एकतरफा प्रेम की आग में जलकर राख- कानपुर देहात में तांत्रिक के चाकू ने काट दी राजाबाबू की सांसें, वशीकरण के लालच ने उगला एक और युवा जीवन।
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में एकतरफा प्रेम की ज्वाला और अंधविश्वास के घने कोहरे ने एक युवक की जिंदगी को हमेशा के लिए
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में एकतरफा प्रेम की ज्वाला और अंधविश्वास के घने कोहरे ने एक युवक की जिंदगी को हमेशा के लिए बुझा दिया। 26 वर्षीय राजाबाबू, जो अपने गांव अरशदपुर शिवली में एक साधारण गल्ला व्यापारी के रूप में जीवन यापन करता था, अपनी प्रेमिका गुड़िया उर्फ पूनम को वश में करने के चक्कर में तंत्र-मंत्र के जाल में फंस गया। लेकिन जिस तांत्रिक ने उसे प्रेम की मंजिल का वादा किया था, उसी ने लालच और विवाद के जहर में डुबोकर उसकी हत्या कर दी। यह घटना न केवल एक प्रेम कहानी का खौफनाक अंत है, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के कारोबार की कड़वी सच्चाई को भी उजागर करती है। पुलिस ने आरोपी तांत्रिक नीलू उर्फ छोटे को गिरफ्तार कर लिया है और घटना का पूरा खुलासा कर दिया है।
घटना की जड़ें अप्रैल 2025 में खोदकर देखी जाएं, जब गुड़िया उर्फ पूनम की शादी दीप सिंह नामक व्यक्ति से हो गई। राजाबाबू और पूनम का रिश्ता बचपन का था, जो गांव की संकुचित गलियों में पनपा था। राजाबाबू के लिए पूनम सिर्फ एक लड़की नहीं, बल्कि जीवन का आधार थी। शादी की खबर सुनते ही वह टूट गया। मानसिक रूप से विचलित राजाबाबू ने प्रेम को वापस पाने के लिए हर संभव रास्ता तलाशा। लेकिन प्रेम जब एकतरफा हो जाता है, तो वह विषैली हो जाता है। इसी विष ने उसे तंत्र-मंत्र की दुनिया की ओर धकेल दिया।
इंडिया टीवी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, राजाबाबू ने स्थानीय स्तर पर कुख्यात तांत्रिक नीलू से संपर्क किया। नीलू, जो खुद को तंत्र विद्या का जानकार बताता था, ने राजाबाबू को आसानी से फंसा लिया। पहली बार तंत्र क्रिया के नाम पर उसने 36,000 रुपये ऐंठे। नीलू ने वादा किया कि यह क्रिया पूनम को राजाबाबू के प्रति आकर्षित कर देगी। कुछ दिनों बाद, जब पूनम अपने पति दीप सिंह से विवाद के बाद मायके लौटी, तो राजाबाबू को लगा कि तंत्र का जादू काम कर गया है। वह खुशी से झूम उठा और नीलू को धन्यवाद दिया। लेकिन यह खुशी क्षणभंगुर साबित हुई। पूनम ने जल्द ही सुलह कर ससुराल लौट ली, जिससे राजाबाबू का विश्वास फिर डगमगा गया।
आज तक की खबर के मुताबिक, निराश राजाबाबू ने नीलू से दोबारा संपर्क किया। इस बार तांत्रिक ने बड़ी क्रिया का लालच दिया। उसने कहा कि पूनम को हमेशा के लिए वश में करने के लिए 6 लाख रुपये लगेंगे। राजाबाबू, जो एक साधारण व्यापारी था, इतनी बड़ी रकम जुटाने में असमर्थ था। लंबी चली बातचीत के बाद नीलू 2 लाख रुपये में मान गया। यह राशि राजाबाबू ने अपनी छोटी सी दुकान और परिवार की जमा-पूंजी से उधार लेकर चुकाई। नीलू ने वादा किया कि 24 नवंबर 2025 को अंतिम तंत्र क्रिया होगी, जिसके बाद पूनम खुद-ब-खुद राजाबाबू के पास आ जाएगी। राजाबाबू के लिए यह आखिरी उम्मीद थी। वह पूरी श्रद्धा से तैयार हो गया।
एनडीटीवी की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि 24 नवंबर की शाम को राजाबाबू अपनी बाइक पर नीलू के साथ औनहा गांव पहुंचा। रास्ते में दोनों ने शराब और मिठाई खरीदी। नीलू ने कहा कि तंत्र क्रिया के लिए सैयद बाबा मजार के पास एक सुनसान खेत आदर्श जगह होगी। दोनों वहां पहुंचे। नीलू ने तांत्रिक सामग्री जैसे काले कपड़े, कुछ जड़ी-बूटियां और मंत्रों की किताब का नाटकीय प्रदर्शन शुरू किया। राजाबाबू, जो शराब के नशे में धुत्त था, ने आंखें बंद कर मंत्रों का जाप सुना। लेकिन नीलू का असली मकसद कुछ और था। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह राजाबाबू से पहले ही 1.5 लाख रुपये ले चुका था और बाकी रकम लूटने की योजना बना रहा था।
