बिहार में जंगलराज का हवाला देकर आजम खान ने चुनाव प्रचार से बनाई दूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य का दिया कारण, मुस्लिम वोटरों से की एकजुट होने की अपील।
समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया है। मुरादाबाद में एक
समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया है। मुरादाबाद में एक निजी कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिहार में जंगलराज है और वहां अकेले जाना खतरे से खाली नहीं। उनके पास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है इसलिए वे बिहार नहीं जा पाएंगे। आजम खान ने अफसोस जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से वे प्रचार नहीं कर सकेंगे लेकिन बिहार के मतदाताओं से अपील की कि लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होकर वोट करें।
यह बयान 2 नवंबर 2025 को मुरादाबाद के कुंडरकी इलाके में दिया गया। आजम खान एक निजी आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे। वहां मीडिया ने उनसे पूछा कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारक बनाया है लेकिन वे अभी तक बिहार क्यों नहीं गए। जवाब में आजम खान ने कहा कि वहां जाने के लिए मेरे पास सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। जो सुरक्षा दी गई थी वह वाई श्रेणी की थी। मैंने लिखकर पूछा था कि क्यों दी गई है। अगर देनी है तो पूरी दें। पुरानी बात है लेकिन अब बिहार में जंगलराज है। जंगल में अकेले जाना खतरे से खाली नहीं।
आजम खान ने आगे कहा कि लोग कहते हैं वहां जंगलराज है इसलिए मैं नहीं जा पा रहा हूं। मुझे अफसोस है लेकिन उम्मीद करता हूं कि बिहार का जंगलराज जल्द खत्म होगा। उन्होंने मीडिया के माध्यम से बिहार के लोगों से अपील की कि कमजोरों और अल्पसंख्यकों का वोट बंटना नहीं चाहिए। अगर हमारे जिस्म को तकसीम करना चाहते हो जो कभी जुड़ न सके तो तुम भी तकसीम हो जाना। मतदाता किसी के बहकावे में न आएं। जज्बाती नारों या धोखे में न पड़ें। लोकतंत्र और इंसानियत को बचाने के लिए एकजुट होकर वोट करें।
समाजवादी पार्टी ने 24 अक्टूबर 2025 को बिहार चुनाव के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी। इसमें अखिलेश यादव के बाद दूसरे नंबर पर किरणमय नंदा और तीसरे नंबर पर आजम खान का नाम था। डिंपल यादव चौथे नंबर पर थीं। पार्टी ने आजम खान को बिहार में महागठबंधन के लिए प्रचार की जिम्मेदारी दी थी। खासकर मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में उनकी सभाएं तय की गई थीं। लेकिन जेल से रिहा होने के बाद उनकी सेहत ठीक नहीं चल रही है। इसके अलावा सुरक्षा चिंताएं भी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी है लेकिन आजम खान का कहना है कि यह अपर्याप्त है।
आजम खान का यह बयान बिहार चुनाव में नया विवाद पैदा कर गया है। नीतीश कुमार की सरकार पर जंगलराज का आरोप लगाकर उन्होंने एनडीए को निशाना बनाया। बीजेपी ने पलटवार किया कि लालू राज के समय का असली जंगलराज था। अब बिहार सुरक्षित और विकसित राज्य है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि आजम खान को अपने समय का जंगलराज याद आता होगा जब अपराध चरम पर था। अब बिहार में कानून का राज है। कोई डरने की जरूरत नहीं।
महागठबंधन में भी इस बयान से हलचल मच गई। राजद नेता कहते हैं कि आजम खान ने सही कहा। बिहार में अभी भी कई इलाकों में अपराध बढ़ा है। लेकिन कुछ नेताओं का मानना है कि ऐसे बयान से एनडीए को मुद्दा मिल जाता है। तेजस्वी यादव ने आजम खान से फोन पर बात की और उनकी सेहत की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आजम खान हमारे बड़े नेता हैं। उनकी सलाह हमेशा काम आती है। मीडिया से ही वे बिहार के लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
आजम खान लंबे समय बाद राजनीतिक मंच पर सक्रिय हुए हैं। 2024 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए। उनपर 89 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे। अब अधिकतर में वे बरी हो चुके हैं। समाजवादी पार्टी में उनकी वापसी से मुस्लिम वोटरों में उत्साह है। उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दे रहे हैं। बिहार में प्रचार न करने का फैसला उनकी सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया।
बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को हो चुका है। अब दूसरे और तीसरे चरण बाकी हैं। सीमांचल की कई सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक हैं। वहां कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार हैं। समाजवादी पार्टी ने खुद उम्मीदवार नहीं उतारे लेकिन महागठबंधन को समर्थन दिया है। आजम खान की अपील से मुस्लिम मतदाताओं में एकता का संदेश गया है। वे नहीं चाहते कि वोट बंटे और एनडीए को फायदा हो।
आजम खान ने बिहार के लोगों से कहा कि देश में डर का माहौल है। अन्याय बढ़ रहा है। बिहार ने हमेशा देश को नई राह दिखाई है। उम्मीद है इस बार भी लोकतंत्र की रक्षा करेगा। कम से कम डर कुछ कम होगा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से कहा कि सोच समझकर वोट करें। अगली पीढ़ी को बदले की भावना न सौंपें। एकता बनाए रखें।
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग दो हिस्सों में बंट गए। कुछ ने आजम खान की हिम्मत की तारीफ की तो कुछ ने कहा कि वे बिहार की वर्तमान सरकार पर अनावश्यक आरोप लगा रहे हैं। नीतीश कुमार ने 2005 से जंगलराज खत्म करने का दावा किया था। अब अपराध दर कम हुई है। महिलाएं सुरक्षित हैं। विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं।
आजम खान का बिहार न जाना महागठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है। उनकी सभाओं से मुस्लिम वोटरों में जोश आता। लेकिन अब अखिलेश यादव और डिंपल यादव ज्यादा रैलियां करेंगे। तीसरे चरण में सीमांचल में प्रचार तेज होगा। आजम खान घर बैठे ही अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
बिहार चुनाव में जंगलराज एक पुराना मुद्दा है। लालू प्रसाद के समय को जंगलराज कहा जाता था। अब एनडीए इसे बार बार याद दिलाता है। आजम खान ने उलटा नीतीश सरकार पर आरोप लगाकर नया मोड़ दे दिया। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि इससे ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। मुस्लिम वोट एकजुट हो सकते हैं।
आजम खान की सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल उठ रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर सुरक्षा दी है तो पूरी दें। वाई श्रेणी पर्याप्त नहीं। केंद्र सरकार से भी जेड श्रेणी की मांग की जा रही है। उनकी जान को खतरा बताया जाता है।
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