देश- विदेश: ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी की दो टूक- पहलगाम आतंकी हमला मानवता पर हमला।
Prime Minister Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6-7 जुलाई 2025 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6-7 जुलाई 2025 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए दुनिया को एकजुट होने का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। पीएम मोदी ने इसे न केवल भारत पर, बल्कि पूरी मानवता पर हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, और इसे खत्म करने के लिए सभी देशों को बिना किसी दोहरे मापदंड के एक साथ मिलकर काम करना होगा।
- पहलगाम आतंकी हमला: क्या हुआ था?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पर्यटक स्थल पहलगाम के बैसारन मीडो में एक भयानक आतंकी हमला हुआ। इस हमले में आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, और कई लोग घायल हो गए। मरने वालों में एक स्थानीय घोड़ा सवार, एक हनीमून पर आए दूल्हे और एक बिजनेसमैन भी शामिल थे। इस हमले ने न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया। भारतीय अधिकारियों ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक सहयोगी समूह को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई कूटनीतिक कदम उठाए, जैसे अटारी-वाघा सीमा को बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की वीजा छूट योजना को रद्द करना। इस हमले ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया, और दोनों देशों की सेनाओं ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर कई दिनों तक गोलीबारी की।
- ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन
17वां ब्रिक्स सम्मेलन रियो डी जनेरियो में 6-7 जुलाई 2025 को आयोजित हुआ, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ 2024 में शामिल हुए मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और 2025 में शामिल हुए इंडोनेशिया के नेता शामिल थे। इस सम्मेलन का थीम था "वैश्विक दक्षिण सहयोग को मजबूत करना और समावेशी, टिकाऊ शासन व्यवस्था।" पीएम मोदी ने 'शांति और सुरक्षा' सत्र में अपने संबोधन में आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, "आतंकवाद मानवता के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। हाल ही में भारत ने पहलगाम में एक अमानवीय और कायराना आतंकी हमले का सामना किया। यह हमला न केवल भारत पर, बल्कि पूरी मानवता पर था।" पीएम मोदी ने इस हमले को भारत की "आत्मा, पहचान और गरिमा" पर हमला बताया और कहा कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता या नस्ल से जोड़ा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर और बिना किसी दोहरे मापदंड के कार्रवाई करने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, और आतंकवाद को राजनीतिक लाभ के लिए समर्थन देना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक आतंकवाद विरोधी संधि (Comprehensive Convention on International Terrorism) को जल्द से जल्द अपनाने की मांग की। उन्होंने विशेष रूप से उन देशों पर निशाना साधा, जो आतंकवाद को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन देते हैं, और कहा कि ऐसे देशों को इसकी कीमत चुकानी होगी।
- ब्रिक्स की संयुक्त घोषणा
ब्रिक्स सम्मेलन में जारी संयुक्त घोषणा में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। घोषणा में कहा गया, "हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए। हम आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने और दोहरे मापदंडों को खारिज करने का आह्वान करते हैं।" इस घोषणा में आतंकियों और उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराने, सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया।
भारत ने इस सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ अपनी नई रणनीति को ब्रिक्स देशों का समर्थन दिलाने में सफलता हासिल की। विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) दम्मू रवि ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले पर भारत के साथ अपनी एकजुटता और सहानुभूति दिखाई, जो घोषणा में स्पष्ट रूप से झलकता है।
पहलगाम आतंकी हमला भारत के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि यह क्षेत्र पर्यटन के लिए जाना जाता है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार ने दावा किया था कि क्षेत्र में शांति और पर्यटन बढ़ रहा है। लेकिन इस हमले ने सरकार की इस कहानी को चुनौती दी। अंतरराष्ट्रीय संकट समूह के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण डोंठी ने कहा, "नई दिल्ली और उसकी सुरक्षा एजेंसियां अपनी ही शांति और स्थिरता की कहानी पर विश्वास करने लगी थीं, और वे आत्मसंतुष्ट हो गए।" हमले के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 28 अप्रैल 2025 को एक प्रस्ताव पारित कर इसकी निंदा की और इसे "कश्मीरियत" पर हमला बताया। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा, "यह सदन इस जघन्य और कायराना कृत्य की निंदा करता है, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई। हम पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं।"
पहलगाम हमले के बाद भारत ने कड़े कदम उठाए। पीएम मोदी ने 24 अप्रैल 2025 को बिहार के मधुबनी में एक रैली में कहा, "हम हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूंढकर सजा देंगे।" उन्होंने हिंदी में शुरू किया गया अपना भाषण अंग्रेजी में खत्म किया, ताकि विश्व समुदाय तक भारत का संदेश पहुंचे। उन्होंने कहा, "आज बिहार की धरती से मैं पूरी दुनिया को कहना चाहता हूं: भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूंढेगा, उनका पीछा करेगा और सजा देगा।" भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि उनका देश वर्षों से आतंकवाद को समर्थन देता रहा है। भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने इसे पाकिस्तान की "दुष्ट राज्य" की छवि का सबूत बताया। इसके अलावा, भारत ने 16 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगाया, जिन्हें भड़काऊ और गलत सूचनाएं फैलाने का दोषी माना गया।
पहलगाम हमले की निंदा करने में ब्रिक्स देशों के अलावा कई अन्य देशों ने भी भारत का साथ दिया। अंगोला के राष्ट्रपति लोरेंसू ने हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की, जिसके लिए पीएम मोदी ने उनका आभार जताया। हालांकि, चीन ने इस मामले में तटस्थ रुख अपनाते हुए हमले की "निष्पक्ष और त्वरित जांच" की मांग की और अपने सहयोगी पाकिस्तान का समर्थन किया। पहलगाम आतंकी हमला न केवल भारत, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती है। ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन इस बात का प्रतीक है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए सभी देशों से एकजुट होकर इसे खत्म करने की अपील की। ब्रिक्स की संयुक्त घोषणा में पहलगाम हमले की निंदा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भारत की कूटनीतिक जीत है। यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और ठोस कदम जरूरी हैं। भविष्य में भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक नीति को और मजबूत करने के लिए करेगा, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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