DGCA का कड़ा कदम- एयरपोर्ट अव्यवस्था पर लगाम लगाने को सभी हवाई अड्डों पर होगी एक घंटे की अनिवार्य ऑन-साइट जांच, अगर गलती मिली तो होगा ऐसा एक्शन।
उड्डयन नियामक महानिदेशालय (DGCA) ने देशभर के हवाई अड्डों पर बढ़ती अव्यवस्था और यात्री असुविधाओं को देखते हुए एक महत्वपूर्ण
उड्डयन नियामक महानिदेशालय (DGCA) ने देशभर के हवाई अड्डों पर बढ़ती अव्यवस्था और यात्री असुविधाओं को देखते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर एक घंटे की अनिवार्य ऑन-साइट जांच करनी होगी, जिसमें सुरक्षा, संचालन तैयारियां, यात्री सुविधाएं और एयरलाइन प्रतिक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि जांच के दौरान कोई कमी पाई जाती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। यह कदम हालिया विमान उड़ानों में बड़े पैमाने पर रद्दीकरण और विलंब की घटनाओं के बाद उठाया गया है, जो यात्री असुविधाओं का कारण बने। आदेश 10 दिसंबर 2025 को जारी किया गया, जिसमें DGCA के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित हवाई अड्डों का दौरा दो से तीन दिनों के भीतर करें और जांच पूरी होने के 24 घंटे के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपें। इस पहल का उद्देश्य हवाई अड्डा प्रबंधन को पारदर्शी और त्वरित सुधार के लिए प्रेरित करना है। DGCA के इस आदेश का मुख्य फोकस 11 प्रमुख हवाई अड्डों पर है, जहां हालिया विघटन ने सबसे अधिक प्रभाव डाला है। इन हवाई अड्डों में नागपुर, जयपुर, भोपाल, सूरत, तिरुपति, विजयवाड़ा, शिरडी, कोच्चि, लखनऊ, अमृतसर और देहरादून शामिल हैं। प्रत्येक जांच एक घंटे की होगी, जिसमें अधिकारी मौके पर ही सुरक्षा प्रोटोकॉल, संचालन की दक्षता, यात्री सुविधाओं की उपलब्धता और एयरलाइन की प्रतिक्रिया का आकलन करेंगे। विशेष रूप से, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और सीमित गतिशीलता वाले यात्रियों को दी जा रही सहायता पर करीबी नजर रखी जाएगी। इसके अलावा, उड़ान रद्दीकरण, रिफंड समयसीमा, समयानुसार प्रदर्शन, यात्री मुआवजा स्थिति और सामान हैंडलिंग तथा रिटर्न मुद्दों की जांच भी शामिल होगी। DGCA ने स्पष्ट किया है कि ये जांच सतही नहीं होंगी, बल्कि हवाई अड्डा संचालन से जुड़े हर महत्वपूर्ण पहलू को कवर करेंगी।
यह आदेश देश के सबसे बड़े एयरलाइन के संचालन में व्यापक विघटन के संदर्भ में आया है, जहां पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं। विघटन के कारणों में क्रू सदस्यों की कमी, तकनीकी खराबी, प्रतिकूल मौसम और हवाई अड्डा भीड़ शामिल हैं। DGCA ने इस संकट से निपटने के लिए एयरलाइन के मुख्यालय में आठ सदस्यीय निगरानी टीम तैनात की है, जो नेटवर्क और क्रू संचालन की निगरानी करेगी। यह टीम एयरलाइन के विमान बेड़े, औसत उड़ान दूरी, पायलट संख्या, नेटवर्क विवरण, क्रू उपयोग स्तर और अन्य क्रू शेड्यूलिंग मामलों की जांच करेगी। दैनिक उड़ानों और क्रू उपलब्धता, प्रभावित क्षेत्रों और प्रति दिन प्रति आधार स्टैंडबाय क्रू पर भी ध्यान दिया जाएगा। निगरानी टीम को प्रत्येक निरीक्षण के 24 घंटे के भीतर DGCA के संचालन निदेशक को रिपोर्ट सौंपनी होगी, और दोनों टीमें दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। DGCA ने एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी 11 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजे उपस्थित होने का निर्देश दिया है, जहां नेटवर्क-व्यापी गंभीर विघटन के बारे में विस्तृत डेटा और अपडेट प्रस्तुत करने होंगे। सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में शामिल होंगे। यह कदम विमान संचालन में हालिया अराजकता को रोकने के लिए उठाया गया है, जहां सैकड़ों उड़ानें प्रतिदिन रद्द हो रही थीं, और यात्रियों को पहले से कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। DGCA ने पहले ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मुख्य संचालन अधिकारी को शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं, जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने किराया सीमा लगाई है और उड़ान कटौती का आदेश दिया है ताकि एयरलाइन के संचालन को स्थिर किया जा सके। इन कदमों से हवाई अड्डों पर लंबी कतारें, सामान अव्यवस्था और खराब संचार जैसी शिकायतें कम होने की उम्मीद है।
