ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच रूसी क्रूड से लदे तीन जहाज जामनगर की ओर निकले: रिलायंस ने अफवाह को सरासर झूठ बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर टैरिफ बढ़ाने की धमकियों के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी क्रूड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर टैरिफ बढ़ाने की धमकियों के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी क्रूड ऑयल से लदे कम से कम तीन जहाज गुजरात की जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों पर करीब 22 लाख बैरल यूराल्स ग्रेड का रूसी क्रूड लदा बताया गया था और इनकी डिलीवरी जनवरी महीने के शुरुआती दिनों में होने की संभावना जताई गई थी। यह दावा जहाज ट्रैकिंग डेटा के आधार पर किया गया था, जिसमें जहाजों के सिग्नल जामनगर को गंतव्य दिखा रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव के बाद कुछ समय के लिए रूसी तेल की खरीद रोकी थी, लेकिन अब फिर से सीमित मात्रा में खरीद शुरू कर दी है, खासकर घरेलू बाजार के लिए ईंधन उत्पादन हेतु। इससे पहले 2024 और 2025 के अधिकांश समय में रिलायंस दुनिया की सबसे बड़ी रूसी क्रूड खरीदार रही थी और जामनगर रिफाइनरी के आयात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रूसी तेल का था। दिसंबर में रूसी तेल की डिलीवरी घटकर कुल आयात का करीब 20 प्रतिशत रह गई थी। अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात को लेकर अतिरिक्त टैरिफ लगा रखा है और ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि भारत रूसी तेल खरीदना जारी रखता है तो टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है। इसी पृष्ठभूमि में यह रिपोर्ट आई थी कि तीन टैंकर जामनगर की ओर जा रहे हैं।
हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस दावे का कड़ा खंडन किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि ऐसी रिपोर्ट सरासर झूठी है और यह कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली है। रिलायंस ने बताया कि जामनगर रिफाइनरी को पिछले लगभग तीन सप्ताह से रूसी क्रूड ऑयल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी महीने में भी किसी रूसी क्रूड की डिलीवरी की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि जहाजों के ट्रांसपॉन्डर सिग्नल से दिखने वाले संभावित गंतव्य वास्तविक खरीद या अंतिम डिस्चार्ज पॉइंट की पुष्टि नहीं करते। रिलायंस ने जोर देकर कहा कि कोई भी ऐसा कार्गो कंपनी द्वारा खरीदा नहीं गया है और जनवरी में रूसी क्रूड की कोई प्रतिबद्ध डिलीवरी नहीं है। कंपनी का कहना है कि ऐसी रिपोर्टें गलत हैं और इनमें कंपनी के खंडन को नजरअंदाज किया गया। इस खंडन के बाद यह स्पष्ट हो गया कि तीन जहाजों का जामनगर की ओर जाना मात्र एक अफवाह या गलत अनुमान पर आधारित था।
यह पूरा मामला उस समय और चर्चा में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल आयात कम करने को लेकर दबाव बनाया और टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा था कि भारत यदि रूसी तेल खरीदता रहा तो भारतीय सामानों पर टैरिफ बहुत जल्दी बढ़ाया जा सकता है। इससे पहले अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बाद भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल की खरीद में सतर्कता बरती थी। रिलायंस ने भी निर्यात वाली रिफाइनरी में रूसी तेल का उपयोग रोक दिया था और अन्य स्रोतों से तेल आयात बढ़ाया था। हालांकि, घरेलू उपयोग के लिए कुछ खरीद जारी रखने की बातें हुई थीं, लेकिन अब कंपनी ने साफ कर दिया है कि जनवरी में कोई रूसी डिलीवरी नहीं है। जहाज ट्रैकिंग डेटा पर आधारित रिपोर्टों में अक्सर गंतव्य बदलने की संभावना रहती है और ये अंतिम खरीदार की पुष्टि नहीं करते। रिलायंस का खंडन इस बात को रेखांकित करता है कि ऐसी खबरें बिना पुष्टि के फैलाई जा रही थीं। इस घटना से तेल आयात की जटिलताएं और अंतरराष्ट्रीय दबाव का प्रभाव सामने आया है। भारतीय रिफाइनर सस्ते रूसी तेल और वैश्विक प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। रिलायंस ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर यह सुनिश्चित किया कि कोई गलतफहमी न रहे। अंत में, यह मामला एक अफवाह के रूप में समाप्त हो गया और कंपनी ने पिछले तीन सप्ताहों में कोई रूसी कार्गो न मिलने तथा जनवरी में कोई अपेक्षा न होने की पुष्टि की।
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