अक्षय तृतीया : रामलला के दरबार में विशेष '56 भोग' और सूती वस्त्रों का अर्पण, तो महाकाल में शीतलता के लिए बांधी गई 11 कलशों की जलधारा

अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। अयोध्या के भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर और उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। 19 अप्रैल 2026 को मनाए जा रहे इस पर्व के अवसर पर भक्तों में उत्साह और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है।

Apr 19, 2026 - 11:02
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अक्षय तृतीया : रामलला के दरबार में विशेष '56 भोग' और सूती वस्त्रों का अर्पण, तो महाकाल में शीतलता के लिए बांधी गई 11 कलशों की जलधारा
अक्षय तृतीया : रामलला के दरबार में विशेष '56 भोग' और सूती वस्त्रों का अर्पण, तो महाकाल में शीतलता के लिए बांधी गई 11 कलशों की जलधारा

  • अक्षय तृतीया पर अयोध्या और उज्जैन में आस्था का संगम, श्री राम मंदिर और महाकाल धाम में उमड़े लाखों श्रद्धालु
  • वैशाख मास की पावन तृतीया पर दिव्य दर्शनों का तांता, देश भर से पहुंचे तीर्थयात्रियों ने किया पुण्य और दान का अक्षय संचय

अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह अक्षय तृतीया अत्यंत विशेष मानी जा रही है। रविवार का दिन होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। राम जन्मभूमि मंदिर के कपाट खुलते ही 'जय श्री राम' के उद्घोष से पूरी अयोध्या नगरी गुंजायमान हो उठी। इस अवसर पर रामलला को विशेष रूप से ग्रीष्म ऋतु के अनुकूल सुती वस्त्र धारण कराए गए हैं और उनके श्रृंगार में सुगंधित फूलों का प्रयोग किया गया है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन की विशेष व्यवस्था की है, ताकि हर भक्त को सुगमता से अपने आराध्य के दर्शन प्राप्त हो सकें। सुबह से ही सरयू नदी में स्नान करने के बाद श्रद्धालु हनुमानगढ़ी और फिर राम मंदिर की ओर कूच कर रहे हैं।

राम मंदिर परिसर में इस बार अक्षय तृतीया पर कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। हाल ही में शुरू की गई नई दर्शन प्रणाली के तहत श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के अन्य उप-मंदिरों के दर्शन की अनुमति भी दी जा रही है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और कतारों को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। रामलला को आज के दिन विशेष 56 भोग अर्पित किया गया है, जिसमें सत्तू, ककड़ी और ठंडे फलों का विशेष महत्व रहा है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किए गए दान और दर्शन का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसी भावना के साथ लाखों भक्त सरयू तट से लेकर राम जन्मभूमि पथ तक कतारबद्ध नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में अक्षय तृतीया का पर्व एक अनूठी परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। भगवान महाकाल को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए आज से 'गलंतिका' (जलधारा) की परंपरा शुरू हुई है। ज्योतिर्लिंग के ऊपर 11 मिट्टी के कलश बांधे गए हैं, जिनसे निरंतर जल की धारा बाबा महाकाल पर प्रवाहित हो रही है। यह जलधारा वैशाख और ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी के दौरान भगवान को शीतलता प्रदान करने का प्रतीक मानी जाती है। अलसुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे, जिससे मंदिर का प्रांगण पूरी तरह से भरा हुआ नजर आया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से अभिषेक का पुण्य लाभ लिया।

अक्षय तृतीया का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। इसी दिन भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ था और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी इसी समय के आसपास खुलते हैं। इस दिन किया गया जप, तप और दान अक्षय रहता है, जिसके कारण इसे 'अबूझ मुहूर्त' भी कहा जाता है। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के बाद नियमित दर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहने की उम्मीद है। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चलित पंखे, कूलर और ठंडे पानी की व्यापक व्यवस्था की है। अक्षय तृतीया से शुरू हुई जलधारा की यह परंपरा आगामी दो महीनों तक अनवरत जारी रहेगी। पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच इन कलशों की स्थापना की गई, जिसमें गंगाजल और अन्य पवित्र नदियों का जल मिश्रित किया गया है। भक्तों के लिए महाकाल लोक से लेकर गर्भगृह के पास तक सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के भगवान के दर्शन कर सकें।

अयोध्या और उज्जैन के अलावा अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा गया है। अयोध्या में लगभग 5000 छोटे-बड़े मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। गजकेसरी और त्रिपुष्कर योग के दुर्लभ संयोग ने इस बार की अक्षय तृतीया को ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन के साथ-साथ सोना खरीदने और दान-पुण्य करने की परंपरा का भी निर्वहन किया। सरयू और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों के घाटों पर सुबह से ही स्नानार्थियों की भीड़ रही। प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और गोताखोरों की टीम को तैनात रखा गया है। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह दिन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। अयोध्या में राम जन्मभूमि पथ और भक्ति पथ पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें यह सिद्ध कर रही हैं कि राम मंदिर के प्रति लोगों की आस्था अटूट है। उज्जैन में भी होटलों और धर्मशालाओं में कहीं भी जगह शेष नहीं है। दोनों शहरों के प्रशासनिक अधिकारियों ने समन्वय बनाकर यातायात और पार्किंग की व्यवस्था को संभाला है, ताकि बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहनों के कारण शहर की व्यवस्था प्रभावित न हो। भीषण गर्मी को देखते हुए सड़कों पर भी टेंट और पेयजल की व्यवस्था की गई है।

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