हालिया विघटन ने पूरे विमानन क्षेत्र को प्रभावित किया है, जहां उड़ान रद्दीकरणों की संख्या चार दिनों में 1000 से अधिक हो गई। समयानुसार प्रदर्शन 35 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि अक्टूबर 2025 में यह 84.1 प्रतिशत था। एयरलाइन ने तकनीकी खराबी, प्रतिकूल मौसम, हवाई अड्डा भीड़ और नई ड्यूटी नियमों को कारण बताया है। DGCA की नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम, जो जनवरी 2024 में अपडेट किए गए थे, पायलट थकान को कम करने के लिए लंबी विश्राम अवधि और रात्रि संचालन पर सख्त सीमाएं लगाते हैं। इन नियमों को दो चरणों में लागू किया गया, जिसमें नवीनतम चरण 1 नवंबर 2025 से प्रभावी हुआ। हालांकि, विघटन के बाद DGCA ने एक बारगी अस्थायी छूट दी है, जिसमें रात्रि लैंडिंग पर छूट और साप्ताहिक विश्राम पर अंतर शामिल हैं। FDTL नियम पायलटों की ड्यूटी और उड़ान समय को नियंत्रित करते हैं, जिसमें रात्रि लैंडिंग और विश्राम पर सीमाएं हैं, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। नए FDTL नियमों में साप्ताहिक विश्राम को 36 से 48 घंटे तक बढ़ाया गया है, रात्रि ड्यूटी को 00:00 से 06:00 तक परिभाषित किया गया (पहले 00:00-05:00), प्रति पायलट रात्रि लैंडिंग को छह से दो तक कम किया गया, और दो लगातार रात्रि ड्यूटियों से अधिक नहीं होने का प्रावधान है। व्यक्तिगत छुट्टी को अनिवार्य 48-घंटे साप्ताहिक विश्राम का हिस्सा नहीं माना जा सकता। DGCA ने स्पष्ट किया है कि FDTL को पूरी तरह स्थगित नहीं किया गया है, बल्कि केवल एयरलाइन के A320 बेड़े संचालन को सीमित छूट दी गई है। छूट में रात्रि ड्यूटी की परिभाषा को पुरानी (00:00-05:00) में वापस लिया गया है, और रात्रि ड्यूटी में अतिक्रमण संचालन पर छूट दी गई है। DGCA क्रू रजिस्टर और अनुपालन की निगरानी जारी रखेगी।
यह आदेश DGCA की व्यापक भूमिका को रेखांकित करता है, जो हवाई परिवहन सेवाओं को विनियमित करने, विमानों की हवाई योग्यता मानकों को लागू करने और हवाई अड्डों पर मानक अनुपालन की निगरानी करने के लिए जिम्मेदार है। DGCA पायलटों, विमान रखरखाव इंजीनियरों, वायु यातायात नियंत्रकों और अन्य तकनीकी कर्मियों को लाइसेंस जारी करता है और उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मंजूरी देता है। यह एयरोड्रोम प्रमाणन भी करता है। हाल के वर्षों में DGCA ने एयरबस A320 परिवार की सुरक्षा निगरानी को कड़ा किया है, जिसमें सॉफ्टवेयर अपडेट और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम की जांच शामिल है। विमानों को संशोधन पूरा होने तक व्यावसायिक संचालन से रोका गया था, और एयरलाइनों ने इंजीनियरिंग टीमों को तैनात किया। DGCA ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ लगातार बैठकें की हैं ताकि संकट का समाधान हो सके। मंत्रालय ने एयरलाइन के साथ स्थिति की समीक्षा की है, और DGCA ने उड़ान कटौती और किराया नियंत्रण के माध्यम से स्थिरता सुनिश्चित की है। यह पहल यात्रियों की शिकायतों को कम करने और हवाई अड्डा संचालन को सुचारू बनाने पर केंद्रित है। ऑन-साइट जांच से हवाई अड्डा प्रबंधन को तत्काल सुधार के अवसर मिलेंगे, और रिपोर्ट्स से नीतिगत बदलाव संभव होंगे। DGCA ने भविष्य में ऐसी निगरानी को जारी रखने का संकेत दिया है ताकि विमानन क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत हो।
What's Your Reaction?