Trending: उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हंगामा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज।
Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में 5 जुलाई 2025 की रात को मुहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा बवाल हो गया। यह घटना तब हुई, जब जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने प्रशासन द्वारा तय किए गए रास्ते को ...
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में 5 जुलाई 2025 की रात को मुहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा बवाल हो गया। यह घटना तब हुई, जब जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने प्रशासन द्वारा तय किए गए रास्ते को छोड़कर प्रतिबंधित रास्ते की ओर जाने की कोशिश की। पुलिस द्वारा रोकने पर भीड़ ने बैरिकेड तोड़ दिए और स्थिति बेकाबू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए और जुलूस का प्रतीकात्मक घोड़ा भी गिर पड़ा। इस घटना के बाद रविवार, 6 जुलाई 2025 को जीवाजीगंज थाना पुलिस ने आयोजक इरफान उर्फ लल्ला सहित 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का एक पवित्र महीना है, जिसमें शिया मुस्लिम समुदाय हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करता है। इस दौरान ताजिया जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें प्रतीकात्मक घोड़े और ताजिए शामिल होते हैं। उज्जैन में खजूरवाली मस्जिद के पास यह जुलूस हर साल निकाला जाता है, और इसके लिए प्रशासन के साथ रास्ता तय किया जाता है। इस बार भी जुलूस का रास्ता निकास चौक के माध्यम से तय किया गया था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे अब्दालपुरा की ओर ले जाने की कोशिश की, जो एक प्रतिबंधित रास्ता था। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि जुलूस के आयोजकों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रतिबंधित रास्तों पर घोड़े नहीं ले जाए जाएं। इसके बावजूद, जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की और एक प्रतीकात्मक घोड़े को बैरिकेड में धक्का मारकर रास्ता खोलने का प्रयास किया। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई, और भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया।
- पुलिस का लाठीचार्ज और घायल पुलिसकर्मी
जब भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने और प्रतिबंधित रास्ते पर जाने की जिद की, तो पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। इस दौरान पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से दो को गंभीर चोटें आईं और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा, "भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और पुलिस पर हमला किया। हमें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। भीड़ भाग गई, लेकिन घोड़ा मौके पर ही छोड़ दिया गया।" इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दिखा कि भीड़ बैरिकेड की ओर बढ़ रही थी और पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ा। वीडियो में घोड़े के गिरने की तस्वीरें भी थीं, जिसने इस घटना को और चर्चा में ला दिया।
- 16 लोगों के खिलाफ FIR
रविवार, 6 जुलाई 2025 को जीवाजीगंज थाना पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में 16 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। इनमें जुलूस के आयोजक इरफान उर्फ लल्ला भी शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दंगा भड़काने, गैरकानूनी जमावड़ा, और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए हैं। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जुलूस के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे, और आयोजकों के साथ पहले ही रास्ते को लेकर सहमति बन चुकी थी। फिर भी, कुछ उपद्रवियों ने नियमों का उल्लंघन किया, जिसके कारण यह हंगामा हुआ।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया, खासकर X पर, लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने पुलिस के लाठीचार्ज को सही ठहराया और कहा कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी। एक यूजर ने लिखा, "उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान बैरिकेड तोड़ना गलत था। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सही कदम उठाया।" वहीं, कुछ लोगों ने पुलिस के लाठीचार्ज की आलोचना की और इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया। एक अन्य यूजर ने लिखा, "मुहर्रम जैसे पवित्र अवसर पर पुलिस का लाठीचार्ज करना गलत है। प्रशासन को पहले बेहतर इंतजाम करने चाहिए थे।" इस तरह की प्रतिक्रियाओं ने इस घटना को और विवादास्पद बना दिया।
- उज्जैन में पहले भी हुए हैं विवाद
उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान विवाद कोई नई बात नहीं है। 2022 में भी टोपखाना इलाके में मुहर्रम जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच लाठी और पाइप से मारपीट हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। उस समय दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की थी, लेकिन स्थानीय व्यापारियों ने दुकानों में तोड़फोड़ और पाइपलाइन उखाड़ने की शिकायत की थी। 2017 में भी उज्जैन में एक दक्षिणपंथी संगठन की रैली के दौरान टोपखाना इलाके में पथराव और हिंसा हुई थी, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा था। इन घटनाओं से साफ है कि उज्जैन में धार्मिक जुलूसों के दौरान संवेदनशील इलाकों में तनाव की स्थिति बन सकती है, और प्रशासन को पहले से सतर्क रहना पड़ता है।
मुहर्रम जुलूस से पहले उज्जैन प्रशासन ने सभी जरूरी इंतजाम किए थे। जिला प्रशासन ने आयोजकों के साथ बैठक की थी, जिसमें रास्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर सहमति बनी थी। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि जुलूस के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेड लगाए गए थे। लेकिन आयोजकों द्वारा नियमों का पालन न करने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। यह घटना प्रशासन के लिए एक चुनौती भी पेश करती है, क्योंकि धार्मिक जुलूसों के दौरान संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। उज्जैन जैसे धार्मिक शहर में, जहां महाकाल मंदिर जैसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं, ऐसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं।
इस घटना पर अभी तक कोई बड़ा राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन कुछ स्थानीय नेताओं ने इसकी आलोचना की है। बीजेपी के स्थानीय नेता शिव भूषण चौबे ने कहा कि प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि धार्मिक जुलूसों में नियमों का पालन जरूरी है, ताकि शहर में शांति बनी रहे। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पुलिस के लाठीचार्ज पर सवाल उठाए और कहा कि प्रशासन को पहले ही बेहतर संवाद के जरिए स्थिति को संभालना चाहिए था। हालांकि, इस मुद्दे पर कोई बड़ा राजनीतिक विवाद अभी तक नहीं खड़ा हुआ है।
उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुआ बवाल एक बार फिर धार्मिक आयोजनों में नियमों के पालन और प्रशासन की तैयारियों के महत्व को रेखांकित करता है। जुलूस में शामिल कुछ लोगों द्वारा प्रतिबंधित रास्ते पर जाने की कोशिश और बैरिकेड तोड़ने की घटना ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन इस दौरान पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। आयोजक सहित 16 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होना इस मामले में सख्त कार्रवाई का संकेत है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि धार्मिक आयोजनों में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन, आयोजकों, और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा। उज्जैन जैसे धार्मिक महत्व के शहर में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए भविष्य में और बेहतर योजना और संवाद की जरूरत है।
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