Politics News: अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की अम्बेडकर (Ambedkar) फोटो विवाद- यूपी की सियासत में नया तूफान, मायावती और चंद्रशेखर आजाद ने साधा निशाना।
उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं...
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार विवाद की वजह है एक पोस्टर, जिसमें अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का चेहरा संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (Ambedkar) के साथ आधा-आधा जोड़ा गया है। इस पोस्टर ने न केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हमलावर बनाया, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती और आजाद समाज पार्टी (ASP) के नेता चंद्रशेखर आजाद ने भी अखिलेश को आड़े हाथों लिया है। यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले SP की ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को बड़ा झटका दे सकता है।
- विवाद की जड़: अम्बेडकर (Ambedkar)-अखिलेश वाला पोस्टर
29 अप्रैल 2025 को समाजवादी पार्टी की लोहिया वाहिनी इकाई ने लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में होर्डिंग्स लगाए, जिनमें एक विवादास्पद पोस्टर ने सबका ध्यान खींचा। इस पोस्टर में बायीं ओर डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (Ambedkar) की तस्वीर थी, और दायीं ओर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की तस्वीर, दोनों को एक पतली सफेद रेखा से अलग किया गया था, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दोनों चेहरों को जोड़ा गया है। पोस्टर पर नारा लिखा था: “संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय की लड़ाई”।
SP का दावा था कि यह पोस्टर अखिलेश की अम्बेडकर (Ambedkar) के प्रति निष्ठा और संविधान की रक्षा के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लेकिन इसने तुरंत विवाद खड़ा कर दिया। BJP ने इसे “अम्बेडकर (Ambedkar) का अपमान” करार दिया, जबकि मायावती और चंद्रशेखर आजाद ने इसे “दलित भावनाओं के साथ खिलवाड़” और “वोटबैंक की सस्ती राजनीति” बताया।
- BJP का हमला: “अखिलेश ने की अम्बेडकर (Ambedkar) की बेइज्जती”
BJP ने इस पोस्टर को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में 30 अप्रैल 2025 को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए: “BJP अम्बेडकर (Ambedkar) का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी” और “अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) माफी मांगो”। BJP नेताओं ने इसे SP की “संविधान विरोधी और दलित विरोधी मानसिकता” का सबूत बताया।
अमित मालवीय, BJP IT सेल प्रमुख: “अम्बेडकर (Ambedkar), जो संविधान के निर्माता और दलित समाज के प्रतीक हैं, उनकी तस्वीर को विकृत कर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की तस्वीर लगाना सबसे बड़ा अपमान है। अखिलेश कितनी भी बार जन्म लें, वे बाबासाहेब की महानता और समाज के लिए उनके योगदान के बराबर नहीं हो सकते।”
ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, UP: “यह SP की भ्रष्ट मानसिकता को दर्शाता है। यह बाबासाहेब का जानबूझकर किया गया अपमान है, जिसका जवाब जनता सही समय पर देगी।” अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय कानून मंत्री: “SP हमेशा से अम्बेडकर (Ambedkar) विरोधी रही है। UPA II के दौरान SP के एक सांसद ने सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में आरक्षण का बिल फाड़ दिया था। अखिलेश कांग्रेस के सहयोगी हैं, जो राजीव गांधी के समय OBC आरक्षण के खिलाफ थी।”
BJP ने यह भी आरोप लगाया कि SP का यह कदम 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली सफलता (SP ने 37 सीटें जीतीं) के बाद अखिलेश की “अहंकारी” रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद दलित वोटबैंक पर कब्जा करना है।
- मायावती की तीखी प्रतिक्रिया: “SP की गंदी राजनीति”
BSP सुप्रीमो मायावती, जिनकी पार्टी लंबे समय से दलित वोटों की सबसे बड़ी दावेदार रही है, ने इस पोस्टर को “गंदी राजनीति” और “दलित समाज के साथ धोखा” करार दिया। 30 अप्रैल 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा: “SP और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का इतिहास दलित विरोधी रहा है। 1995 में मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में मुझ पर जानलेवा हमला करवाया गया था। अब ये लोग बाबासाहेब की तस्वीर का इस्तेमाल कर दलित वोटों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। यह उनकी बेशर्मी है।” “जातिवादी मानसिकता अम्बेडकर (Ambedkar) के संदेश को तोड़-मरोड़ रही है। BSP ही एकमात्र पार्टी है, जो कांशीराम जी की स्थापना के बाद से अम्बेडकर (Ambedkar)वादी मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है।”
