सांबा में माता वैष्णो देवी जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त, एक श्रद्धालु की मौत, 40 घायल, टायर फटने से हुआ हादसा। 

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के जटवाल क्षेत्र में 21 अगस्त 2025 को तड़के एक दर्दनाक बस हादसा हुआ, जिसमें माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जा रही एक बस 30 फीट ऊंचे पुल से नीचे गहरे

Aug 22, 2025 - 14:52
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सांबा में माता वैष्णो देवी जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त, एक श्रद्धालु की मौत, 40 घायल, टायर फटने से हुआ हादसा। 
सांबा में माता वैष्णो देवी जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त, एक श्रद्धालु की मौत, 40 घायल, टायर फटने से हुआ हादसा। 

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के जटवाल क्षेत्र में 21 अगस्त 2025 को तड़के एक दर्दनाक बस हादसा हुआ, जिसमें माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जा रही एक बस 30 फीट ऊंचे पुल से नीचे गहरे नाले में जा गिरी। इस हादसे में एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 40 अन्य यात्री घायल हो गए। बस उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से कटरा जा रही थी। हादसे का कारण बस का टायर फटना बताया जा रहा है, जिसके बाद चालक ने नियंत्रण खो दिया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, और गंभीर रूप से घायल आठ यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए एम्स विजयपुर रेफर किया गया। हादसा जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात करीब 1:30 बजे हुआ। बस (पंजीकरण संख्या UP 81 BT 7688) में अमरोहा जिले के श्रद्धालु सवार थे, जो माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटरा जा रहे थे। यात्रियों के अनुसार, वे 18 अगस्त को अपने घर से निकले थे और रास्ते में चामुंडा देवी और ज्वालाजी मंदिर में दर्शन करने के बाद वैष्णो देवी की ओर बढ़ रहे थे। एक यात्री ने बताया कि रात के समय अधिकांश लोग बस में सो रहे थे, तभी अचानक टायर फटने की आवाज आई और बस अनियंत्रित होकर पुल से नीचे गिर गई। हादसे के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। बस में महिलाएं और बच्चे भी सवार थे, जिनमें से कई को गंभीर चोटें आईं। मृतक की पहचान अमरोहा जिले के हसनपुर के रुखालू गांव निवासी कृपाल उर्फ इकबाल (30) पुत्र हरबंस के रूप में हुई है। घायलों में पुष्पेंद्र पुत्र रमेश, भगवान साये पुत्र जय राम, खूफ चंद पुत्र रामपाल, गजराज पुत्र हरवान साये, विजेंद्र पुत्र भगवान साये, बस चालक राजिंदर पुत्र ओम प्रकाश (खुर्जा, बुलंदशहर), और पूनम पत्नी देव राज शामिल हैं। सभी घायल और मृतक अमरोहा जिले के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर है, और उनका इलाज एम्स विजयपुर में चल रहा है। बाकी घायलों को सांबा जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और राहगीर बचाव कार्य में जुट गए। उन्होंने घायलों को बस से बाहर निकाला और पुलिस को सूचित किया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। आपातकालीन सेवाओं ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय लोगों की त्वरित मदद से कई यात्रियों की जान बचाई गई। हादसे के बाद बस के मलबे को हटाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई यात्री बस के नीचे फंसा न हो। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि हादसे का मुख्य कारण बस का टायर फटना था, जिसके बाद चालक नियंत्रण नहीं रख सका। कुछ यात्रियों ने चालक की लापरवाही को भी हादसे का कारण बताया। एक यात्री ने कहा, "हम सभी सो रहे थे। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, और बस पलट गई। चालक को गति कम करनी चाहिए थी।" पुलिस ने चालक राजिंदर से पूछताछ शुरू कर दी है, जो खुद भी घायल है। हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने शोक संदेश में लिखा, "सांबा में माता वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों की बस दुर्घटना की खबर से दुखी हूं। एक व्यक्ति की मौत और कई घायलों की खबर है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं और प्रशासन को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश देता हूं।" उन्होंने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के इलाज में कोई कमी न होने का आश्वासन दिया। इस हादसे ने जम्मू-कश्मीर में सड़क सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल खड़े किए हैं। यह पहली बार नहीं है जब माता वैष्णो देवी जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हुई हो। मई 2023 में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर झज्जर कोटली के पास एक बस खाई में गिर गई थी, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी और 20 अन्य घायल हुए थे। उस हादसे में भी बस अमृतसर से कटरा जा रही थी। इसी तरह, नवंबर 2023 में डोडा जिले में एक बस के खाई में गिरने से 36 लोगों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं से साफ है कि जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और घुमावदार रास्तों पर सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है।

सड़क हादसों के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। 2018 से 2020 के बीच जम्मू-कश्मीर में 16,834 सड़क हादसे हुए, जिनमें 2,708 लोगों की जान गई और 21,271 लोग घायल हुए। जम्मू संभाग में ही 3,278 हादसों में 521 लोगों की मौत हुई थी। इन हादसों के पीछे तेज रफ्तार, लापरवाही, और खराब सड़कें प्रमुख कारण रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में सड़कों की स्थिति, वाहनों की नियमित जांच, और चालकों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। स्थानीय लोगों ने इस हादसे पर दुख जताया और प्रशासन से सड़क सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "यह रास्ता बहुत खतरनाक है। रात में ड्राइवरों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।" कुछ लोगों ने यह भी मांग की कि तीर्थयात्रियों को ले जाने वाली बसों की नियमित जांच हो और चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। हादसे के बाद अमरोहा जिले में भी शोक की लहर है। मृतक कृपाल के परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाए। परिवार के एक सदस्य ने कहा, "हमारी खुशियां छिन गईं। कृपाल अपने परिवार के लिए बहुत कुछ करना चाहता था।" घायलों के परिवार वाले भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं।

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