क्या आपकी सुबह की कॉफी शुद्ध है? किचन में मौजूद 'कैफीन' के असली या मिलावटी होने की ऐसे करें पहचान।

दुनिया भर में पानी के बाद सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ अगर कोई है, तो वह कॉफी है। भारत में भी पिछले कुछ दशकों में 'कॉफी

Apr 21, 2026 - 16:28
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क्या आपकी सुबह की कॉफी शुद्ध है? किचन में मौजूद 'कैफीन' के असली या मिलावटी होने की ऐसे करें पहचान।
क्या आपकी सुबह की कॉफी शुद्ध है? किचन में मौजूद 'कैफीन' के असली या मिलावटी होने की ऐसे करें पहचान।
  • स्वाद के नाम पर कहीं जहर तो नहीं पी रहे आप? कॉफी में इमली के बीज और चिकोरी की मिलावट का बढ़ रहा है काला कारोबार
  • सेहत से खिलवाड़: असली और नकली कॉफी के बीच फर्क करने के आसान घरेलू तरीके, FSSAI की गाइडलाइंस से समझें शुद्धता का पैमाना

दुनिया भर में पानी के बाद सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ अगर कोई है, तो वह कॉफी है। भारत में भी पिछले कुछ दशकों में 'कॉफी कल्चर' तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस बढ़ती मांग के साथ ही बाजार में मिलावटखोरी का जाल भी फैलता जा रहा है। आप जो प्रीमियम पैकेजिंग वाली कॉफी बड़े चाव से खरीदकर लाते हैं, जरूरी नहीं कि वह सौ फीसदी शुद्ध कॉफी बीन्स से ही बनी हो। मिलावटखोर मुनाफा कमाने के लिए कॉफी पाउडर में भुनी हुई खजूर की गुठली, इमली के बीज का पाउडर और चिकोरी जैसे पदार्थों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह मिलावट न केवल कॉफी के स्वाद और सुगंध को प्रभावित करती है, बल्कि लंबे समय तक इसके सेवन से पाचन तंत्र और हृदय स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कॉफी में मिलावट का सबसे आम तरीका 'चिकोरी' का उपयोग है। चिकोरी एक पौधे की जड़ होती है, जिसे भूनकर पाउडर बनाया जाता है और यह दिखने में बिल्कुल कॉफी जैसा होता है। हालांकि, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के अनुसार, कॉफी-चिकोरी मिश्रण बेचना वैध है, बशर्ते पैकेट पर इसकी मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी हो। समस्या तब उत्पन्न होती है जब शुद्ध कॉफी के नाम पर बेचे जाने वाले उत्पाद में चोरी-छिपे भारी मात्रा में चिकोरी या अन्य सड़े हुए अनाज का पाउडर मिला दिया जाता है। शुद्ध कॉफी कैफीन से भरपूर होती है जो मस्तिष्क को सतर्क करती है, जबकि मिलावटी कॉफी आपको केवल सुस्ती और पेट में भारीपन का अहसास कराती है।

यदि आप घर पर अपनी कॉफी की शुद्धता की जांच करना चाहते हैं, तो 'वॉटर टेस्ट' सबसे सरल और प्रभावी तरीका है। एक पारदर्शी कांच के गिलास में साधारण पानी भरें और उसके ऊपर एक चम्मच कॉफी पाउडर छिड़कें। शुद्ध कॉफी पाउडर पानी की सतह पर कुछ देर तक तैरता रहेगा और बहुत धीरे-धीरे नीचे जाएगा। इसके विपरीत, यदि कॉफी में चिकोरी या इमली के बीज का पाउडर मिला हुआ है, तो वह पानी के संपर्क में आते ही तेजी से नीचे बैठने लगेगा और पानी का रंग गहरा भूरा या लाल होने लगेगा। चिकोरी पानी को तुरंत सोख लेती है और भारी होने के कारण गिलास की तली में जमा हो जाती है, जबकि शुद्ध कॉफी के कण तैलीय होने के कारण सतह पर टिके रहते हैं। गंध और बनावट के माध्यम से भी असली कॉफी की पहचान की जा सकती है। शुद्ध कॉफी पाउडर छूने में थोड़ा दानेदार और रूखा महसूस होता है। यदि पाउडर को उंगलियों के बीच दबाने पर वह केक या ठोस गांठ की तरह बन जाए, तो समझ लीजिए कि इसमें नमी या अन्य पाउडर की मिलावट की गई है। असली कॉफी की सुगंध बहुत ही तीखी और मनमोहक होती है जो डिब्बा खोलते ही पूरे कमरे में फैल जाती है। मिलावटी कॉफी में अक्सर मिट्टी जैसी गंध आती है या फिर सुगंध को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए रसायनों का प्रयोग किया जाता है। यदि कॉफी बनाने के बाद उसमें प्राकृतिक झाग (क्रीमा) नहीं बन रहा है, तो इसकी शुद्धता संदिग्ध हो सकती है।

क्यों खतरनाक है मिलावट?

कॉफी में मिलाए जाने वाले इमली के बीज या भुने हुए अनाज के पाउडर में कभी-कभी हानिकारक फंगस (Aflatoxins) हो सकते हैं। चिकोरी का अत्यधिक सेवन गर्भवती महिलाओं और पित्त की पथरी से जूझ रहे लोगों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसके अलावा, कृत्रिम रंग जो कॉफी को गहरा दिखाने के लिए मिलाए जाते हैं, वे सीधे तौर पर किडनी को क्षति पहुंचा सकते हैं।

एक अन्य वैज्ञानिक तरीका 'आयोडीन टेस्ट' है, जिसका उपयोग स्टार्च की मिलावट पकड़ने के लिए किया जाता है। कॉफी में अक्सर वजन बढ़ाने के लिए भुने हुए चावल या बाजरे का पाउडर मिला दिया जाता है। इसे जांचने के लिए थोड़ी सी कॉफी को पानी में उबालें और ठंडा होने पर उसमें दो बूंद टिंचर आयोडीन डालें। यदि घोल का रंग नीला हो जाता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आपकी कॉफी में स्टार्च या अनाज की मिलावट है। शुद्ध कॉफी आयोडीन के साथ प्रतिक्रिया करके नीला रंग नहीं देती है। यह परीक्षण उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है जो बाजार से खुला हुआ कॉफी पाउडर खरीदना पसंद करते हैं। बाजार में उपलब्ध इंस्टेंट कॉफी और फिल्टर कॉफी के बीच के अंतर को समझना भी शुद्धता की दिशा में एक कदम है। इंस्टेंट कॉफी पहले से ही प्रोसेस्ड होती है, इसलिए इसमें मिलावट की गुंजाइश अधिक रहती है। जानकारों का सुझाव है कि यदि संभव हो, तो कॉफी बीन्स (साबुत दाने) खरीदें और उन्हें घर पर या स्टोर पर अपनी आंखों के सामने पिसवाएं। साबुत बीन्स में मिलावट करना लगभग नामुमकिन होता है क्योंकि कॉफी बीन्स का अपना एक विशिष्ट आकार और चमक होती है। हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी समय लेने वाली हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य और स्वाद के साथ समझौता न करने वालों के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प है।

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