नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड इंजीनियर आदित्य आनंद गिरफ्तार: एक लाख का इनामी साजिशकर्ता तमिलनाडु के रेलवे स्टेशन से दबोचा
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में 13 अप्रैल को हुई भीषण हिंसा के मामले में जांच एजेंसियों को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बेहद सटीक और साहसिक अभियान चलाते हुए हिंसा के दूसरे मुख्य साजिशकर्ता, इंजीनियर आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है।
- विदेश भागने की फिराक में था हिंसा का आरोपी इंजीनियर: एसटीएफ और पुलिस ने तिरुचिरापल्ली में बिछाया जाल, सटीक ट्रैकिंग से मिली कामयाबी
- श्रमिकों को भड़काने और अशांति फैलाने के आरोपी पर कसा शिकंजा: पहचान छिपाकर दक्षिण भारत में छिपा था आदित्य, अब होगा बड़ा खुलासा
नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर भड़की हिंसा के पीछे की गहरी साजिश की परतों को हटाने के लिए पुलिस की टीमें दिन-रात काम कर रही थीं। इसी कड़ी में शनिवार को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब एक लाख रुपये के इनामी बदमाश और पेशे से इंजीनियर आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। आदित्य 13 अप्रैल की घटना के बाद से ही फरार चल रहा था और पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए उसने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया था। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा चुका था। उत्तर प्रदेश एसटीएफ और नोएडा पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी का पीछा किया और उसे उस समय धर दबोचा जब वह केरल भागने की तैयारी में था। पुलिस अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा ला रही है, ताकि आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। गिरफ्तारी के समय आदित्य आनंद ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हर संभव प्रयास किया था। वह पुलिस को चकमा देने के लिए टोपी लगाकर और टी-शर्ट के ऊपर शर्ट पहनकर अपनी कद-काठी और हुलिया बदलने की कोशिश कर रहा था। पुलिस की सघन ट्रैकिंग से पता चला है कि वह दिल्ली से ट्रेन के जरिए तमिलनाडु पहुंचा था और वहां के विभिन्न हिस्सों में छिपकर रह रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसकी योजना तमिलनाडु से केरल जाने की थी, जहां से वह समुद्र के रास्ते देश छोड़कर विदेश भागने की फिराक में था। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी ने उसके इन मंसूबों पर पानी फेर दिया। शनिवार को जैसे ही उसकी टावर लोकेशन तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास मिली, पुलिस ने तुरंत वहां घेराबंदी की और उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
हिंसा का संगठित नेटवर्क
नोएडा पुलिस की अब तक की जांच से संकेत मिलते हैं कि यह हिंसा अचानक हुआ कोई प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। आदित्य आनंद और उसके सहयोगियों ने सोशल मीडिया और गुप्त बैठकों के जरिए श्रमिकों को उकसाया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस अशांति के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट या बाहरी फंडिंग काम कर रही थी।
आरोपी आदित्य आनंद का पृष्ठभूमि विवरण चौंकाने वाला है। मूल रूप से बिहार के गोपालगंज का रहने वाला आदित्य एक उच्च शिक्षित युवक है, जिसने एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक की डिग्री हासिल की है। वह 31 मार्च को नोएडा आया था और सेक्टर 37 में एक किराए का कमरा लेकर रहने लगा था। 10 और 11 अप्रैल को उसने नोएडा के फेज-2 इलाके में मुख्य साजिशकर्ता रूपेश राय के साथ मिलकर कई श्रमिक प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जब प्रशासन और प्रबंधन ने वेतन बढ़ोतरी की मांग स्वीकार कर ली थी, उसके बाद भी आदित्य और उसके साथियों ने श्रमिकों को शांत होने के बजाय हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाया। शिक्षित होने के बावजूद उसने अपनी क्षमताओं का उपयोग शहर की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया। नोएडा पुलिस इस मामले में पहले ही बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। इससे पहले मुख्य साजिशकर्ता रूपेश राय को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हिंसा से संबंधित कुल 13 विभिन्न मामलों में पुलिस ने अब तक कुल 1140 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 70 लोग वे हैं जो सीधे तौर पर आगजनी और तोड़फोड़ जैसी उग्र गतिविधियों में शामिल थे। आदित्य आनंद की गिरफ्तारी इस श्रृंखला में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। पुलिस अब उन लोगों की भी पहचान करने में जुटी है जिन्होंने आदित्य को नोएडा से भागने, दिल्ली में शरण लेने और फिर दक्षिण भारत तक पहुंचने में आर्थिक या अन्य सहायता प्रदान की थी। विदेश भगाने में मदद करने वाले संदिग्धों के खिलाफ भी पुलिस जल्द ही कार्रवाई कर सकती है।
हिंसा के पीछे के असल मकसद को जानने के लिए पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाल रही है। आदित्य और रूपेश राय के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों को संदेह है कि इस बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के पीछे कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व या प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक हितों का हाथ हो सकता है, जो नोएडा की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करना चाहते थे। देश और विदेश से होने वाली संदिग्ध फंडिंग की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता। पुलिस जल्द ही कोर्ट से आरोपियों की रिमांड मांगेगी ताकि आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सके और हिंसा के मास्टरमाइंडों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। नोएडा पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रमिक हितों की आड़ में कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और शहर की शांति भंग करना जघन्य अपराध है। फरार चल रहे अन्य छोटे और बड़े आरोपितों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति अपराधियों को शरण देगा, वह भी समान रूप से दोषी माना जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता सामने आने की उम्मीद है, क्योंकि जांच का दायरा अब नोएडा से बाहर निकलकर अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है।
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