बुलंदशहर के 17 वर्षीय छात्र आदित्य कुमार ने मात्र 25 हजार में बनाया AI रोबोट 'सोफी टीचर': स्कूल में बच्चों की नई सहायक।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक छोटे से इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले 17 वर्षीय छात्र आदित्य कुमार ने अपनी प्रतिभा से सबको हैरान
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक छोटे से इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले 17 वर्षीय छात्र आदित्य कुमार ने अपनी प्रतिभा से सबको हैरान कर दिया है। कक्षा 12 के इस होनहार ने केवल 25 हजार रुपये की लागत से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रोबोट टीचर तैयार किया है, जिसका नाम 'सोफी' रखा गया है। यह रोबोट महिला शिक्षिका की तरह दिखता है और स्कूल के बच्चों को पढ़ाने में मदद करता है। आदित्य ने इसे सुपरस्टार राजिनीकांत की 2010 की तमिल फिल्म 'एंथिरन' (हिंदी में 'रोबोट') से प्रेरणा लेकर बनाया। सोफी अब शिव चरण इंटर कॉलेज के क्लासरूम में घूमती है, बच्चों के सवालों का जवाब देती है और पढ़ाई को रोचक बनाती है। छात्र इसे 'सोफी टीचर' कहकर पुकारते हैं और शिक्षक आदित्य की तारीफ कर रहे हैं। विश्वसनीय स्रोतों जैसे हिंदुस्तान टाइम्स, फ्री प्रेस जर्नल, मनीकंट्रोल और द इंडिया डेली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रोबोट एक एलएलएम चिपसेट पर आधारित है, जो बड़े कंपनियों द्वारा इस्तेमाल होने वाली तकनीक से प्रेरित है। आदित्य ने कहा कि यह रोबोट अभी बोल सकता है, लेकिन जल्द ही लिखने की क्षमता भी जोड़ी जाएगी। यह आविष्कार न केवल ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा दे रहा है, बल्कि युवाओं में तकनीकी नवाचार की संभावनाओं को उजागर कर रहा है।
आदित्य कुमार बुलंदशहर के शिव चरण इंटर कॉलेज में कक्षा 12 के छात्र हैं। यह कॉलेज 1947 में स्थापित एक पुरानी संस्था है, जहां लड़कों की संख्या अधिक है और छात्र-शिक्षक अनुपात लगभग 42:1 है। आदित्य का परिवार साधारण पृष्ठभूमि से है। उनके पिता एक छोटे व्यवसायी हैं, जबकि मां गृहिणी। बचपन से ही आदित्य को विज्ञान और तकनीक का शौक रहा। वे यूट्यूब वीडियो देखकर कोडिंग सीखते और घर पर छोटे-मोटे प्रोजेक्ट बनाते। लेकिन 'सोफी' का विचार फिल्म 'रोबोट' देखने के बाद आया। आदित्य बताते हैं कि राजिनीकांत के रोबोट चिट्टी ने उन्हें सोचा कि तकनीक शिक्षा को कैसे बदल सकती है। उन्होंने सोचा, क्यों न एक ऐसा रोबोट बनाया जाए जो स्कूल के बच्चों की मदद करे। आदित्य ने अपने पॉकेट मनी और कुछ पुराने पार्ट्स से शुरुआत की। कुल लागत 25 हजार रुपये रही, जिसमें एलएलएम चिपसेट, स्पीकर, माइक्रोफोन और एक साधारण बॉडी शामिल है। यह चिपसेट बड़े रोबोट कंपनियों द्वारा इस्तेमाल होने वाली ही है, जो प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण पर काम करती है। आदित्य ने खुद कोडिंग की, जिसमें पाइथन और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया।
