प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया, नए PMO से गुलामी की मानसिकता से किया अलविदा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। यह परिसर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा

Feb 14, 2026 - 11:16
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया, नए PMO से गुलामी की मानसिकता से किया अलविदा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया, नए PMO से गुलामी की मानसिकता से किया अलविदा।
  • सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन, पीएम मोदी बोले नॉर्थ-साउथ ब्लॉक गुलामी के प्रतीक थे, अब सेवा की भावना
  • पीएम मोदी ने नए PMO सेवा तीर्थ से संबोधन, 2014 से चले अभियान में नाम बदलकर बदली शासन की सोच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। यह परिसर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय का नया स्थान है। पहले ये कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर थे लेकिन अब एक ही परिसर में संचालित होंगे। सेवा तीर्थ का नाम देवनागरी लिपि में भवन की दीवार पर अंकित है और इसके नीचे नारा 'नागरिक देवो भव' लिखा गया है जिसका अर्थ है नागरिक को देवता के समान मानना।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया जिसमें कहा कि आज एक नई शुरुआत का दिन है। विक्रम संवत 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष, विजया एकादशी, माघ 24 और शक संवत 1947 के अनुसार यह तारीख 13 फरवरी 2026 है जो भारत के विकास यात्रा में नई शुरुआत का साक्षी बनी है। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन विकसित भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। ये भवन भारत के 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने पुरानी इमारतों जैसे नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये भवन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक थे। इनका निर्माण ब्रिटिश राज की इच्छा के अनुसार हुआ था ताकि भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में बांधे रखा जा सके। ये इमारतें रायसीना हिल पर बनीं और अन्य भवनों से ऊंची थीं जो ब्रिटिश साम्राज्य की सोच को दर्शाती थीं। इनमें ब्रिटिश सम्राट की इच्छा को लागू करने का माध्यम बनाया गया था। स्वतंत्रता के बाद भी इन भवनों से कई महत्वपूर्ण निर्णय और नीतियां बनाई गईं लेकिन इनमें गुलामी की मानसिकता बनी रही।

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया गया। इसमें वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया गया। पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया गया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था बल्कि सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।

उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि संकल्प है। सेवा भारत की आत्मा है और इसकी असली पहचान है। नॉर्थ और साउथ ब्लॉक गुलामी के प्रतीक थे लेकिन अब सेवा तीर्थ सेवा की भावना का प्रतीक बनेगा। पुरानी इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की सोच को दर्शाती थीं लेकिन नई इमारतें नागरिक केंद्रित शासन को मजबूत करेंगी। इस दौरान एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया गया। सेवा तीर्थ परिसर 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है और इसकी लागत 1189 करोड़ रुपये बताई गई है। यह दारा शिकोह रोड पर स्थित है। परिसर में आधुनिक सुविधाएं हैं जो शासन प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाएंगी।

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