रायचूर में सांस्कृतिक उत्सव बना काल: नाटक के दौरान मेहराब गिरने से दो मासूमों की मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल

कर्नाटक के रायचूर जिले में एक सांस्कृतिक आयोजन के दौरान घटी हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। मानवी तालुक के बैल मरचड गांव में शनिवार की रात एक लोक नाटक (बयालता) के मंचन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में दो मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। खुशियों और उत्सव का माहौल पल भर में चीख-पुकार और मातम में बदल गया।

Apr 19, 2026 - 11:18
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रायचूर में सांस्कृतिक उत्सव बना काल: नाटक के दौरान मेहराब गिरने से दो मासूमों की मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल
रायचूर में सांस्कृतिक उत्सव बना काल: नाटक के दौरान मेहराब गिरने से दो मासूमों की मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल
  • मानवी तालुक के बैल मरचड गांव में दुखद हादसा: खुले मंच पर नाटक देख रहे दर्शकों पर गिरा सीमेंट का भारी ढांचा
  • कर्नाटक में उत्सव के दौरान मची भगदड़: जर्जर मेहराब गिरने से मासूमों ने तोड़ा दम, अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे घायल

कर्नाटक के रायचूर जिले के अंतर्गत आने वाले मानवी तालुक के बैल मरचड गांव में शुक्रवार की देर रात एक दुखद हादसा पेश आया। ग्रामीण परंपरा के अनुसार गांव में 'देवी नाटक' (बयालता) का आयोजन किया गया था, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग एकत्र हुए थे। रात लगभग 11:30 बजे, जब नाटक का मंचन अपने पूरे उफान पर था और दर्शक मंत्रमुग्ध होकर कला का आनंद ले रहे थे, तभी सामुदायिक भवन के प्रवेश द्वार पर बना एक भारी सीमेंट का मेहराब (आर्क) अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। यह मेहराब सीधे उन दर्शकों पर गिरा जो उसके ठीक नीचे जमीन पर बैठकर नाटक देख रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक हुए इस हादसे ने किसी को संभलने का मौका तक नहीं दिया और वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस भयानक हादसे में दो बच्चों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान 9 वर्षीय विश्वनाथ रामलिंगा नायक और 2 वर्षीय मासूम सान्विता पेद्दैया नायक के रूप में हुई है। विश्वनाथ मानवी तालुक के कुर्दी गांव का निवासी था, जबकि छोटी सान्विता सिरवार तालुक के वडावत्ती गांव से अपने परिवार के साथ नाटक देखने आई थी। जैसे ही सीमेंट का भारी-भरकम हिस्सा इन बच्चों पर गिरा, वहां मौजूद लोग उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और जर्जर इमारतों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है।

हादसे का संभावित कारण

प्रारंभिक जांच और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात क्षेत्र में तेज हवाएं चल रही थीं और गरज के साथ बिजली कड़क रही थी। माना जा रहा है कि खराब मौसम और तेज आंधी के दबाव को जर्जर हो चुका सीमेंट का मेहराब बर्दाश्त नहीं कर सका और अचानक ढह गया।

हादसे में केवल जान का नुकसान ही नहीं हुआ, बल्कि कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। घायलों में सान्विता की मां विशालाक्षी (25) के अलावा बसम्मा (45), लक्ष्मी (18), यल्लम्मा (3) और शैलजा शामिल हैं। मलबे के नीचे दबने से कुछ महिलाओं को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें से एक महिला का पैर बुरी तरह कुचल गया है। घायलों को तत्काल एम्बुलेंस और निजी वाहनों की मदद से रायचूर के स्थानीय अस्पताल और रायचूर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखा गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना मिलते ही मानवी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने का कार्य शुरू किया। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि यह एक 'अप्राकृतिक मृत्यु' (UDR) का मामला दर्ज किया गया है। विश्वनाथ के पिता रामलिंगा वेंकटेश नायक की शिकायत पर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या सामुदायिक भवन के इस ढांचे के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था या फिर इसकी मरम्मत में लापरवाही बरती गई थी।

ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सामुदायिक भवन के उस मेहराब की स्थिति काफी समय से जर्जर थी, लेकिन प्रशासन या आयोजन समिति ने इसकी सुध नहीं ली। नाटक के मंचन के लिए बड़ी भीड़ जुटने की उम्मीद थी, ऐसे में सुरक्षा ऑडिट न किया जाना एक बड़ी चूक मानी जा रही है। खुले मंच पर होने वाले इन आयोजनों में अक्सर हजारों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए वहां कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। लोगों की मांग है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। इस त्रासदी ने कर्नाटक के ग्रामीण अंचलों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रायचूर जिला प्रशासन ने अब जिले के सभी सार्वजनिक भवनों और सामुदायिक केंद्रों की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। विशेष रूप से मानसून से पहले पुराने ढांचों की मजबूती की जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है। घायलों के परिजनों को सांत्वना देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है और स्थानीय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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