अमेरिका ने यमन में अलकायदा के प्रमुख नेता कासिम अल-रिमी को ड्रोन हमले में सफलतापूर्वक मार गिराया, ट्रंप ने दी ऑपरेशन की पुष्टि

कासिम अल-रिमी 41 वर्षीय था और अलकायदा के वैश्विक नेता अयमान अल-जवाहिरी का डिप्टी था। वह भर्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था और जवाहिरी के उत्तराधिकारी के रूप में

Jan 18, 2026 - 13:39
 0  9
अमेरिका ने यमन में अलकायदा के प्रमुख नेता कासिम अल-रिमी को ड्रोन हमले में सफलतापूर्वक मार गिराया, ट्रंप ने दी ऑपरेशन की पुष्टि
अमेरिका ने यमन में अलकायदा के प्रमुख नेता कासिम अल-रिमी को ड्रोन हमले में सफलतापूर्वक मार गिराया, ट्रंप ने दी ऑपरेशन की पुष्टि
  • ट्रंप के निर्देश पर यमन में काउंटरटेररिज्म ऑपरेशन, अलकायदा इन अरेबियन पेनिनसुला के संस्थापक की मौत से संगठन को झटका
  • यमन में अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक से अलकायदा के वैश्विक आंदोलन को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम, राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर

अमेरिका ने यमन में एक प्रमुख ड्रोन हमले के माध्यम से अलकायदा के शीर्ष नेता कासिम अल-रिमी को मार गिराया है। यह हमला जनवरी 2020 में किया गया, जिसकी पुष्टि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 फरवरी 2020 को की। अल-रिमी अलकायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला (एक्यूएपी) का नेता था और अलकायदा के वैश्विक नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। इस ऑपरेशन से अलकायदा को बड़ा झटका लगा है और अमेरिका ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। हमला सीआईए द्वारा संचालित किया गया था और इसमें एक इनफॉर्मर की मदद ली गई थी।

अमेरिका ने यमन में एक काउंटरटेररिज्म ऑपरेशन के तहत अलकायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला के नेता कासिम अल-रिमी को मार गिराया है। यह ऑपरेशन जनवरी 2020 में किया गया था, जिसकी पुष्टि व्हाइट हाउस ने 6 फरवरी 2020 को जारी एक बयान में की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस ऑपरेशन का आदेश दिया था, जो सफलतापूर्वक पूरा हुआ और अल-रिमी को समाप्त कर दिया गया। अल-रिमी अलकायदा का संस्थापक सदस्य था और उसने ओसामा बिन लादेन के साथ अफगानिस्तान में काम किया था। वह 2015 में नासिर अल-वुहैशी की मौत के बाद एक्यूएपी का नेता बना था, जिसे अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। अल-रिमी पर अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था और वह अमेरिकी लक्ष्यों पर हमलों के लिए जिम्मेदार था। यह ऑपरेशन सीआईए द्वारा संचालित था, जिसमें एक यमनी इनफॉर्मर की मदद से नवंबर 2019 से अल-रिमी की लोकेशन ट्रैक की गई थी। हमले में अनमैन्ड ड्रोन का उपयोग किया गया और इसकी शुरुआती रिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स ने 31 जनवरी 2020 को प्रकाशित की थी, जिसे ट्रंप ने रीट्वीट करके पुष्टि की थी। इस हमले से अलकायदा के यमनी ब्रांच को कमजोर करने की उम्मीद है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय अलकायदा ग्रुप्स में से एक है।

कासिम अल-रिमी 41 वर्षीय था और अलकायदा के वैश्विक नेता अयमान अल-जवाहिरी का डिप्टी था। वह भर्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था और जवाहिरी के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। अल-रिमी ने 2008 से अमेरिकी लक्ष्यों पर कई हमलों की योजना बनाई थी और हाल ही में दिसंबर 2019 में फ्लोरिडा के नेवल एयर स्टेशन पेंसाकोला में हुई शूटिंग की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें तीन अमेरिकी नाविक मारे गए थे। हमले का कोई स्पेसिफिक डिटेल व्हाइट हाउस ने जारी नहीं किया, लेकिन यह यमन में अमेरिकी ड्रोन अभियान का हिस्सा था। अमेरिका ने पहले भी 2017 में यमन में एक रेड की थी, जिसमें अल-रिमी को टारगेट किया गया था, लेकिन वह बच निकला था। उस रेड में एक अमेरिकी नेवी सील की मौत हो गई थी, 23 सिविलियन मारे गए थे और एक 90 मिलियन डॉलर का एयरक्राफ्ट नष्ट हो गया था, हालांकि 14 एक्यूएपी सदस्य मारे गए थे। उस समय सीनेटर जॉन मैकेन ने इसे फेलियर बताया था, जबकि व्हाइट हाउस ने इसे सफल माना था। 2020 के इस ऑपरेशन से अलकायदा के यमनी ब्रांच की ताकत कम हुई है, हालांकि ग्रुप अभी भी सक्रिय है और पश्चिमी लक्ष्यों पर हमलों की क्षमता रखता है। अल-रिमी की मौत से संगठन की वैश्विक क्षमता पर असर पड़ सकता है और अमेरिका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा कदम मानता है।

यह हमला यमन में चल रहे अमेरिकी काउंटरटेररिज्म प्रयासों का हिस्सा है, जहां अलकायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला ने सिविलियनों पर हिंसा की है और अमेरिका पर हमलों की योजना बनाई है। व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया कि अल-रिमी की मौत से एक्यूएपी और वैश्विक अलकायदा आंदोलन को कमजोर किया जाएगा और अमेरिका को अपने नागरिकों की रक्षा करने में मदद मिलेगी। अल-रिमी अलकायदा के उन कुछ नेताओं में से एक था जो 11 सितंबर 2001 के हमलों से पहले से संगठन से जुड़े थे। हमले की पुष्टि के बाद कोई तत्काल प्रतिक्रिया यमन या अलकायदा से नहीं आई, लेकिन संगठन की क्षमता पहले की तुलना में कम हो गई है क्योंकि अमेरिकी हमलों से उसके कई नेता मारे जा चुके हैं। यह ऑपरेशन ट्रंप प्रशासन के दौरान अलकायदा और आईएसआईएस जैसे संगठनों पर किए गए कई हमलों की श्रृंखला में शामिल है।

अमेरिका ने इस हमले को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है, क्योंकि एक्यूएपी ने अमेरिकी हितों पर कई हमलों की कोशिश की थी। अल-रिमी ने संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी और वह भर्ती और हमलों की योजना में सक्रिय था। उसकी मौत से संगठन में नेतृत्व का संकट आ सकता है। हमले का प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अमेरिका का मानना है कि इससे अलकायदा की वैश्विक धमकियां कम होंगी। यह घटना यमन में चल रहे संघर्ष के बीच हुई है, जहां अमेरिका अलकायदा पर फोकस कर रहा है। ट्रंप ने बयान में कहा कि अमेरिका अलकायदा और उसके सहयोगियों पर हमले जारी रखेगा। अल-रिमी की मौत की पुष्टि से पहले रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हमला जनवरी के अंत में हुआ था। यह ऑपरेशन गोपनीय था और इसमें कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow