Jagdeep Dhankhar का इस्तीफा- स्वास्थ्य कारण या सियासी विवाद? अप्रैल के फैसले ने बढ़ाया संकट।
Political News: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति Jagdeep Dhankhar ने 21 जुलाई 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को...
Political News: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति Jagdeep Dhankhar ने 21 जुलाई 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। लेकिन इस इस्तीफे ने सियासी गलियारों में तूफान मचा दिया है। विपक्ष और कई जानकारों का मानना है कि इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य से ज्यादा गहरे सियासी कारण हैं। खास तौर पर अप्रैल 2025 में लिया गया उनका एक फैसला चर्चा में है, जिसने सरकार के सामने संकट खड़ा कर दिया था।
Jagdeep Dhankhar ने 21 जुलाई 2025 को देर शाम अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा, “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।” उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सांसदों का उनके समर्थन के लिए आभार जताया। धनखड़ ने मार्च 2025 में दिल्ली के एम्स में एंजियोप्लास्टी करवाई थी और उनके परिवार ने बताया कि उन्हें कम रक्तचाप और चक्कर आने की समस्या थी। उनके साले और वकील प्रवीण बलवाड़ा ने कहा कि धनखड़ स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहे और यह इस्तीफा उनकी सेहत के कारण हो सकता है।
हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इस कारण पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि धनखड़ दिनभर संसद में सक्रिय थे और शाम 7:30 बजे तक उनसे फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं बताई थी।
सूत्रों के अनुसार, धनखड़ का इस्तीफा अप्रैल 2025 में लिए गए एक फैसले से जुड़ा है, जिसने सरकार को मुश्किल में डाल दिया। धनखड़ ने संसद टीवी के सचिव और प्रभारी के रूप में एक जूनियर अधिकारी को नियुक्त करने की कोशिश की थी। यह पद नियुक्ति समिति (एसीसी) के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिसमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री शामिल होते हैं। धनखड़ का यह कदम नियमों के खिलाफ था, क्योंकि उपराष्ट्रपति या राज्यसभा को ऐसी नियुक्तियाँ करने का अधिकार नहीं है।
सूत्रों ने इसे “तख्तापलट जैसी स्थिति” बताया। उस समय प्रधानमंत्री विदेश दौरे पर थे, और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस नियुक्ति को रोकने के लिए कई फोन कॉल किए। अधिकारी को शामिल न होने और अवकाश पर जाने की सलाह दी गई। इस घटना ने सरकार और धनखड़ के बीच तनाव बढ़ा दिया। कुछ लोगों का मानना है कि यह विवाद उनके इस्तीफे का एक प्रमुख कारण हो सकता है।
धनखड़ का इस्तीफा संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन हुआ, जब उन्होंने एक और विवादास्पद कदम उठाया। विपक्ष के 63 सांसदों ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दिया, क्योंकि उनके घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। धनखड़ ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और कहा कि अगर दोनों सदनों में ऐसा प्रस्ताव आए, तो एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी।
लेकिन सरकार चाहती थी कि यह प्रस्ताव लोकसभा में पहले पेश हो और यह दोनों दलों का साझा प्रयास हो। धनखड़ ने बिना सरकार से सलाह लिए यह कदम उठाया, जिससे सरकार नाराज हो गई। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी थी। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि धनखड़ को 21 जुलाई की रात 9 बजे तक इस्तीफा देने की धमकी दी गई थी, वरना उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता।
धनखड़ अगस्त 2022 से उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति थे। उनके कार्यकाल में विपक्ष के साथ कई बार तनाव हुआ। दिसंबर 2024 में, विपक्ष ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी, जो स्वतंत्र भारत में पहली ऐसी घटना थी। यह प्रस्ताव उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने खारिज कर दिया था।
धनखड़ ने कई बार न्यायपालिका पर टिप्पणी की, खासकर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की। उन्होंने संसद की सर्वोच्चता और न्यायिक जवाबदेही की वकालत की। विपक्ष ने उन पर पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों को नियमों का पालन करने की सलाह दी।
धनखड़ के इस्तीफे ने सियासी हलचल मचा दी। कांग्रेस ने इसे “अप्रत्याशित और रहस्यमय” बताया और कहा कि इसके पीछे गहरे कारण हैं। जयराम रमेश ने कहा कि धनखड़ ने विपक्ष को समायोजित करने की कोशिश की और नियमों का पालन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से धनखड़ को मनाने की अपील की।
शिव सेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि धनखड़ का व्यवहार पक्षपातपूर्ण था, और सरकार को उनके इस्तीफे की वजह बतानी चाहिए। आरजेडी ने दावा किया कि यह इस्तीफा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाने की साजिश हो सकती है। हालांकि, बीजेपी ने इन दावों को खारिज किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “Jagdeep Dhankhar ने देश की सेवा की। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।” लेकिन बीजेपी नेताओं की चुप्पी और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान न आने से सवाल बढ़ गए।
अप्रैल का विवाद धनखड़ और सरकार के बीच पहले से चले आ रहे तनाव का एक हिस्सा था। सूत्रों के अनुसार, धनखड़ को लगता था कि सरकार ने दिसंबर 2024 में उनके खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनका पर्याप्त समर्थन नहीं किया। इसके अलावा, उनकी न्यायपालिका पर टिप्पणियाँ सरकार के लिए असहज थीं, क्योंकि यह सरकार की राय के रूप में देखा गया।
अप्रैल में संसद टीवी की नियुक्ति का मामला सरकार के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया। यह कदम न केवल नियमों के खिलाफ था, बल्कि इसने सरकार के सामने कानूनी और प्रशासनिक संकट पैदा कर दिया। सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद धनखड़ और सरकार के बीच विश्वास कम हो गया था।
Jagdeep Dhankhar का इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा सियासी और प्रशासनिक विवादों से जुड़ा प्रतीत होता है। अप्रैल 2025 में संसद टीवी की नियुक्ति का उनका फैसला और जस्टिस वर्मा के महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करना सरकार के लिए असहज था। विपक्ष का मानना है कि सरकार ने धनखड़ पर दबाव बनाया, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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