मायावती ने X पर भी पोस्ट किया: “SP की यह हरकत दलित समाज को भड़काने की कोशिश है। जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी।” उनकी यह प्रतिक्रिया SP की PDA रणनीति को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि BSP का दलित वोटबैंक हाल के वर्षों में कमजोर हुआ है।
- चंद्रशेखर आजाद का तंज: “अखिलेश का नकली दलित प्रेम”
आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के नेता और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों, खासकर जाटव समुदाय, के बीच उभरते हुए नेता हैं, ने भी अखिलेश पर तीखा हमला बोला। 1 मई 2025 को एक रैली में उन्होंने कहा:
“अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) बाबासाहेब के नाम का ढोंग कर रहे हैं। SP ने अपने शासनकाल में अम्बेडकर (Ambedkar) पार्क को ‘अय्याशी का अड्डा’ कहा और उनकी मूर्तियों की अनदेखी की। अब जब दलित वोट चाहिए, तो पोस्टर में बाबासाहेब के साथ चेहरा जोड़ रहे हैं। यह नकली प्रेम दलित समाज को मंजूर नहीं।”
“SP और BSP दोनों ने दलितों का इस्तेमाल किया, लेकिन असली लड़ाई अब ASP लड़ेगी। हम अम्बेडकर (Ambedkar) के सच्चे अनुयायी हैं।”
- SP की सफाई और अखिलेश का बचाव
विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी ने सफाई दी कि पोस्टर का मकसद अम्बेडकर (Ambedkar) का अपमान करना नहीं, बल्कि उनकी विरासत को सम्मान देना और अखिलेश की संविधान के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाना था। SP के मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा: “अम्बेडकर (Ambedkar) ने संविधान बनाया, और अखिलेश इसे BJP से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जो इसे तोड़-मरोड़ना चाहती है। पोस्टर में कुछ भी गलत नहीं है।”
अखिलेश ने भी X पर पोस्ट कर BJP पर पलटवार किया: “BJP को अम्बेडकर (Ambedkar) के नाम से एलर्जी है। वे संविधान बदलना चाहते हैं, लेकिन PDA की ताकत उन्हें 2027 में सत्ता से बाहर कर देगी।” हालांकि, उन्होंने मायावती और चंद्रशेखर की आलोचना का सीधा जवाब देने से परहेज किया।
- क्यों है अखिलेश के लिए मुसीबत?
यह विवाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और समाजवादी पार्टी के लिए कई कारणों से मुसीबत बन रहा है:
PDA रणनीति पर खतरा: अखिलेश ने 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए 37 सीटें जीतकर BJP को पछाड़ा था।
इस पोस्टर विवाद ने दलित वोटबैंक को नाराज करने का जोखिम बढ़ा दिया है, जो पहले से ही BSP, ASP, और BJP के बीच बंटा हुआ है। मायावती और चंद्रशेखर की तीखी प्रतिक्रियाएं SP की दलित वोटों पर पकड़ को कमजोर कर सकती हैं।
BJP को मिला हथियार: BJP ने इस मुद्दे को अम्बेडकर (Ambedkar) और दलित समाज के “अपमान” से जोड़कर SP को घेरने की रणनीति बनाई है। यह 2027 के चुनावों में SP के खिलाफ एक बड़ा नैरेटिव बन सकता है।
BJP पहले से ही OBC और गैर-जाटव दलित वोटों पर मजबूत पकड़ रखती है, और इस विवाद ने उसे दलित मतदाताओं को और लुभाने का मौका दिया है।
मायावती और चंद्रशेखर की चुनौती: मायावती, जिनका दलित वोटबैंक हाल के वर्षों में कमजोर हुआ है, इस विवाद को SP के खिलाफ दलितों को एकजुट करने के मौके के रूप में देख रही हैं।
चंद्रशेखर आजाद, जो पश्चिमी UP में जाटव दलितों के बीच उभर रहे हैं, SP की PDA रणनीति को सीधे चुनौती दे रहे हैं। उनकी युवा अपील और अम्बेडकर (Ambedkar)वादी छवि SP के लिए खतरा बन सकती है।
SP का पिछला इतिहास: SP पर पहले भी दलित विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। 1995 के गेस्ट हाउस कांड और मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में अम्बेडकर (Ambedkar) पार्क को “अय्याशी का अड्डा” कहने जैसे बयान SP की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
SP नेता आजम खान के पुराने बयान, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर अम्बेडकर (Ambedkar) को “भूमाफिया” कहा था, भी X पर वायरल हो रहे हैं, जिससे SP की मुश्किलें बढ़ी हैं।
आंतरिक असंतोष: SP के कुछ नेताओं का मानना है कि यह पोस्टर एक गलत रणनीति थी, जिसने दलित वोटों को लुभाने की बजाय उन्हें नाराज कर दिया। पार्टी के भीतर इस बात पर चर्चा है कि अखिलेश को इस मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए या मायावती के साथ समझौता करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर तीखी बहस
X पर इस विवाद ने तूल पकड़ लिया है, और कई पोस्ट्स वायरल हो रहे हैं: @jpsin1: “बाबासाहेब को जिन्होंने कभी सम्मान नहीं दिया, आज वही लोग उन्हें पोस्टरों में सजाकर दलितों को भ्रमित कर रहे हैं। अखिलेश के पिता ने मायावती का अपमान किया था, और अब अखिलेश खुद को अम्बेडकर (Ambedkar) के बराबर गिन रहे हैं।”
@WeUttarPradesh: “अखिलेश ने अम्बेडकर (Ambedkar) की तस्वीर के साथ विरोध जताया था, लेकिन अब BJP और BSP दोनों उन्हें घेर रहे हैं। क्या यह SP की गलत रणनीति है?”
