Politics: कांग्रेस के भीतर यह 'बहुत मजबूत राय' है कि उन्हें BMC चुनाव अकेले लड़ना चाहिए", पूर्व CM पृथ्वीराज चव्हाण का बयान।
मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आगामी चुनावों को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस में एक नई रणनीति ने जोर पकड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ....
मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आगामी चुनावों को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस में एक नई रणनीति ने जोर पकड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने 1 जुलाई 2025 को कहा कि पार्टी के भीतर यह "बहुत मजबूत राय" है कि कांग्रेस को BMC चुनाव अकेले लड़ना चाहिए। यह बयान महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन, जिसमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-शरद पवार गुट) शामिल हैं, के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। BMC, जो एशिया का सबसे धनी नगर निगम है, के चुनाव 2025 की शुरुआत में होने की संभावना है, और यह मुंबई की सत्ता पर कब्जे की जंग में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
BMC, जिसका वार्षिक बजट 2023-24 में 52,619 करोड़ रुपये को पार कर गया, भारत का सबसे धनी नगर निगम है। यह मुंबई की शहरी प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र है और इसके 236 वार्डों में चुने गए कॉर्पोरेटर शहर की नीतियों और विकास परियोजनाओं को आकार देते हैं। 2017 के BMC चुनावों में शिवसेना (अविभाजित) ने 84 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 82 सीटें हासिल की थीं। कांग्रेस को 31 और NCP को 9 सीटें मिली थीं। तब से शिवसेना में विभाजन और महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों ने इस बार के चुनाव को और भी जटिल बना दिया है। BMC चुनाव न केवल मुंबई की सत्ता की कुंजी हैं, बल्कि यह उद्धव ठाकरे के लिए उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने का एक अवसर भी है, जिन्होंने 2022 में मुख्यमंत्री पद और अपनी पार्टी का एक बड़ा हिस्सा खो दिया। दूसरी ओर, BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस चुनाव में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहते हैं।
- कांग्रेस की स्वतंत्र रणनीति
पृथ्वीराज चव्हाण के बयान ने संकेत दिया कि कांग्रेस BMC चुनाव में MVA गठबंधन के साथ न जाकर स्वतंत्र रूप से लड़ने की रणनीति पर विचार कर रही है। यह फैसला 30 जून 2025 को दिल्ली में हुई महाराष्ट्र कांग्रेस की एक मैराथन बैठक में लिया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस दिशा में सहमति जताई। अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान, विशेष रूप से अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी पर छोड़ दिया गया है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि MVA गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुंबई में कांग्रेस का एक मजबूत शहरी आधार रहा है, और स्वतंत्र रूप से लड़ने से यह आधार फिर से जीवंत हो सकता है। इसके अलावा, कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि शिवसेना (UBT) और NCP (शरद पवार) के साथ गठबंधन में सीटों का बंटवारा कांग्रेस के लिए फायदेमंद नहीं होगा, क्योंकि मुंबई में शिवसेना का प्रभुत्व रहा है।
- MVA गठबंधन पर प्रभाव
कांग्रेस का यह कदम MVA गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस की इस रणनीति ने गठबंधन के भीतर तनाव पैदा कर दिया है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की NCP को लगता है कि कांग्रेस का अकेले लड़ना BJP-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन, जिसे महायुति के नाम से जाना जाता है, को फायदा पहुंचा सकता है। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति ने 235 सीटें जीतकर भारी जीत हासिल की थी, जबकि MVA को केवल 46 सीटें मिली थीं। इस जीत ने BJP और शिंदे गुट को BMC चुनावों में और आक्रामक रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि अगर उद्धव ठाकरे की शिवसेना महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन करती है, तो कांग्रेस किसी भी हाल में MVA के साथ नहीं रहेगी। MNS के प्रमुख राज ठाकरे का BJP के साथ करीबी रुख और उनकी पार्टी के छह कॉर्पोरेटरों का शिंदे गुट में शामिल होना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय रहा है।
- पृथ्वीराज चव्हाण का बयान
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, “पार्टी के भीतर यह बहुत मजबूत राय है कि हमें BMC चुनाव अकेले लड़ना चाहिए। हमारा मानना है कि मुंबई में कांग्रेस का एक अलग आधार है, और हमें इसे मजबूत करने का मौका मिलेगा।” चव्हाण ने यह भी संकेत दिया कि चुनाव के बाद गठबंधन की संभावना पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल स्वतंत्र रणनीति ही बेहतर है। यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें वह मुंबई में अपनी खोई जमीन को फिर से हासिल करना चाहती है।
- BMC चुनाव की तैयारियां
BMC चुनावों की तारीखें अभी घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अप्रैल 2025 के बाद ये चुनाव हो सकते हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में वार्ड डिलिमिटेशन और OBC आरक्षण से संबंधित मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 में OBC आरक्षण को लेकर स्थिति यथावत रखने का आदेश दिया था, जिसके कारण चुनाव में देरी हुई है। हाल ही में BMC ने 227 वार्डों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने का मसौदा राज्य चुनाव आयोग (SEC) को सौंपा है, जिसमें लगभग 20% वार्डों की सीमाएं बदली गई हैं।
दूसरी ओर, महायुति गठबंधन (BJP-शिवसेना शिंदे गुट) ने BMC चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 2023 में BJP ने 227 में से 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। हाल ही में शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर BMC चुनावों पर चर्चा की। BJP का लक्ष्य मुंबई में पहली बार अपना मेयर नियुक्त करना है, जो अब तक शिवसेना के पास रहा है। कांग्रेस का BMC चुनाव अकेले लड़ने का फैसला एक बड़ा राजनीतिक दांव है, जो MVA गठबंधन की एकता को प्रभावित कर सकता है। पृथ्वीराज चव्हाण का बयान इस बात का संकेत है कि कांग्रेस मुंबई में अपनी स्वतंत्र पहचान को फिर से स्थापित करना चाहती है। हालांकि, यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी अपने स्थानीय नेतृत्व को कितना मजबूत कर पाती है और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए क्या एजेंडा पेश करती है। कांग्रेस के इस कदम ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है। कुछ एक्स पोस्ट्स में इसे कांग्रेस की साहसिक लेकिन जोखिम भरी रणनीति बताया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस मजबूत स्थानीय नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ उतरती है, तो वह मुंबई में अपना आधार मजबूत कर सकती है। हालांकि, एक बहुकोणीय मुकाबले में BJP को फायदा होने की संभावना भी जताई जा रही है।
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