'एक को कुर्सी चाहिए, दूसरे को चाय'- कर्नाटक में सीएम-डिप्टी सीएम विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा तंज।

कर्नाटक की सियासत में इन दिनों तनाव की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच बढ़ते

Nov 29, 2025 - 11:54
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'एक को कुर्सी चाहिए, दूसरे को चाय'- कर्नाटक में सीएम-डिप्टी सीएम विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा तंज।
'एक को कुर्सी चाहिए, दूसरे को चाय'- कर्नाटक में सीएम-डिप्टी सीएम विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा तंज।

कर्नाटक की सियासत में इन दिनों तनाव की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच बढ़ते मतभेद ने कांग्रेस पार्टी को असहज कर दिया है। इसी विवाद के बीच भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता बसवराज बोम्मई ने कहा कि एक को कुर्सी चाहिए तो दूसरे को चाय। यह टिप्पणी कर्नाटक कांग्रेस में चल रही आंतरिक कलह को उजागर करती है। विश्वसनीय स्रोतों जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस और एनडीटीवी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विवाद जुलाई 2024 से सुलझने का नाम नहीं ले रहा। सिद्धारमैया ने शिवकुमार पर मुख्यमंत्री पद के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया, जबकि शिवकुमार ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वे पार्टी के वफादार सिपाही हैं। भाजपा का यह तंज न केवल वर्तमान विवाद को हवा दे रहा है, बल्कि 2028 विधानसभा चुनावों की तैयारी में भी असर डाल रहा है।

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार मई 2023 में सत्ता में आई थी। विधानसभा चुनावों में 135 सीटें जीतकर कांग्रेस ने 15 साल के भाजपा शासन को उखाड़ फेंका। सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि डी.के. शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया। यह फैसला पार्टी हाईकमान द्वारा लिया गया था, ताकि वोकालिगा समुदाय के प्रभावशाली नेता शिवकुमार को संतुष्ट रखा जा सके। लेकिन सत्ता संभालते ही दोनों नेताओं के बीच मतभेद उभरने लगे। शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने चुनावों में 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसके बदले उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। वहीं, सिद्धारमैया ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि शिवकुमार ने अतिशयोक्ति की है। जुलाई 2024 में विवाद तब चरम पर पहुंचा जब सिद्धारमैया ने शिवकुमार पर विधायकों को तोड़ने का आरोप लगाया। कांग्रेस के 10 विधायकों ने सिद्धारमैया के समर्थन में बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने शिवकुमार की महत्वाकांक्षा को पार्टी के लिए खतरा बताया।

भाजपा ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 25 जुलाई 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, एक को कुर्सी चाहिए, दूसरे को चाय। यह टिप्पणी सीधे सिद्धारमैया और शिवकुमार पर कसा गया तंज था। बोम्मई ने कहा कि सिद्धारमैया चाय के लिए तरस रहे हैं, जबकि शिवकुमार कुर्सी के पीछे पड़े हैं। उन्होंने कांग्रेस को आंतरिक कलह वाली पार्टी बताया और कहा कि यह सरकार जल्द ही गिर जाएगी। भाजपा के अन्य नेता जैसे बी.एस. येदियुरप्पा ने भी कहा कि कांग्रेस का यह स्वार्थी रवैया कर्नाटक की जनता को भ्रमित कर रहा है। येदियुरप्पा ने याद दिलाया कि 2019 में भी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन इसी तरह के विवादों का शिकार हुआ था, जिसके कारण सरकार गिर गई। भाजपा का यह हमला सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया। ट्विटर पर एककोकुर्सीदूसरेकोचाय हैशटैग ट्रेंड करने लगा, जिसमें भाजपा समर्थक कांग्रेस की खिल्ली उड़ा रहे थे।

इस विवाद की जड़ें गहरी हैं। सिद्धारमैया, जो 81 वर्ष के हैं, ने कहा कि उनकी सेहत खराब है और वे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते। लेकिन शिवकुमार का दावा है कि वे पार्टी के संगठन महासचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिवकुमार ने सिद्धारमैया से माफी मांगी, लेकिन विवाद सुलझा नहीं। कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं को बेंगलुरु में बुलाकर समझाया। मल्लिकार्जुन खड़गे और के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी एकजुट रहनी चाहिए। लेकिन सिद्धारमैया ने कहा कि वे इस्तीफा देने को तैयार हैं, अगर हाईकमान कहे। यह बयान और विवाद को भड़का दिया। विपक्ष ने इसे कमजोरी का प्रतीक बताया।

कर्नाटक में यह विवाद विकास कार्यों पर असर डाल रहा है। राज्य सरकार ने वादा किया था कि वे पांच गारंटी योजना लागू करेंगे, जैसे हर परिवार को 2,000 रुपये मासिक सहायता। लेकिन विवाद के कारण ये योजनाएं ठप पड़ी हैं। किसान आंदोलन भी तेज हो गया है, क्योंकि सिंचाई परियोजनाओं में देरी हो रही है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है। बोम्मई ने विंग गवर्नर घोटाले का जिक्र किया, जिसमें शिवकुमार का नाम आया था। हालांकि, जांच चल रही है। सिद्धारमैया ने भाजपा पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव हारने के बाद अब सरकार गिराने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। कर्नाटक कांग्रेस में लिंगायत, वोकालिगा और दलित समुदायों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। सिद्धारमैया दक्षिण कर्नाटक के नेता हैं, जबकि शिवकुमार बेंगलुरु के। अगर विवाद बढ़ा, तो 2024 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। भाजपा ने 25 लोकसभा सीटों पर मजबूत दावा किया है। जेडीएस के साथ गठबंधन ने भाजपा को मजबूत बनाया है। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने भी कांग्रेस पर तंज कसा।

भाजपा का तंज न केवल हास्यपूर्ण है, बल्कि गहरा संदेश देता है। एक को कुर्सी चाहिए, दूसरे को चाय यह लाइन कांग्रेस की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। बोम्मई ने कहा कि जनता कुर्सी की लड़ाई देखकर थक चुकी है। वे विकास चाहती है। भाजपा ने कहा कि अगर कांग्रेस एकजुट नहीं हुई, तो हम सत्ता में लौट आएंगे। सिद्धारमैया ने जवाब दिया कि भाजपा का तंज उनकी हार का डर दिखाता है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता कांग्रेस को समर्थन देगी।

इस विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा छेड़ दी है। राहुल गांधी ने कर्नाटक दौरे पर कहा कि पार्टी में लोकतंत्र है, इसलिए बहस होती है। लेकिन विपक्ष ने इसे कमजोरी बताया। प्रियंका गांधी ने चुप्पी साधी है। कर्नाटक कांग्रेस के अन्य नेता जैसे जी. परमेश्वर ने मध्यस्थता की कोशिश की। उन्होंने कहा कि दोनों नेता अनुभवी हैं, वे खुद सुलझा लेंगे। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला।

कर्नाटक की राजनीति हमेशा से रोमांचक रही है। 2018 में ऑपरेशन कमल के जरिए भाजपा ने सरकार बनाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई। अब 2023 की जीत के बाद कांग्रेस को चुनौतियां मिल रही हैं। आर्थिक रूप से कर्नाटक मजबूत राज्य है, लेकिन बेरोजगारी और महंगाई मुद्दे हैं। विवाद के कारण इन पर ध्यान नहीं मिल पा रहा। भाजपा ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी है। स्पीकर ने कहा कि वे संवैधानिक तरीके से फैसला लेंगे।

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