भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जल्द, शिवराज, खट्टर, यादव और प्रधान रेस में, किसे मिलेगी कुर्सी?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति की ओर तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि 26 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति का काम ...
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति की ओर तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि 26 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति का काम पूरा हो चुका है। यह प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले अनिवार्य है। मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए इसे बढ़ा दिया गया था। अब, जब संगठनात्मक चुनावों का अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है, पार्टी जुलाई 2025 में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा करने की तैयारी में है। इस पद के लिए शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, और धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। अध्यक्ष का चयन संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, और जातीय समीकरण जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तब तक नहीं हो सकता, जब तक कम से कम 50% राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे न हो जाएं। जनवरी 2025 तक, पार्टी ने 26 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी कर ली है, जिससे राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। पार्टी ने इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए एक केंद्रीय चुनाव समिति गठित की है, जिसमें भूपेंद्र यादव (गुजरात), शिवराज सिंह चौहान (कर्नाटक), मनोहर लाल खट्टर (बिहार), और धर्मेंद्र प्रधान (मध्यप्रदेश) जैसे वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न राज्यों में चुनाव प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों के अनुसार, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जुलाई 2025 के अंत तक या संसद के मॉनसून सत्र (21 जुलाई से 12 अगस्त) से पहले हो सकती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), जो भाजपा का वैचारिक मार्गदर्शक है, की सहमति इस चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- प्रमुख दावेदार
नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनमें शामिल हैं:
धर्मेंद्र प्रधान: केंद्रीय शिक्षा मंत्री और ओडिशा से ओबीसी नेता, धर्मेंद्र प्रधान इस रेस में सबसे मजबूत दावेदारों में से एक हैं। उनकी संगठनात्मक कुशलता, खासकर 2024 में ओडिशा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत में उनकी भूमिका, उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश (2022) और हरियाणा में भी चुनाव प्रभारी के रूप में सफलता हासिल की। प्रधान की ओबीसी पृष्ठभूमि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी निकटता उनकी उम्मीदवारी को और मजबूत करती है।
शिवराज सिंह चौहान: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री, शिवराज सिंह चौहान एक लोकप्रिय जननेता हैं, जिन्हें “मामा” के नाम से जाना जाता है। 18 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहने का उनका अनुभव और RSS के साथ गहरे संबंध उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। हालांकि, कुछ सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व उनकी उम्मीदवारी को लेकर उत्साह में नहीं है, क्योंकि वे दोनों, सरकार और पार्टी, में ओबीसी चेहरों का प्रतिनिधित्व नहीं चाहते।
मनोहर लाल खट्टर: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री, मनोहर लाल खट्टर भी इस रेस में हैं। उनकी सादगी, RSS प्रचारक के रूप में पृष्ठभूमि, और मोदी के साथ निकटता उनकी ताकत है। हालांकि, उनकी उम्र (71 वर्ष) उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ एक कारक हो सकती है, क्योंकि पार्टी 50-70 वर्ष की आयु सीमा को प्राथमिकता दे रही है।
भूपेंद्र यादव: केंद्रीय पर्यावरण और श्रम मंत्री, भूपेंद्र यादव को उनकी रणनीतिक कुशलता और RSS के साथ गहरे संबंधों के लिए जाना जाता है। उन्होंने बिहार, महाराष्ट्र, और अन्य राज्यों में चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी ओबीसी पृष्ठभूमि और कम प्रोफाइल लेकिन प्रभावशाली कार्यशैली उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।
अन्य नामों में विनोद तावड़े, सुनील बंसल, और दक्षिण भारत से वनथी श्रीनिवासन और डी. पुरंदेश्वरी भी चर्चा में हैं। कुछ सूत्रों ने केशव प्रसाद मौर्य और निर्मला सीतारमण जैसे नामों का भी जिक्र किया है, जो एक आश्चर्यजनक विकल्प हो सकते हैं।
- चयन के कारक
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन कई कारकों पर निर्भर करेगा:
संगठनात्मक अनुभव: सभी प्रमुख दावेदारों—प्रधान, चौहान, खट्टर, और यादव—के पास संगठनात्मक अनुभव है। प्रधान और यादव ने कई राज्यों में चुनाव प्रभारी के रूप में काम किया है, जबकि चौहान और खट्टर की प्रशासनिक अनुभव और जन-आकर्षण उनकी ताकत है।
क्षेत्रीय संतुलन: पार्टी दक्षिण भारत में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है, खासकर तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस कारण दक्षिण भारत से किसी नेता की संभावना भी जताई जा रही है।
जातीय समीकरण: विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, द्वारा जातिगत जनगणना और ओबीसी राजनीति पर जोर देने के जवाब में भाजपा एक ओबीसी नेता को चुन सकती है। प्रधान और यादव इस श्रेणी में फिट बैठते हैं, जबकि चौहान भी ओबीसी समुदाय से हैं।
RSS की सहमति: RSS की मंजूरी इस चयन में महत्वपूर्ण होगी। सूत्रों के अनुसार, RSS ने कुछ नए नामों का सुझाव दिया है, जिससे चयन प्रक्रिया में बदलाव की संभावना है।
नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन न केवल भाजपा की आंतरिक संगठनात्मक रणनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह 2026 के विधानसभा चुनावों (बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, और असम) और 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा भी तय करेगा। नया अध्यक्ष पार्टी को 2024 में 240 सीटों से 2029 में पूर्ण बहुमत (272 सीटों) तक ले जाने की चुनौती का सामना करेगा। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है। एक एक्स पोस्ट में कहा गया, “भाजपा अगले हफ्ते तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन सकती है, और यह एक सरप्राइज नाम हो सकता है।” यह संकेत देता है कि पार्टी एक नई पीढ़ी या क्षेत्रीय नेता को मौका दे सकती है। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पार्टी की भविष्य की रणनीति को आकार देगा। धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, और भूपेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेताओं के बीच कड़ा मुकाबला है, लेकिन संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, और जातीय समीकरण इस चयन में निर्णायक होंगे। RSS की सहमति और पार्टी की रणनीति के आधार पर यह निर्णय जुलाई 2025 में होने की उम्मीद है।
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