शराब के नशे में दोनों के बीच बातचीत बढ़ी। राजाबाबू ने पूछा कि क्रिया कब तक असर करेगी। नीलू ने टालते हुए कहा कि धैर्य रखो। लेकिन नशे की मस्ती में राजाबाबू ने बाकी पैसे चुकाने में देरी का बहाना बनाया। इससे नीलू को गुस्सा आ गया। विवाद इतना भड़का कि हाथापाई हो गई। नीलू, जो शारीरिक रूप से मजबूत था, ने मौका पाकर चाकू निकाला और राजाबाबू के सीने पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। राजाबाबू की आंखें खुलीं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। यह पूरी घटना न्यूज ट्रैक की रिपोर्ट में विस्तार से वर्णित है, जहां पुलिस ने बताया कि हत्या रात करीब 10 बजे हुई।
हत्या के बाद नीलू ने बुद्धिमानी दिखाई, लेकिन अपराध की दुनिया में यह बुद्धि अक्सर उल्टी पड़ जाती है। उसने हत्या को आत्महत्या का रूप देने की साजिश रची। पहले उसने राजाबाबू को बेहोशी की हालत में एक सुसाइड नोट लिखवाया, जिसमें लिखा था: "गुड़िया मेरी जिंदगी है, मैं अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहा हूं।" नोट के साथ पूनम की एक फोटो भी रख दी। फिर चाकू को राजाबाबू के हाथ में थमा दिया और पास में एक ब्लेड फेंक दिया। सबूत मिटाने के लिए उसने राजाबाबू की जेब से मोबाइल फोन और बाकी नकदी लूट ली। लाश को खेत में ही छोड़कर नीलू फरार हो गया। हिंदुस्तान की खबर के अनुसार, अगली सुबह 25 नवंबर को ग्रामीणों ने लाश देखी और पुलिस को सूचना दी।
राजाबाबू के पिता संतराम ने थाने में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि बेटा रविवार शाम को 'पूजा' के लिए निकला था और लौटा नहीं। सुबह खबर मिली तो परिवार टूट गया। शिवली थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय और एएसपी राजेश पांडेय के नेतृत्व में टीम ने सर्विलांस फुटेज, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों की मदद से नीलू तक पहुंच बनाई। अमर उजाला की रिपोर्ट में उल्लेख है कि 30 नवंबर को नीलू को हरदियानाला के पास से धर दबोचा गया। पूछताछ में उसने पूरा कबूलनामा दे दिया। उसके कब्जे से हत्या का चाकू, राजाबाबू की बाइक, लूटा हुआ मोबाइल, 1 लाख रुपये नकद और तांत्रिक सामग्री बरामद हुई। आरोपी को जेल भेज दिया गया।
यह घटना कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र में सनसनी फैला रही है। अरशदपुर गांव में राजाबाबू का परिवार शोक में डूबा है। संतराम ने बताया कि बेटा हमेशा पूनम का जिक्र करता था, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि प्रेम इतना घातक साबित होगा। पूनम का परिवार इस मामले से असंबंधित बताया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हत्या का कारण न तो प्रेम प्रसंग था और न ही कोई पारिवारिक दुश्मनी सिर्फ लालच और विवाद। नीलू पिछले एक साल से राजाबाबू को जानता था और धीरे-धीरे उसके विश्वास को हथियार बनाया।
इस घटना ने समाज के एक काले पहलू को उजागर किया है अंधविश्वास का बाजार। उत्तर प्रदेश में तांत्रिकों का कारोबार फल-फूल रहा है। प्रेम, संतान, व्यापार हर समस्या का हल तंत्र-मंत्र में ढूंढा जा रहा है। लेकिन यह हल जहर बन जाता है। एनडीटीवी की एक विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में हर साल दर्जनों मामले ऐसे सामने आते हैं, जहां तांत्रिकों ने लोगों की जान ली या धोखा दिया। राजाबाबू का मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है। वह एक मेहनती युवक था, जो गांव में गल्ला दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। प्रेम की आग ने उसे अंधा कर दिया, और तांत्रिक का लालच ने अंतिम वार किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने कहा कि अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। गांवों में तांत्रिकों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से समस्या हल हो जाएगी? नहीं। समाज को ही बदलना होगा। माता-पिता को बच्चों को सही मार्गदर्शन देना होगा। प्रेम अस्वीकृत होने पर निराशा स्वाभाविक है, लेकिन तंत्र-मंत्र जैसे रास्ते घातक हैं। राजाबाबू की कहानी एक सबक है प्रेम जीवन देता है, लेकिन अंधविश्वास मौत।
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