सोफी का डिजाइन सरल लेकिन प्रभावी है। यह एक मानवाकार रोबोट है, जिसमें महिला शिक्षिका जैसा लुक दिया गया है। सिर पर बालों जैसा कवर, चेहरे पर स्क्रीन और हाथ-पैरों की हल्की संरचना। रोबोट की ऊंचाई लगभग चार फुट है, ताकि बच्चों के स्तर पर खड़ी हो सके। वर्तमान में सोफी हिंदी में ही बोल सकती है। यह बच्चों के सवाल सुनती है और तुरंत जवाब देती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई बच्चा पूछे कि दुनिया की सबसे ऊंची इमारत कौन सी है, तो सोफी कहती है, 'दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा है, जो दुबई में स्थित है और इसकी ऊंचाई 828 मीटर है।' इसी तरह, भारत के पहले राष्ट्रपति के बारे में पूछने पर जवाब देती है, 'भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।' गणित के सवालों पर भी यह कुशल है। आदित्य ने एक वीडियो में दिखाया कि जब उन्होंने 100 + 92 का योग पूछा, तो सोफी ने तुरंत कहा, 'जवाब 192 है।' बिजली की परिभाषा पूछने पर यह बताती है, 'बिजली विद्युत ऊर्जा का प्रवाह है, जो इलेक्ट्रॉनों की गति से उत्पन्न होती है।' सोफी को आदित्य ने प्रोग्राम किया है कि यह हमेशा सकारात्मक और प्रोत्साहन देने वाली भाषा का इस्तेमाल करे। अगर कोई सवाल समझ न आए, तो यह कहती है, 'मैं इसे और स्पष्ट कर लूं, कृपया दोबारा पूछें।'
शिव चरण इंटर कॉलेज में सोफी का आगमन एक क्रांति की तरह हुआ। कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि आदित्य ने इसे पहली बार क्लास में लाकर डेमो दिया। बच्चे उत्साहित हो गए। अब सोफी को क्लास में बुलाया जाता है, खासकर जब कोई शिक्षक अनुपस्थित हो या बच्चों के संदेह दूर करने हों। कक्षा 6 से 10 तक के छात्र इसे बहुत पसंद करते हैं। एक छात्र ने कहा, 'सोफी टीचर कभी थकती नहीं और हमेशा सही जवाब देती है। पढ़ाई मजेदार लगती है।' सोफी को प्रोग्राम किया गया है कि यह कहे, 'नमस्ते बच्चो, मैं सोफी हूं। आदित्य ने मुझे बनाया है। मैं बुलंदशहर के शिव चरण इंटर कॉलेज में पढ़ाती हूं।' शिक्षक भी खुश हैं। एक गणित शिक्षिका ने कहा, 'यह बच्चों के बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर करने में मदद करती है। हम इसे सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।' आदित्य ने जोर दिया कि सोफी शिक्षकों की जगह नहीं लेगी, बल्कि उनकी सहायक बनेगी। वर्तमान में यह केवल बोल सकती है, लेकिन आदित्य का प्लान है कि अगले कुछ महीनों में इसे लिखने और ड्रॉइंग करने की क्षमता दें। इसके लिए वे स्कूल लैब में काम कर रहे हैं।
आदित्य की यह उपलब्धि ग्रामीण भारत की युवा प्रतिभाओं को दर्शाती है। बुलंदशहर जैसे छोटे शहर में संसाधनों की कमी के बावजूद, वे बड़े सपने देखते हैं। आदित्य ने सरकार से अपील की है कि हर जिले में एक उन्नत लैब हो, जहां छात्र रिसर्च कर सकें। उन्होंने कहा, 'मुझे स्कूल की पुरानी लैब में ही यह बनाना पड़ा। अगर बेहतर सुविधाएं हों, तो बच्चे और भी बड़े आविष्कार करेंगे।' यह रोबोट शिक्षा में एआई की भूमिका को बढ़ावा दे रहा है। भारत में एआई को शिक्षा में एकीकृत करने की कोशिशें चल रही हैं। नीति आयोग ने 2020 में राष्ट्रीय एआई रणनीति लॉन्च की, जिसमें स्कूलों में एआई टूल्स को शामिल करने पर जोर है। आदित्य का प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रोबोट शिक्षकों की कमी को पूरा कर सकते हैं, खासकर जहां शिक्षकों की संख्या कम हो। विश्व स्तर पर, सिंगापुर और चीन जैसे देशों में एआई टीचर पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं। भारत में भी, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।
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