संभल हिंसा प्रकरण में पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी करने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का स्थानांतरण आदेश लागू।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर,
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 14 न्यायिक अधिकारियों के तबादले में संभल सीजेएम को सुल्तानपुर भेजा गया, नया पदनाम सिविल जज सीनियर डिवीजन
- नवंबर 2024 संभल हिंसा में घायल युवक के पिता की याचिका पर सुनवाई के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने वाले अदालती फैसले के बाद हुआ तबादला
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, का तबादला कर दिया गया है। यह तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जारी एक प्रशासनिक आदेश के तहत हुआ है, जिसमें कुल 14 न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण शामिल है। विभांशु सुधीर को संभल से सुल्तानपुर स्थानांतरित किया गया है, जहां वे सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर कार्य करेंगे। उनकी जगह पर चंदौसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह को संभल का नया मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। यह आदेश 20 जनवरी 2026 को जारी किया गया। संभल हिंसा नवंबर 2024 में एक मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की थी, जिसमें पांच लोग मारे गए थे और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
हिंसा के दौरान पुलिस द्वारा गोली चलाने की घटनाओं पर सवाल उठे थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी 2026 को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। याचिका घायल युवक आलम के पिता यामीन द्वारा दाखिल की गई थी। यामीन ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को पुलिस की गोली से चोट लगी थी। अदालत ने इस मामले में तत्कालीन सर्कल ऑफिसर अनुज चौधरी, कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश हिंसा में पुलिस की भूमिका की जांच को लेकर महत्वपूर्ण माना गया। पुलिस विभाग ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वे मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने स्पष्ट किया था कि अदालती आदेश के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। इस फैसले के बाद जिले में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के तबादले से मामला नया मोड़ ले चुका है।
संभल हिंसा का प्रकरण नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब एक अदालती आदेश पर शाही जामा मस्जिद का सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। हिंसा में पांच नागरिकों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। पुलिस की ओर से 29 कर्मचारी भी चोटिल हुए थे। घटना के बाद कई याचिकाएं दाखिल की गईं थीं, जिनमें पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत में यामीन की याचिका पर सुनवाई हुई थी। यामीन ने दावा किया था कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम शाही जामा मस्जिद के पास पुलिस की गोलीबारी में घायल हुआ था। अदालत ने इस याचिका पर विचार करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। आदेश में अनुज चौधरी, जो उस समय सर्कल ऑफिसर थे, अनुज तोमर, जो कोतवाली इंस्पेक्टर थे, और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने कहा था कि प्रारंभिक जांच में पुलिस की भूमिका संदिग्ध लगती है। इस आदेश के बाद पुलिस ने इसे चुनौती देने की बात कही थी। पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि विभाग इस फैसले को उच्च न्यायालय में ले जाएगा। तबादला आदेश में विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर भेजा गया है, जहां वे सिविल जज सीनियर डिवीजन के रूप में कार्यभार संभालेंगे। यह तबादला 14 न्यायिक अधिकारियों के समूह में शामिल है। अन्य तबादलों में अलंकृता शक्ति त्रिपाठी का भी नाम है, जो सुल्तानपुर से स्थानांतरित हुई हैं। संभल में नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आदित्य सिंह का पदभार ग्रहण करने से मामले की आगे की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। हिंसा प्रकरण में अब तक कई जांचें हो चुकी हैं, लेकिन अदालती आदेश ने नई दिशा दी थी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद संभल जिले में स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। हिंसा के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। लेकिन यामीन की याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने अनावश्यक गोलीबारी की थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान सबूतों का परीक्षण किया था। 9 जनवरी 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि संभल कोतवाली में एफआईआर दर्ज की जाए। आरोपी पुलिसकर्मियों में अनुज चौधरी और अनुज तोमर के अलावा 15 से 20 अन्य शामिल थे। पुलिस ने इस आदेश को लागू नहीं किया था और अपील की तैयारी कर रही थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 20 जनवरी 2026 को जारी तबादला आदेश ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। विभांशु सुधीर का तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बताया जा रहा है। लेकिन समय को देखते हुए यह ध्यान आकर्षित कर रहा है। संभल हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों ने भी न्याय की मांग की थी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव रहा था। पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। लेकिन अदालती आदेश ने पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। अब नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आने से मामले की सुनवाई जारी रहेगी। उच्च न्यायालय में अपील दायर होने की संभावना है। तबादला सूची में अन्य न्यायिक अधिकारियों के नाम भी हैं, लेकिन संभल सीजेएम का तबादला इस प्रकरण से जुड़ा होने के कारण प्रमुख है। हिंसा प्रकरण की जांच अब भी जारी है।
संभल हिंसा नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में भड़की थी। सर्वे एक अदालती आदेश पर हो रहा था। प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया, जिसके बाद पुलिस और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का उपयोग किया था। गोलीबारी में पांच लोग मारे गए थे। घायलों में आलम भी शामिल था, जिसके पिता यामीन ने याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान सबूत पेश किए गए थे। अदालत ने पाया कि पुलिस की कार्रवाई में अनियमितता हो सकती है। इसलिए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था। पुलिस ने कहा था कि वे निर्दोष हैं और जांच में सहयोग करेंगे। लेकिन आदेश के खिलाफ अपील करने का फैसला लिया था। तबादला आदेश 20 जनवरी 2026 को आया, जिसमें विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर भेजा गया। वे अब सिविल जज सीनियर डिवीजन होंगे। संभल में आदित्य सिंह नए सीजेएम होंगे। यह तबादला 14 अधिकारियों का हिस्सा है। हिंसा प्रकरण में अब तक की जांच में पुलिस की भूमिका पर रिपोर्ट आई थीं। लेकिन अदालती आदेश ने नई जांच की जरूरत बताई थी। मामले की आगे की प्रक्रिया उच्च न्यायालय पर निर्भर करेगी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के आदेश ने संभल हिंसा को नया आयाम दिया था। आदेश में स्पष्ट था कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 302 और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। यामीन की याचिका 6 फरवरी 2025 को दाखिल हुई थी, लेकिन सुनवाई 9 जनवरी 2026 को पूरी हुई। अदालत ने निर्देश दिए थे कि तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि विभाग इस पर विचार करेगा और अपील करेगा। अब तबादले से मामला प्रभावित हुआ है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश में तबादलों की सूची है। विभांशु सुधीर का नाम इसमें शामिल है। सुल्तानपुर में उनका नया पद है। संभल में नए अधिकारी का आना प्रक्रिया को जारी रखेगा। हिंसा में घायलों की संख्या अधिक थी। पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने नियंत्रण के लिए कार्रवाई की थी। लेकिन याचिका में आरोप था कि गोलीबारी अनुचित थी। अदालत ने प्रारंभिक सबूतों पर फैसला लिया था। अब अपील की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
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