ट्रंप की चेतावनी के बाद हमास ने गाजा शांति योजना स्वीकार की, मोदी ने ट्रंप को धन्यवाद दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद गाजा में शांति की राह पर एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। हमास ने ट्रंप की प्रस्तावित 20-सूत्री योजना के प्रमुख बिंदुओं को स्वीकार कर

Oct 4, 2025 - 16:54
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ट्रंप की चेतावनी के बाद हमास ने गाजा शांति योजना स्वीकार की, मोदी ने ट्रंप को धन्यवाद दिया।
ट्रंप की चेतावनी के बाद हमास ने गाजा शांति योजना स्वीकार की, मोदी ने ट्रंप को धन्यवाद दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद गाजा में शांति की राह पर एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। हमास ने ट्रंप की प्रस्तावित 20-सूत्री योजना के प्रमुख बिंदुओं को स्वीकार कर लिया है, जिसमें सभी बंधकों की रिहाई और युद्धविराम शामिल है। इस विकास का स्वागत करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की नेतृत्व क्षमता की सराहना की और कहा कि यह कदम गाजा में स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक प्रगति है। ट्रंप ने हमास को रविवार शाम तक योजना स्वीकार करने की अंतिम चेतावनी दी थी, जिसमें अस्वीकृति पर नरक जैसी सजा का उल्लेख था। लेकिन हमास ने शुक्रवार को ही अपनी सहमति जताई, जिसके बाद ट्रंप ने इजरायल को गाजा पर बमबारी तुरंत रोकने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में दो वर्षों से चली आ रही हिंसा को समाप्त करने की उम्मीद जगाता है, जहां 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल की जवाबी कार्रवाई में 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं।

यह ब्रेकथ्रू 29 सितंबर 2025 को व्हाइट हाउस में ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बैठक के दौरान सामने आया। ट्रंप ने एक 20-सूत्री योजना पेश की, जिसमें तत्काल युद्धविराम, हमास द्वारा सभी 48 बंधकों (जिनमें से 20 जीवित माने जाते हैं) की 72 घंटों में रिहाई, बदले में सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों की मुक्ति, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, हमास का निरस्त्रीकरण और गाजा का अंतरराष्ट्रीय प्रशासन शामिल था। ट्रंप ने कहा कि योजना गाजा का पुनर्निर्माण करेगी, जिसमें आर्थिक विकास के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनेगी। नेतन्याहू ने योजना का समर्थन किया, लेकिन चेतावनी दी कि अस्वीकृति पर इजरायल हमास को पूरी तरह नष्ट कर देगा। ट्रंप ने जोर दिया कि हमास को राजनीतिक सत्ता से वंचित किया जाएगा और गाजा का प्रशासन स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों के हाथों सौंपा जाएगा। योजना में फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को भी जगह दी गई, लेकिन यह गाजा के पुनर्निर्माण और सुधारों पर निर्भर था।

ट्रंप ने 30 सितंबर को हमास को तीन-चार दिनों की मोहलत दी, लेकिन 3 अक्टूबर को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर चेतावनी दी कि रविवार शाम तक सहमति न मिली तो हमास के नेताओं को शिकार बनाया जाएगा। उन्होंने लिखा, "यह अंतिम मौका है, अन्यथा नरक जैसा कुछ टूट पड़ेगा।" इस दबाव के बाद हमास ने काहिरा और दोहा में मध्यस्थों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया भेजी। हमास के बयान में कहा गया कि वे ट्रंप की योजना के प्रमुख बिंदुओं पर सहमत हैं, जिसमें सभी जीवित बंधकों और मृतकों के शवों की रिहाई, फिलिस्तीनी कैदियों के बदले और गाजा प्रशासन को स्वतंत्र फिलिस्तीनी निकाय को सौंपना शामिल है। लेकिन उन्होंने कुछ मुद्दों पर आगे बातचीत की मांग की, जैसे इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, स्थायी युद्धविराम की गारंटी और हथियारों का निरस्त्रीकरण। हमास ने स्पष्ट किया कि वे फिलिस्तीनी राष्ट्रीय सहमति पर आधारित एक समावेशी ढांचे में चर्चा चाहते हैं।

ट्रंप ने हमास के बयान का स्वागत करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि वे स्थायी शांति के लिए तैयार हैं।" उन्होंने इजरायल को निर्देश दिया कि बमबारी तुरंत रोकी जाए ताकि बंधकों को सुरक्षित निकाला जा सके। ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा, "यह केवल गाजा की नहीं, बल्कि मध्य पूर्व की लंबे समय से चली आ रही शांति की बात है।" इजरायल ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन नेतन्याहू कार्यालय ने कहा कि वे योजना के पहले चरण की तत्काल तैयारी कर रहे हैं। गाजा में फिलिस्तीनियों ने हमास के बयान पर उत्साह जताया, जहां अल-मवासी क्षेत्र में तंबुओं से अल्लाहु अकबर के नारे गूंजे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हमास का निरस्त्रीकरण और राजनीतिक बहिष्कार मुश्किल साबित हो सकता है, क्योंकि यह समूह की पहचान का मूल है।

इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने 4 अक्टूबर को एक्स पर पोस्ट कर ट्रंप को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, "हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं क्योंकि गाजा में शांति प्रयास निर्णायक प्रगति कर रहे हैं। बंधकों की रिहाई के संकेत एक महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत सभी प्रयासों का मजबूती से समर्थन करता रहेगा जो स्थायी और न्यायपूर्ण शांति की ओर ले जाते हैं।" मोदी का यह बयान भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है, जहां वह इजरायल का मजबूत साझेदार है लेकिन फिलिस्तीन का भी समर्थन करता है। भारत ने हमेशा दो-राष्ट्र सिद्धांत का पक्ष लिया है और गाजा में मानवीय सहायता भेजी है। मोदी ने कहा कि यह प्रगति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है। ट्रंप ने भी मोदी के समर्थन का जिक्र किया और कहा कि भारत जैसे सहयोगी शांति प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

दुनिया भर के नेता इस विकास का स्वागत कर रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, "बंधकों की रिहाई और युद्धविराम हाथोमुंह के करीब है।" उन्होंने ट्रंप को धन्यवाद दिया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने योजना को ऐतिहासिक बताया और हमास से बंधकों की तत्काल रिहाई की मांग की। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इसे शांति का सर्वश्रेष्ठ मौका कहा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से अवसर का लाभ उठाने को कहा। कतर और मिस्र, जो मध्यस्थ हैं, ने बातचीत जारी रखने का ऐलान किया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने योजना के बिना देरी से कार्यान्वयन की मांग की। लेकिन कुछ विशेषज्ञ चिंतित हैं। अल जजीरा के अनुसार, हमास ने हथियार डालने से पहले इजरायल की कब्जे की समाप्ति की शर्त रखी है। इजरायल के दक्षिणपंथी गठबंधन योजना के कुछ हिस्सों का विरोध कर सकता है।

गाजा में स्थिति गंभीर बनी हुई है। इजरायली हमलों से 66,000 से अधिक मौतें हुई हैं, और गाजा सिटी में अकाल जैसी स्थिति है। हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले में 1,200 इजरायली मारे गए थे और 251 बंधक बनाए गए थे। अब 48 बंधक बचे हैं। ट्रंप की योजना में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए सहायता का प्रावधान है, लेकिन मानवीय संकट तत्काल समाप्त करने पर जोर है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि योजना क्षेत्रीय शांति का नया अध्याय खोलेगी। लेकिन फिलिस्तीनी स्रोतों का कहना है कि योजना इजरायल के हितों को प्राथमिकता देती है। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वे फिलिस्तीनी हितों की रक्षा करेंगे।

भारत का रुख हमेशा शांति का रहा है। मोदी ने कई बार गाजा में तत्काल युद्धविराम की मांग की है। 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा। अब ट्रंप योजना के समर्थन से भारत की भूमिका मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफल हुआ तो मध्य पूर्व में नया दौर शुरू हो सकता है। लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। हमास के निरस्त्रीकरण पर सहमति बनाना कठिन होगा। इजरायल की सेना गाजा सिटी पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। ट्रंप ने कहा कि वे योजना के चेयरमैन बनेंगे और पुनर्निर्माण की देखरेख करेंगे।

यह घटना वैश्विक कूटनीति में अमेरिका की वापसी का संकेत है। ट्रंप ने 2024 चुनाव में गाजा मुद्दे को उठाया था। अब सत्ता में लौटकर उन्होंने वादा निभाया। मोदी का धन्यवाद संदेश दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है। भारत ने इजरायल को हथियार बेचे हैं लेकिन फिलिस्तीन को सहायता भी दी है। यह संतुलन अब शांति प्रक्रिया में मददगार साबित हो रहा है। गाजा के निवासी राहत की उम्मीद कर रहे हैं। एक फिलिस्तीनी ने कहा कि बमबारी रुकने से जीवन लौटेगा। इजरायली बंधक परिवारों ने ट्रंप को धन्यवाद दिया।

शांति प्रक्रिया में अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे। मध्यस्थ कतर और मिस्र बातचीत तेज करेंगे। ट्रंप ने कहा कि विवरणों पर चर्चा चल रही है। अगर योजना लागू हुई तो गाजा में सहायता पहुंचेगी और पुनर्निर्माण शुरू होगा। लेकिन असफलता पर हिंसा बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की। मोदी का समर्थन इस प्रक्रिया को वैश्विक वैधता देता है। भारत जैसे उभरते देशों की भूमिका बढ़ रही है। यह घटना साबित करती है कि कूटनीति से युद्ध समाप्त हो सकता है। आशा है कि बंधक जल्द घर लौटेंगे और गाजा में शांति स्थापित होगी।

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