भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों में नए युग का सूत्रपात: राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में राष्ट्रपति ली जे म्युंग का भव्य औपचारिक स्वागत।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से, दक्षिण कोरिया
- कूटनीतिक भागीदारी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर मंथन: प्रधानमंत्री मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के बीच रक्षा व तकनीक पर द्विपक्षीय वार्ता
- आठ वर्षों बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रप्रमुख का भारत आगमन: दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी ने की अगवानी, रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई धार
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और प्रथम महिला किम ही क्यूंग तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे। सोमवार की सुबह राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक प्रांगण (फोरकोर्ट) में उनका भव्य और औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी अगवानी की। राष्ट्रपति भवन का प्रांगण तिरंगे और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय ध्वज से सजे छोटे-छोटे बच्चों के उत्साह और पारंपरिक बैंड की धुन से गूंज उठा। यह यात्रा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले आठ वर्षों में यह किसी भी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की पहली भारत यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होती विशेष रणनीतिक साझेदारी का जीवंत प्रमाण है। औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान राष्ट्रपति ली जे म्युंग को 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया, जिसके बाद उन्होंने और प्रथम महिला ने भारतीय नेतृत्व के साथ संक्षिप्त शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और अधिकारी भी मौजूद रहे। समारोह के दृश्य भारत की 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा को जीवंत कर रहे थे, जहां पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों के नारे लगाए। राष्ट्रपति भवन से रवाना होने के बाद, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का अगला पड़ाव राजघाट रहा, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह प्रतीकात्मक कदम दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और शांति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस राजकीय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच हैदराबाद हाउस में होने वाली द्विपक्षीय शिखर वार्ता है। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग), सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने अपनी यात्रा के शुरुआती चरण में ही स्पष्ट कर दिया था कि वे भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला के एक प्रमुख केंद्र के रूप में देखते हैं। भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल और दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता का मिलन वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया संतुलन पैदा करने की क्षमता रखता है। भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को साल 2015 में 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर उन्नत किया गया था। इस यात्रा के दौरान दोनों देश व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा कर सकते हैं, ताकि द्विपक्षीय व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके और भारतीय उत्पादों के लिए कोरियाई बाजार में अधिक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। कूटनीतिक स्तर पर देखा जाए तो यह दौरा दक्षिण एशिया में दक्षिण कोरिया की बढ़ती सक्रियता का संकेत है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारतीय समुदाय के साथ बातचीत में भारत-कोरिया शिखर सम्मेलन को संबंधों के लिए एक 'टर्निंग पॉइंट' करार दिया है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी बड़ी उम्मीदें जताई जा रही हैं, विशेष रूप से रक्षा विनिर्माण और हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के क्षेत्र में। दक्षिण कोरियाई कंपनियां भारत में अपने निवेश को विस्तार देने के लिए उत्सुक हैं, और करीब 200 व्यापारिक प्रतिनिधियों का उनके साथ आना यह दर्शाता है कि निजी क्षेत्र भी इस साझेदारी को लेकर बेहद उत्साहित है। दोनों देशों के नेताओं द्वारा जारी किए जाने वाले संयुक्त बयान में क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को लेकर भी साझा विजन सामने आ सकता है।
सांस्कृतिक रूप से भी यह यात्रा दोनों देशों के बीच के सेतु को मजबूत करने वाली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के सम्मान में एक राजकीय भोज (स्टेट बैंक्वेट) का आयोजन किया जाएगा। ऐतिहासिक रूप से भारत और कोरिया के संबंध अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरियाई राजा किम सुरो की कथा से जुड़े हैं, और वर्तमान नेतृत्व इस विरासत को आधुनिक तकनीक और आर्थिक प्रगति के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहता है। दोनों देशों के बीच न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि 'पीपल-टू-पीपल' यानी जन-जन के स्तर पर भी संपर्क बढ़ाने के लिए नए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों की घोषणा होने की संभावना है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भर में नई तकनीक और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश तेज है। भारत का विशाल बाजार और दक्षिण कोरिया की नवाचार शक्ति मिलकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। दिल्ली के विभिन्न चौराहों पर लगे स्वागत बोर्ड और दोनों देशों के झंडे इस नई दोस्ती की गर्माहट को महसूस करा रहे हैं। मंगलवार को अपनी रवानगी से पहले, राष्ट्रपति ली भारत मंडपम में एक बिजनेस फोरम को भी संबोधित करेंगे, जहां वे भारतीय उद्योगपतियों को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर काम करने के नए अवसरों के बारे में जानकारी देंगे।
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