इमरान खान की बहन अलीमा खान ने मौत की अफवाहों पर चेतावनी दी: 'उनके बाल भी बांका नहीं कर सकते, वरना पाकिस्तान अराजकता में डूब जाएगा'।
पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों तनाव चरम पर है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अफवाहें सोशल मीडिया पर तेजी से फैली
पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों तनाव चरम पर है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अफवाहें सोशल मीडिया पर तेजी से फैलीहुई हैं, जिससे देश भर में आक्रोश फैल गया है। इमरान की बहन अलीमा खान ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इमरान को कोई नुकसान पहुंचाया गया, तो पाकिस्तान अराजकता की चपेट में आ जाएगा। विश्वसनीय स्रोतों जैसे एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया, एबीपी न्यूज और न्यूज18 से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विवाद 26 नवंबर 2025 से शुरू हुआ, जब अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के मीडिया में दावा किया गया कि इमरान को आईएसआई और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के इशारे पर जेल में मार दिया गया। अलीमा ने एनडीटीवी और न्यूज18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि परिवार को तीन हफ्तों से इमरान से मिलने नहीं दिया जा रहा, जो इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उन्होंने अदियाला जेल के अधिकारियों के खिलाफ अदालत में अवमानना की याचिका दायर की है। यह घटना न केवल इमरान के समर्थकों को सड़कों पर उतार रही है, बल्कि पाकिस्तान की अस्थिरता को और गहरा कर रही है।
इमरान खान को अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में रखा गया है। उन पर भ्रष्टाचार, विद्रोह भड़काने और अन्य कई मुकदमे चल रहे हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का दावा है कि ये सभी केस राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। हाल के हफ्तों में इमरान को एकांत कारावास में रखा गया है, जो जेल नियमों के मुताबिक चार दिनों से ज्यादा नहीं होना चाहिए। लेकिन अलीमा के अनुसार, इमरान को लगभग एक महीने से अलग-थलग रखा गया है। यह व्यवहार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न जैसा है। 26 नवंबर को सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलीं कि इमरान को जेल में हत्या कर दी गई। कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि यह सेना के स्रोतों से मिली जानकारी है। इन अफवाहों ने आग में घी डालने का काम किया। इमरान की तीनों बहनें- नूरीन नियाज़ी, अलीमा खान और डॉ. उज़मा खान- अदियाला जेल पहुंचीं। वे इमरान से मिलने और उनकी सेहत की पुष्टि करने गई थीं। लेकिन पंजाब पुलिस ने उन्हें घेर लिया।
अलीमा ने बताया कि परिवार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था। वे सड़क नहीं रोक रहे थे, न ही कोई अवैध काम कर रहे थे। फिर भी, अचानक इलाके की स्ट्रीट लाइटें बंद कर दी गईं और अंधेरे में पुलिस ने हमला बोल दिया। महिलाओं को घसीटा गया, चादरें खींची गईं और नूरीन को बेहोशी के कगार पर पहुंचा दिया गया। अलीमा ने कहा कि यह सुनियोजित हमला था। हजारों पीटीआई समर्थक जेल के बाहर जमा हो गए। वे नारे लगा रहे थे और इमरान की रिहाई की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे झड़पें भड़क गईं। अलीमा ने लाइव स्ट्रीमिंग में कहा कि वे तब तक नहीं हटेंगी, जब तक इमरान से न मिल लें। कई घंटों की बातचीत के बाद पुलिस ने आश्वासन दिया कि इमरान सुरक्षित हैं। इसके बाद अलीमा ने धरना समाप्त किया, लेकिन चेतावनी दी कि अगर सबूत न दिए गए, तो प्रदर्शन फिर शुरू हो जाएगा।
अलीमा की चेतावनी बेहद सख्त है। उन्होंने कहा कि इमरान पूरी तरह स्वस्थ हैं। तीन-चार हफ्ते पहले हुई आखिरी मुलाकात में वे बिल्कुल ठीक लग रहे थे। लेकिन अब पहुंच न होने से चिंता बढ़ गई है। अलीमा ने कहा, 'वे उनके बाल भी बांका नहीं कर सकते। अगर ऐसा किया, तो देश में भारी अराजकता फैल जाएगी। जनता उनके पीछे है। एक संदेश से ही समर्थक जेल के दरवाजे तोड़ देंगे।' उन्होंने आसिम मुनीर पर सीधा आरोप लगाया कि वे सब कुछ कर रहे हैं। अलीमा ने 27वें संशोधन को 'व्यक्ति-विशेष' बताया, जो कुछ लोगों को कानून से छूट देता है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। जज इस्तीफा दे रहे हैं, क्योंकि वे आदेशों के आगे बेबस हैं। अलीमा ने अमेरिका का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इमरान को पाकिस्तान छोड़ने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। यह बयान 2022 की सत्ता परिवर्तन साजिश से जुड़ा लगता है।
इस घटना ने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया पर NationWorriedForImranKhan ट्रेंड कर रहा है। पीटीआई के वकील खालिद यूसुफ चौधरी ने कहा कि इमरान को किताबें और जरूरी सामान तक नहीं दिए जा रहे। खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को सात बार इमरान से मिलने से रोका गया। जेल अधिकारियों ने कहा कि वे सेना के अधिकारी के अधीन हैं। अदियाला जेल ने अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इमरान पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें पूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल रही है। पीटीआई को उनकी सेहत की जानकारी दी गई है। लेकिन परिवार सबूत मांग रहा है। अलीमा ने अदालत में याचिका दायर की है कि इमरान को अदालत में पेश किया जाए।
पाकिस्तान में इमरान का प्रभाव गहरा है। वे 2018 से 2022 तक प्रधानमंत्री रहे। उनकी लोकप्रियता अभी भी बरकरार है, खासकर युवाओं में। सत्ता परिवर्तन के बाद सेना और शहबाज़ शरीफ सरकार पर साजिश का आरोप लगता रहा है। आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी ने जनता का गुस्सा बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान को नुकसान पहुंचाने से सिविल वॉर जैसी स्थिति बन सकती है। बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा में विद्रोह तेज हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता है। भारत ने पाकिस्तान की अस्थिरता पर नजर रखी हुई है। अमेरिका और ब्रिटेन ने मानवाधिकारों पर सवाल उठाए हैं।
अलीमा ने कहा कि इमरान की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। उनके ट्वीट्स सच्चाई उजागर करते थे, इसलिए अब संदेश नहीं आने देना चाहते। परिवार ने कहा कि वे न्याय व्यवस्था के जरिए लड़ेंगे, भले ही वह कमजोर हो। नूरीन नियाज़ी ने एनडीटीवी से कहा कि न्याय व्यवस्था खत्म हो चुकी है, लेकिन वे अदालत जाएंगे। अलीमा ने भावुक होकर कहा कि इमरान राष्ट्रपिता जैसे हैं। लोग उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। अगर कुछ हुआ, तो कोई नहीं बचेगा। यह चेतावनी सरकार के लिए खतरे की घंटी है।
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