इस्लामाबाद शांति वार्ता 2026: ईरान और अमेरिका के बीच सोमवार को शुरू हो सकता है दूसरे दौर का संवाद, पाकिस्तान में बढ़ी कूटनीतिक हलचल।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और 39 दिनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक पहल के रूप में, ईरान

Apr 18, 2026 - 15:50
 0  1
इस्लामाबाद शांति वार्ता 2026: ईरान और अमेरिका के बीच सोमवार को शुरू हो सकता है दूसरे दौर का संवाद, पाकिस्तान में बढ़ी कूटनीतिक हलचल।
इस्लामाबाद शांति वार्ता 2026: ईरान और अमेरिका के बीच सोमवार को शुरू हो सकता है दूसरे दौर का संवाद, पाकिस्तान में बढ़ी कूटनीतिक हलचल।
  • पेंटागन की चुप्पी और तेहरान की तैयारी: पाकिस्तान पहुंचेगा ईरानी प्रतिनिधिमंडल, खाड़ी युद्ध की समाप्ति और परमाणु कार्यक्रम पर निर्णायक चर्चा की उम्मीद।
  • इस्लामाबाद में ऐतिहासिक शांति समझौते की जमीन तैयार: यदि वार्ता सफल रही तो पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और 39 दिनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक पहल के रूप में, ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की सीधी बातचीत सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने की प्रबल संभावना है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह के अंत तक इस्लामाबाद पहुंच सकता है ताकि बातचीत के अगले चरण की रूपरेखा तय की जा सके। हालांकि, वाशिंगटन की ओर से आधिकारिक तौर पर इस बैठक की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही सक्रियता एक बड़े घटनाक्रम की ओर इशारा कर रही है। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसने दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को एक ही मेज पर लाने के लिए 'हर संभव प्रयास' करने का वादा किया है।

इस संभावित बातचीत की पृष्ठभूमि 11-12 अप्रैल को हुए पहले दौर की वार्ता से जुड़ी है, जो ऐतिहासिक होने के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। उस समय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने किया था, जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व उनके संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने किया था। लगभग 21 घंटों तक चली मैराथन चर्चा के बाद दोनों पक्ष बिना किसी समझौते के लौट गए थे। तब अमेरिकी पक्ष ने ईरान द्वारा परमाणु हथियारों को लेकर दीर्घकालिक प्रतिबद्धता न देने को मुख्य बाधा बताया था, जबकि ईरान ने अपनी संप्रभुता और प्रतिबंधों को हटाने की मांग पर कड़ा रुख अपनाया था। अब दूसरे दौर की बातचीत का उद्देश्य उन्हीं मतभेदों को कम करना और एक स्थायी शांति समझौते की नींव रखना है। कूटनीतिक प्रयासों को गति देने के लिए पाकिस्तान के सैन्य और नागरिक नेतृत्व ने पिछले कुछ दिनों में असाधारण सक्रियता दिखाई है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया, जहां उन्होंने ईरानी नेतृत्व के साथ बंद कमरे में विस्तृत चर्चा की। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ संवाद कर इस शांति पहल के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने का प्रयास किया है। इस्लामाबाद इस बात को लेकर आशान्वित है कि इस बार परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर कोई बीच का रास्ता निकाला जा सकता है, जो न केवल इन दो देशों बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी राहत भरा होगा।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि यदि इस्लामाबाद में शांति समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो वे स्वयं पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान लगभग सभी शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार है। यदि यह समझौता होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से मुक्त करने और वैश्विक तेल कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है।

दूसरे दौर की इस वार्ता के मुख्य एजेंडे में परमाणु कार्यक्रम के अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील शामिल है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे और अपनी परमाणु सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए खोल दे। इसके विपरीत, तेहरान अपनी संपत्तियों को फ्रीज मुक्त कराने और सभी प्राथमिक एवं द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही, ईरान भविष्य में किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के खिलाफ ठोस सुरक्षा गारंटी की भी मांग कर रहा है। इन दोनों छोरों के बीच संतुलन बनाना मध्यस्थों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि दोनों ही देशों के घरेलू राजनीतिक समीकरण किसी भी 'कमजोर' समझौते के खिलाफ हैं। शांति वार्ता की सफलता का सीधा असर इजरायल और लेबनान की सीमाओं पर जारी संघर्ष पर भी पड़ने की उम्मीद है। मौजूदा युद्ध के कारण इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। हाल ही में दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसे अब एक स्थायी शांति संधि में बदलने की कोशिश की जा रही है। यदि सोमवार की बातचीत सकारात्मक रहती है, तो यह दशकों बाद अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित होगा। पाकिस्तान ने इस वार्ता के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पूरी दुनिया की निगाहें अब इस्लामाबाद के 'डिप्लोमैटिक एन्क्लेव' पर टिकी हैं।

Also Read- ट्रंप के 'मैसेंजर' बने आसिम मुनीर: अमेरिका का विशेष प्रस्ताव लेकर तेहरान पहुंचे, मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow