मध्य प्रदेश में शार्प मोड़ वाले पुलों की जांच के आदेश, तीन दिन में मांगी गई इंजीनियरों की रिपोर्ट।
Madhya Pradesh News: सड़कों और पुलों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सख्त कदम उठाया है। विभाग ने प्रदेश के सभी शार्प मोड़....
मध्य प्रदेश में सड़कों और पुलों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सख्त कदम उठाया है। विभाग ने प्रदेश के सभी शार्प मोड़ वाले पुलों, फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) और एलिवेटेड कॉरिडोर की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। यह फैसला भोपाल और इंदौर में 90 डिग्री मोड़ वाले पुलों की डिजाइन पर उठे विवादों के बाद लिया गया है। पीडब्ल्यूडी ने सभी चीफ इंजीनियरों, अधीक्षक इंजीनियरों और कार्यपालन इंजीनियरों को तीन दिन के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। इस कदम का मकसद भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकना और निर्माण में तकनीकी खामियों को दूर करना है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज और इंदौर में सर्पाकार फ्लाईओवर की डिजाइन में खामियों की खबरें सामने आने के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। भोपाल के ऐशबाग में बने रेलवे ओवरब्रिज में 90 डिग्री का तीखा मोड़ लोगों की आलोचना का विषय बना। इसकी डिजाइन को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक उड़ा और इसे असुरक्षित बताया गया। रेलवे ने पहले ही इस डिजाइन पर आपत्ति जताई थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने जगह की कमी का हवाला देकर इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए सात इंजीनियरों को निलंबित कर दिया और एक रिटायर्ड इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए। निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
इंदौर में भी एक फ्लाईओवर के तीखे मोड़ को लेकर सवाल उठे। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इस मामले में पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। इन घटनाओं ने पूरे प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने सभी शार्प मोड़ वाले निर्माणों की जांच का फैसला लिया।
पीडब्ल्यूडी ने अपने आदेश में साफ किया है कि जांच में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
पुलों, फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज और एलिवेटेड कॉरिडोर में तीखे मोड़ की स्थिति।
वाहनों की गति के अनुसार टर्निंग रेडियस और ट्रांजिशन लेंथ की कमी।
आंतरिक और बाहरी वाइंडिंग का अभाव।
सुपर एलिवेशन (मोड़ पर ढलान) की कमी, जो वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जरूरी है।
विभाग ने सभी इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में मौजूदा और निर्माणाधीन सभी संरचनाओं का तकनीकी निरीक्षण करें। इसके लिए एक विशेषज्ञ कमेटी भी गठित की जाएगी, जो जांच के बाद तकनीकी खामियों को सुधारने के लिए सुझाव देगी। यदि किसी पुल में गंभीर खामी पाई गई, तो तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
भोपाल के ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही कड़ा रुख दिखाया था। उन्होंने जांच के बाद दो चीफ इंजीनियरों, दो कार्यपालन इंजीनियरों, एक उपविभागीय अधिकारी, एक उपयंत्री और एक सहायक यंत्री को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, डिजाइन तैयार करने वाली एजेंसी ‘पुनीत चड्ढा’ और डिजाइन कंसल्टेंट ‘डायनामिक कंसल्टेंट’ को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी ने यह भी कहा कि अगर अतिरिक्त जमीन उपलब्ध हो, तो 90 डिग्री के तीखे मोड़ को वक्राकार बनाया जा सकता है, जिससे वाहनों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
इसी तरह, शिवपुरी में एक निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा ढहने की घटना ने भी पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इस घटना में छह मजदूर घायल हुए थे। जांच में पाया गया कि स्लैब में दरारें थीं, जिसके बाद उसे नियंत्रित तरीके से हटाया गया। हालांकि, स्थानीय लोगों और नेताओं ने इसे घटिया निर्माण का परिणाम बताया।
- पीडब्ल्यूडी की नई रणनीति
लोक निर्माण विभाग ने भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने सभी इंजीनियरों की परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है, ताकि उनकी तकनीकी क्षमता का आकलन किया जा सके। यह परीक्षा 15 अगस्त 2025 तक पूरी करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कोड्स की सूची पीडब्ल्यूडी के पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग ने यह भी तय किया है कि अब स्थानीय स्तर पर डामर की खरीद नहीं होगी, ताकि सड़कों की गुणवत्ता में सुधार हो।
मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सड़कों पर गड्ढे बनना सामान्य है, लेकिन अगर निर्माण में लापरवाही पाई गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इंदौर में विवादित फ्लाईओवर के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मोड़ 90 डिग्री नहीं, बल्कि 114 डिग्री है, और सुरक्षा उपायों में कोई कमी होने पर जिम्मेदारों को नहीं बख्शा जाएगा।
भोपाल और इंदौर के पुलों की डिजाइन पर उठे सवालों ने जनता और विशेषज्ञों में चिंता पैदा की है। लोगों का कहना है कि तीखे मोड़ वाले पुल वाहनों के लिए खतरनाक हो सकते हैं, खासकर भारी वाहनों और तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए। सोशल मीडिया पर ऐशबाग के 90 डिग्री मोड़ वाले पुल को ‘आठवां अजूबा’ तक कहा गया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सभी पुलों का तकनीकी ऑडिट किया जाए और निर्माण से पहले डिजाइन को रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) जैसे विशेषज्ञ संगठनों से मंजूरी ली जाए।
पीडब्ल्यूडी ने साफ किया है कि जांच के बाद विशेषज्ञों की कमेटी की सलाह पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज को पूरी तरह सुधारने के बाद ही जनता के लिए खोला जाएगा। विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इंजीनियरों को तकनीकी कोड्स का पालन करने और नियमित प्रशिक्षण लेने के लिए कहा गया है।
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