कुछ यूजर्स ने SP का बचाव करते हुए कहा कि अखिलेश संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं, जबकि अन्य ने इसे “दलित वोटों की सस्ती राजनीति” करार दिया। वायरल रील्स में पोस्टर की तस्वीरें और BJP के प्रदर्शनों के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिससे यह मुद्दा और गर्म हो गया है।
पहले भी रहे हैं विवाद
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश दलित वोटबैंक को लेकर विवाद में फंसे हैं: राणा सांगा विवाद (मार्च 2025): SP सांसद रामजी लाल सुमन ने राजपूत शासक राणा सांगा को “गद्दार” कहा था, जिसके बाद करणी सेना ने उनके काफिले पर हमला किया। अखिलेश ने सुमन का बचाव किया, लेकिन इससे राजपूत समुदाय नाराज हुआ।
अमित शाह के बयान पर विरोध (दिसंबर 2024): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान को अम्बेडकर (Ambedkar) के खिलाफ बताकर अखिलेश ने विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन यह मुद्दा ज्यादा तूल नहीं पकड़ सका।
मायावती के साथ पुराना तनाव: 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद SP और BSP के बीच तल्खी बनी हुई है। मायावती बार-बार इस घटना का जिक्र कर SP को दलित विरोधी ठहराती हैं।
यूपी की सियासत पर असर दलित वोटों का बंटवारा: उत्तर प्रदेश में दलित वोटर करीब 21% हैं, जिनमें जाटव (मायावती की जाति) और गैर-जाटव शामिल हैं। 2014 से BJP ने गैर-जाटव दलित वोटों पर पकड़ बनाई है, जबकि 2024 में SP-कांग्रेस गठबंधन को दलित वोटों का बड़ा हिस्सा मिला। इस विवाद से SP का दलित वोटबैंक खिसक सकता है, जिसका फायदा BJP, BSP, या ASP को मिल सकता है। चंद्रशेखर आजाद की पार्टी खासकर पश्चिमी UP में SP के लिए चुनौती बन रही है।
2027 चुनाव की रणनीति: अखिलेश 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पहले से ही PDA रणनीति पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने OBC और दलित नेताओं, जैसे शिवदयाल चौरसिया, को सम्मान देकर और महिलाओं के लिए “स्त्री सम्मान समृद्धि योजना” जैसे वादे करके अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश की है। लेकिन यह विवाद उनकी इस रणनीति को कमजोर कर सकता है, क्योंकि दलित मतदाता भावनात्मक रूप से अम्बेडकर (Ambedkar) से जुड़े हैं।
BSP और ASP का उभार: मायावती इस विवाद का इस्तेमाल BSP को पुनर्जनन देने के लिए कर सकती हैं, जो हाल के वर्षों में कमजोर हुई है। चंद्रशेखर आजाद की ASP, जो युवा दलितों के बीच लोकप्रिय हो रही है, SP के लिए नई चुनौती है।
क्या कर सकते हैं अखिलेश? इस संकट से उबरने के लिए अखिलेश के पास कुछ विकल्प हैं:
माफी या स्पष्टीकरण: अखिलेश सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर या पोस्टर को गलतफहमी बताकर विवाद को शांत कर सकते हैं। इससे दलित मतदाताओं की नाराजगी कम हो सकती है।
मायावती से समझौता: SP और BSP का 2019 में गठबंधन रहा था, जो असफल रहा। अखिलेश मायावती के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर सकते हैं, हालांकि यह मुश्किल है। PDA पर और जोर: अखिलेश को दलित नेताओं और अम्बेडकर (Ambedkar) से जुड़े प्रतीकों के प्रति और संवेदनशीलता दिखानी होगी। अम्बेडकर (Ambedkar) जयंती (14 अप्रैल) जैसे मौकों पर सकारात्मक कदम उनकी छवि सुधार सकते हैं।
BJP पर पलटवार: अखिलेश BJP की “संविधान बदलने की मंशा” को और उजागर कर दलित और OBC वोटरों को एकजुट करने की कोशिश कर सकते हैं।
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का अम्बेडकर (Ambedkar) के साथ फोटो वाला पोस्टर उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बड़ा भूचाल लाया है। BJP, मायावती, और चंद्रशेखर आजाद की तीखी आलोचनाओं ने SP की PDA रणनीति को मुश्किल में डाल दिया है। यह विवाद न केवल दलित वोटों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों में SP की संभावनाओं को भी कमजोर कर सकता है। अखिलेश के लिए यह एक कठिन परीक्षा है, जहां उन्हें अपनी रणनीति को फिर से मजबूत करना होगा, ताकि दलित और OBC मतदाताओं का भरोसा जीता जा सके।
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