पहले वाट्सएप पर सुसाइड का स्टेटस लगाया, फिर फंदे पर लटकी सिपाही, अलीगढ़ में हेमलता की जिंदगी का दर्दनाक अंत, पिता ने उठाए संदिग्ध मौत के सवाल। 

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक महिला सिपाही की मौत ने न केवल पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है, बल्कि समाज में व्याप्त मानसिक

Dec 1, 2025 - 12:14
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पहले वाट्सएप पर सुसाइड का स्टेटस लगाया, फिर फंदे पर लटकी सिपाही, अलीगढ़ में हेमलता की जिंदगी का दर्दनाक अंत, पिता ने उठाए संदिग्ध मौत के सवाल। 
पहले वाट्सएप पर सुसाइड का स्टेटस लगाया, फिर फंदे पर लटकी सिपाही, अलीगढ़ में हेमलता की जिंदगी का दर्दनाक अंत, पिता ने उठाए संदिग्ध मौत के सवाल। 

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक महिला सिपाही की मौत ने न केवल पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है, बल्कि समाज में व्याप्त मानसिक तनाव और अकेलेपन की कड़वी सच्चाई को भी सामने ला दिया। रोरावर थाने में तैनात 28 वर्षीय कांस्टेबल हेमलता चाहर ने अपने किराए के मकान में फंदा लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली। मौत से ठीक पहले व्हाट्सएप स्टेटस पर उन्होंने लिखा, "मेरी वजह से किसी को परेशानी न हो" एक ऐसा संदेश जो उनके अंतिम क्षणों की पीड़ा को बयां करता है। पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला मान लिया है, लेकिन मृतका के पिता कर्मवीर सिंह ने इसे संदिग्ध बताते हुए गहन जांच की मांग की है।

घटना 29 नवंबर 2025 की है, जब हेमलता ने रोरावर थाने में ड्यूटी पूरी कर शाम को अपने किराए के मकान में लौटीं। टीवी9 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, हेमलता मूल रूप से आगरा जिले के किरावली थाना क्षेत्र के बैमन गांव की रहने वाली थीं। 2016 बैच की यह अविवाहित सिपाही लंबे समय से अलीगढ़ में तैनात थीं। रोरावर थाने से पहले वे बन्नादेवी थाने में करीब ढाई वर्ष और महिला थाने में भी इतने ही समय तक सेवा दे चुकी थीं। जवाहर नगर कॉलोनी में रिटायर्ड दारोगा नरेंद्र सिंह विश्नोई के दो मंजिला मकान के प्रथम तल पर किराए का एक कमरा लेकर वे अकेली रहती थीं। थाने से उनका मकान मात्र एक किलोमीटर दूर था, जो उनकी सुविधा के लिए चुना गया था।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक, हेमलता का परिवार आगरा में रहता था। पिता कर्मवीर सिंह एक साधारण किसान हैं, जबकि भाई-बहन भी घर-परिवार संभालते हैं। हेमलता परिवार की इकलौती पुत्री थीं और उनकी शादी की बात चल रही थी। स्वजन रिश्ते तलाश रहे थे, और हेमलता खुद इस वर्ष विवाह की इच्छा जता चुकी थीं। लेकिन पुलिस की नौकरी के दबाव और अकेले रहने की मजबूरी ने शायद उनके मन को कमजोर कर दिया। मालवा अभी तक की रिपोर्ट में उल्लेख है कि हेमलता का स्वभाव हंसमुख था। वे सहकर्मियों के बीच लोकप्रिय थीं और गांव वालों के लिए प्रेरणा स्रोत। लेकिन अंदर ही अंदर चल रही जद्दोजहद किसी को पता न चली।

30 नवंबर की सुबह, जब हेमलता थाने नहीं पहुंचीं, तो चिंता बढ़ गई। इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने रात में ही फोन पर एक दिन की इमरजेंसी छुट्टी मांगी थी, जो स्वीकृत हो गई। लेकिन दोपहर तक जब वे आमद (उपस्थिति) दर्ज नहीं कराईं, तो सहकर्मी सिपाही ने उनका व्हाट्सएप चेक किया। वहां का स्टेटस देखकर खलबली मच गई। स्टेटस में लिखा था: "मेरी वजह से किसी को परेशानी न हो।" सहकर्मी ने तुरंत रोरावर थाने को सूचना दी। बन्नादेवी थाने की टीम घर पहुंची, लेकिन मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों की मदद से छत के रास्ते अंदर घुसने पर भयावह दृश्य दिखा आंगन के जाल पर लोहे की रस्सी से बने फंदे पर हेमलता लटकी हुई थीं। शव को उतारकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने तत्काल फॉरेंसिक टीम बुलाई। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया है कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन व्हाट्सएप स्टेटस को ही अंतिम संदेश माना जा रहा है। सीओ द्वितीय कमलेश कुमार ने बताया कि हेमलता के मोबाइल की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) खंगाली जा रही है। पड़ोसियों ने पूछताछ में बताया कि शुक्रवार रात को एक युवक पुलिस की बाइक पर आया था और सुबह चला गया। इसकी पहचान के लिए सर्विलांस कैमरे खंगाले जा रहे हैं। डीएसपी कमलेश सिंह ने कहा कि फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य संग्रहित किए हैं, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। फिलहाल, यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच हो रही है।

मृतका के पिता कर्मवीर सिंह का दर्द छलक पड़ा। टीवी9 हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, "रात को ही फोन पर बात हुई थी। वह खुश लग रही थी। मेरी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती। कुछ तो गड़बड़ है।" उन्होंने मौत को संदिग्ध बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। मालवा अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार, कर्मवीर ने एसएसपी अलीगढ़ को पत्र लिखा है, जिसमें युवक की पहचान और हेमलता के मानसिक तनाव के कारणों की पड़ताल की बात कही गई है। परिवार आगरा से अलीगढ़ पहुंचा और शव का अंतिम संस्कार किया। बहन ने बताया कि हेमलता अक्सर काम के दबाव की शिकायत करती थीं, लेकिन कभी इतना गंभीर नहीं लगीं।

यह घटना पुलिस विभाग में महिलाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर रही है। हिंदुस्तान की एक विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में महिलाओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन उनके लिए मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं। लंबी ड्यूटी, अकेलापन और सामाजिक दबाव उन्हें तोड़ देते हैं। हेमलता के मामले में भी यही दिखा। वे अकेली रहती थीं, और शादी का दबाव ऊपर से था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पिछले दो वर्षों में कम से कम 15 महिला पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या की है, जिनमें अधिकांश तनाव का शिकार थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि विभाग को काउंसलिंग सेंटर बढ़ाने और रेगुलर चेकअप की जरूरत है।

अलीगढ़ के रोरावर थाने में शोक की लहर है। सहकर्मी हेमलता को याद कर आंसू बहा रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हेमलता हमेशा ड्यूटी पर समय से पहुंचती थीं और अपराधियों से निडर होकर निपटती थीं। बन्नादेवी क्षेत्र में उनकी किराए की जगह सुरक्षित मानी जाती थी, लेकिन अंततः यह उनकी अंतिम सांसों का साक्षी बनी। पुलिस ने मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया है, लेकिन मर्ग जांच चल रही है। एसएसपी संजीव सुमन ने कहा कि यदि संदेह के कोई सबूत मिले, तो हत्या का केस दर्ज होगा।

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