1,000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि आसमान में कई किलोमीटर दूर से काले धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता था। शुरुआती जानकारी में किसी के हताहत न होने की बात कही गई थी, लेकिन गुरुवार सुबह मलबे की तलाशी के दौरान दो मासूम बच्चियों के शव बरामद होने से पूरा इलाका गमगीन हो गया है। मृतकों की पहचान दो वर्षीय श्रुति और उसकी महज दो माह की छोटी बहन के रूप में हुई है। यह दर्दनाक मंजर तब सामने आया जब बचाव दल ने आग बुझने के बाद कूलिंग ऑपरेशन और सर्च अभियान तेज किया। हादसे की तीव्रता का मुख्य कारण झोपड़ियों के भीतर रखे छोटे और बड़े रसोई गैस सिलेंडरों का लगातार फटना बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर एक के बाद एक लगभग 50 से अधिक सिलेंडरों में विस्फोट हुआ, जिससे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इन धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की रिहायशी सोसायटियों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में रहने वाले लोग दहशत में आ गए। सिलेंडरों के फटने से आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठीं, जिसकी चपेट में आकर पास के दो बहुमंजिला पक्के मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। दमकल कर्मियों के लिए भी इन धमाकों के बीच आग बुझाना एक बड़ी चुनौती बन गया था, क्योंकि हर थोड़े अंतराल पर होने वाले विस्फोट उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर रहे थे।
आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया। लखनऊ के विभिन्न फायर स्टेशनों से लगभग 20 दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्यों की निगरानी की। अग्निशमन दल को आग पर पूरी तरह काबू पाने में लगभग तीन घंटे से अधिक का समय लगा। इस दौरान रिंग रोड और आसपास के इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कई रूट डायवर्ट करने पड़े। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया ताकि मलबे में दबे संभावित लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके। प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य आग को पास के ऑटोमोबाइल शोरूम और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में फैलने से रोकना था। इस अग्निकांड में न केवल इंसानी जिंदगियां और संपत्ति का नुकसान हुआ है, बल्कि बेजुबान जानवरों पर भी कहर टूटा है। बताया जा रहा है कि बस्ती में रखे गए लगभग 50 से अधिक मवेशी, जिनमें गाय और भैंस शामिल थे, इस आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रशासन को पीड़ितों की हर संभव मदद करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे मौके पर रहकर राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करें। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन ने बेघर हुए परिवारों के लिए अस्थायी रैन बसेरों और शेल्टर होम का इंतजाम किया है, जहां उनके लिए भोजन, स्वच्छ पानी और कपड़ों की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही, जिला प्रशासन को नुकसान का सटीक आकलन करने और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। शासन ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी किया है।
इस अग्निकांड ने सैकड़ों परिवारों की जीवन भर की जमा पूंजी को एक ही झटके में राख कर दिया। प्रभावित लोगों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर, ई-रिक्शा चालक और कूड़ा बीनने वाले प्रवासी श्रमिक हैं, जो सीतापुर, बाराबंकी और असम जैसे क्षेत्रों से आकर यहां जीवन यापन कर रहे थे। पीड़ितों का कहना है कि वे अपने घरों से कुछ भी कीमती सामान नहीं निकाल पाए; उनके बच्चों के कपड़े, राशन और नकदी सब कुछ जल गया। कई महिलाएं अपने परिजनों को ढूंढती हुई बदहवास नजर आईं। प्रशासन ने खोए हुए लोगों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए एक विशेष डेस्क भी स्थापित की है। इस त्रासदी ने शहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से बसी झुग्गी-झोपड़ियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, जो बाद में रसोई गैस सिलेंडर के संपर्क में आने से तेजी से फैल गई। हालांकि, फोरेंसिक विभाग की टीम घटनास्थल से नमूने एकत्र कर रही है ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिस जमीन पर यह बस्ती बसी हुई थी, वह आवास विकास परिषद की है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन अब ऐसी बस्तियों में बिजली के अवैध कनेक्शनों और गैस सिलेंडरों के असुरक्षित भंडारण के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे।
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