ढोंगी बाबा अशोक खरात के काले साम्राज्य का पर्दाफाश, 130 से अधिक बैंक खातों के जरिए 62 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन।

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात के वित्तीय

Apr 3, 2026 - 12:16
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ढोंगी बाबा अशोक खरात के काले साम्राज्य का पर्दाफाश, 130 से अधिक बैंक खातों के जरिए 62 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन।
ढोंगी बाबा अशोक खरात के काले साम्राज्य का पर्दाफाश, 130 से अधिक बैंक खातों के जरिए 62 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन।
  • महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष तक पहुँची जांच की आंच, धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी की पत्नी के खिलाफ लुकआउट नोटिस
  • शिरडी की बेशकीमती जमीन हड़पने की साजिश आई सामने, सहकारी समितियों के माध्यम से सफेद किया गया करोड़ों का काला धन

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात के वित्तीय साम्राज्य की परतों ने पुलिस प्रशासन को भी हैरान कर दिया है। दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे खरात पर अब बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी जुड़ गए हैं। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस की संयुक्त जांच में यह तथ्य सामने आया है कि खरात ने दो अलग-अलग सहकारी ऋण समितियों में 130 से अधिक बैंक खाते खोल रखे थे। इन खातों का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में लगभग 62.74 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के लिए किया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि ये खाते विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर खोले गए थे, जिनका उपयोग संभवतः अवैध रूप से अर्जित धन को खपाने के लिए किया जा रहा था।

जांच की दिशा उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब इन बेनामी खातों के पीछे के रसूखदार चेहरों की पहचान होने लगी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन संदिग्ध खातों में से एक खाता महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकरणकर की बहन के नाम पर भी संचालित पाया गया है। इस संबंध के सामने आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया, जिसके परिणामस्वरूप रूपाली चाकरणकर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पुलिस अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या इन खातों के माध्यम से किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण के तहत धन का हेरफेर किया जा रहा था। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खरात का प्रभाव केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके तार सत्ता के गलियारों तक जुड़े हुए थे।

  • लुकआउट नोटिस और फरार आरोपी

पुलिस अधीक्षक सोमनाथ घरगे ने पुष्टि की है कि अशोक खरात की पत्नी कल्पना और उसके सहयोगियों की तलाश तेज कर दी गई है। कल्पना को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है। पुलिस का मानना है कि कल्पना के पास इस वित्तीय नेटवर्क की कई महत्वपूर्ण चाबियाँ मौजूद हैं।

धोखाधड़ी का यह पूरा प्रकरण शिरडी में स्थित चार एकड़ की एक बेशकीमती जमीन के सौदे से शुरू हुआ था। आरोप है कि खरात और उसकी पत्नी कल्पना ने जमीन के मालिक को विश्वास में लेकर 5.52 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान किया था। इस ऋण की आड़ में आरोपी ने जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी की और मालिक की मजबूरी का फायदा उठाकर उस पूरी संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया। जब पीड़ित पक्ष ने इसकी शिकायत दर्ज कराई, तो पुलिस ने जाल बिछाकर दो बिचौलियों को गिरफ्तार कर लिया। इसी जांच के दौरान जब पुलिस ने खरात के बैंक विवरणों को खंगालना शुरू किया, तो 62 करोड़ रुपये से अधिक के विशाल वित्तीय हेरफेर का मामला प्रकाश में आया।

सहकारी ऋण समितियों की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि एक ही व्यक्ति या उससे जुड़े लोगों द्वारा इतनी बड़ी संख्या में खाते खोला जाना बैंकिंग नियमों का खुला उल्लंघन प्रतीत होता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, खरात ने इन समितियों के प्रबंधन के साथ साठगांठ करके केवाईसी नियमों की अनदेखी की। अलग-अलग नामों से खोले गए इन 130 खातों के माध्यम से छोटी-छोटी किस्तों में बड़ी रकम जमा की गई और फिर उसे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए निकाला गया। पुलिस अब इन सभी खाताधारकों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें इन खातों के संचालन की जानकारी थी या उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया है।

अहिल्यानगर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में अभी तक खरात, उसकी पत्नी कल्पना और तीन अन्य मुख्य सहयोगियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस की टीमें महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि खरात ने अपने 'आश्रम' और 'आध्यात्मिक केंद्र' का इस्तेमाल लोगों को ठगने और उनके निवेश को अपनी निजी संपत्तियों में बदलने के लिए किया था। वह लोगों को कम समय में अधिक लाभ का लालच देकर या दैवीय शक्तियों का डर दिखाकर वित्तीय लाभ प्राप्त करता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को भी सूचित किए जाने की संभावना है।

मामले के सामाजिक और कानूनी पहलुओं को देखें तो यह एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। खरात पर पहले से ही दुष्कर्म का मामला दर्ज है, जिससे उसकी छवि एक अपराधी के रूप में पहले ही स्थापित हो चुकी थी। अब वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे ने उसकी आपराधिक गतिविधियों के विस्तार को प्रदर्शित किया है। स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों का कहना है कि खरात ने धर्म की आड़ में एक ऐसा तंत्र विकसित किया था जहाँ वह कानून से ऊपर होने का दावा करता था। पुलिस अब उन सभी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है जो इस धोखाधड़ी के पैसे से खरीदी गई थीं। साथ ही, उन ऋण समितियों के ऑडिट की भी मांग की गई है जहाँ ये संदिग्ध खाते संचालित हो रहे थे।

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