सुप्रीम कोर्ट ने 'Udaipur Files' की रिलीज पर रोक से किया इनकार, कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित है फिल्म।
Bollywood News: उदयपुर में 2022 में हुए कन्हैयालाल तेली हत्याकांड पर आधारित फिल्म 'Udaipur Files' की रिलीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है....
उदयपुर में 2022 में हुए कन्हैयालाल तेली हत्याकांड पर आधारित फिल्म 'Udaipur Files' की रिलीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 9 जुलाई 2025 को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया और कहा, "फिल्म को रिलीज होने दें।" यह फिल्म 11 जुलाई 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने यह फैसला सुनाया। याचिका हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि फिल्म की रिलीज से उनकी निष्पक्ष सुनवाई पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है, तो वे हाई कोर्ट का रुख करें। इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म के निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के लिए फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग करें, ताकि उनकी आपत्तियों का आकलन किया जा सके।
28 जून 2022 को राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल तेली की उनके दुकान में दो लोगों, मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद, ने गला रेतकर हत्या कर दी थी। यह हत्या तत्कालीन बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी के समर्थन में कन्हैयालाल द्वारा कथित तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के जवाब में की गई थी। हत्यारों ने इस जघन्य कृत्य का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली और इसे आतंकी साजिश मानते हुए गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और शस्त्र अधिनियम के तहत 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें मोहम्मद जावेद, फरहाद मोहम्मद उर्फ बबला, मोहसिन, आसिफ, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली और मुस्लिम मोहम्मद शामिल हैं। दो अन्य आरोपी, सलमान और अबु इब्राहिम, कराची (पाकिस्तान) से फरार हैं।
मामले की सुनवाई जयपुर की विशेष एनआईए कोर्ट में चल रही है। मोहम्मद जावेद, जो इस मामले में आठवां आरोपी है, को सितंबर 2024 में राजस्थान हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। एनआईए के अनुसार, जावेद ने हत्या से पहले कन्हैयालाल की दुकान की रेकी की थी और मुख्य हत्यारे रियाज को जानकारी दी थी।
'Udaipur Files' का निर्देशन भरत एस. श्रीनाते ने किया है और इसे अमित जानी ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में अभिनेता विजय राज कन्हैयालाल की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि राजनीश दुग्गल, प्रीति झंगियानी, कमलेश सावंत, कांची सिंह और मुश्ताक खान जैसे कलाकार भी अहम किरदारों में हैं। फिल्म का ट्रेलर 4 जुलाई 2025 को रिलीज हुआ, जिसके बाद यह विवादों में घिर गई। ट्रेलर में नूपुर शर्मा के विवादित बयान और ज्ञानवापी मस्जिद सर्वेक्षण से जुड़े दृश्य शामिल हैं, जिन्हें कुछ संगठनों ने सांप्रदायिक और भड़काऊ बताया। पहले इस फिल्म का नाम 'ज्ञानवापी फाइल्स: अ टेलर्स मर्डर स्टोरी' था, जिसे बाद में बदलकर 'Udaipur Files' कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि नाम बदलना धार्मिक भावनाओं को भड़काने और व्यावसायिक लाभ कमाने की कोशिश थी।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए मंजूरी दे दी, लेकिन इसमें 150 कट्स लगाए गए। सीबीएफसी ने कहा कि आपत्तिजनक हिस्सों को हटा दिया गया है, ताकि सांप्रदायिक सद्भाव पर कोई असर न पड़े। दिल्ली हाई कोर्ट ने 9 जुलाई को सुनवाई के दौरान निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे फिल्म को याचिकाकर्ताओं के लिए स्क्रीन करें, ताकि उनकी आपत्तियों की जांच की जा सके।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मोहम्मद जावेद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि 'Udaipur Files' की रिलीज से उनकी निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित होगा। उनकी वकील प्योली ने कोर्ट को बताया कि फिल्म केवल अभियोजन पक्ष की कहानी दिखाती है और यह सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ है। उन्होंने कहा कि ट्रेलर में कुछ दृश्य और संवाद धार्मिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। याचिका में मांग की गई थी कि सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 6 के तहत फिल्म के प्रमाणन को रद्द किया जाए और रिलीज पर रोक लगाई जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता 14 जुलाई को कोर्ट के नियमित सत्र शुरू होने पर इस मामले को उठा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तब तक फिल्म रिलीज हो सकती है।
'Udaipur Files' की रिलीज को लेकर उठा विवाद धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता के सवाल उठा रहा है। एक ओर, कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर, इसे सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सीबीएफसी के कट्स इस बात को दर्शाते हैं कि फिल्म को रिलीज करने से पहले संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि फिल्म की रिलीज के बाद सामाजिक माहौल पर क्या असर पड़ता है। कन्हैयालाल का परिवार, जिसने अभी तक उनकी अस्थियों का विसर्जन नहीं किया, इस फिल्म को अपने दुख को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम मानता है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद और इसके अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। उन्होंने दावा किया कि फिल्म सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती है और 2022 में हुए दंगों जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। वाराणसी में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद के सचिव मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने भी स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की। समाजवादी पार्टी के नेता अबु आसिम आजमी और जमात-ए-इस्लामी ने भी फिल्म पर प्रतिबंध की मांग की, इसे सामाजिक एकता के लिए खतरा बताया। दूसरी ओर, वाराणसी में ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले की याचिकाकर्ता महिलाओं और उनके वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने फिल्म को टैक्स-मुक्त करने और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि यह फिल्म सच्चाई को दर्शाती है।
फिल्म के निर्माता अमित जानी का कहना है कि 'Udaipur Files' एक सच्ची घटना पर आधारित है और इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता लाना है, न कि किसी समुदाय को बदनाम करना। उन्होंने कहा कि सीबीएफसी के निर्देशानुसार सभी आपत्तिजनक दृश्यों को हटा दिया गया है। निर्माताओं ने यह भी दावा किया कि फिल्म कन्हैयालाल के परिवार की सहमति से बनाई गई है और उनके दर्द को सामने लाने की कोशिश है।
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