दिल्ली में पानी का संकट: कम आय वाले परिवार अपनी आय का 15% पानी पर खर्च कर रहे, सर्वे में हुआ खुलासा।

Delhi: दिल्ली में पानी की कमी और इसकी बढ़ती कीमतों ने निम्न आय वाले परिवारों के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार

Aug 21, 2025 - 11:38
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दिल्ली में पानी का संकट: कम आय वाले परिवार अपनी आय का 15% पानी पर खर्च कर रहे, सर्वे में हुआ खुलासा।
दिल्ली में पानी का संकट: कम आय वाले परिवार अपनी आय का 15% पानी पर खर्च कर रहे, सर्वे में हुआ खुलासा।

दिल्ली में पानी की कमी और इसकी बढ़ती कीमतों ने निम्न आय वाले परिवारों के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली के अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले 34% परिवार, जिनकी मासिक आय 6,000 से 10,000 रुपये के बीच है, अपनी आय का 15% सिर्फ पीने के पानी की खरीद पर खर्च कर रहे हैं। इस खर्च का सीधा असर उनकी बुनियादी जरूरतों जैसे भोजन, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रीनपीस इंडिया और सेंटर फॉर ह्यूमन एंड सिविल सोसाइटी (COHAS) द्वारा किए गए इस सर्वे ने दिल्ली की जल आपूर्ति प्रणाली में गहरी असमानता और सरकारी नीतियों के लागू न होने की सच्चाई को सामने लाया है। यह स्थिति विशेष रूप से गर्मियों के महीनों (मार्च से जुलाई) में और गंभीर हो जाती है, जब पानी की मांग बढ़ने और आपूर्ति घटने से परिवारों को कठिन विकल्प चुनने पड़ते हैं।

ग्रीनपीस इंडिया द्वारा 18 अगस्त 2025 को प्रकाशित 'वॉटर एक्सेस ऑडिट: गैप्स, कॉस्ट्स एंड बियॉन्ड' नामक रिपोर्ट में दिल्ली की 12 अनौपचारिक बस्तियों जैसे सावदा घेवरा, कुसुमपुर पहाड़ी, संगम विहार, सकुरपुर बस्ती, खजान बस्ती, चुन्ना भट्टी, बीआईडब्ल्यू कॉलोनी, सीमापुरी, सुंदर नगरी, लोहार बस्ती, और रघुबीर नगर झुग्गी कॉलोनी में 500 परिवारों पर सर्वे किया गया। इस सर्वे के नतीजों ने दिखाया कि इन परिवारों को अपनी मासिक आय का 500 से 1,500 रुपये तक पानी खरीदने पर खर्च करना पड़ता है। लगभग 70% परिवारों ने बताया कि पानी की बढ़ती कीमतों के कारण उन्हें भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, और बच्चों की पढ़ाई जैसे आवश्यक खर्चों में कटौती करनी पड़ी। 14% परिवारों ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम होने की बात कही, जबकि 8% ने बताया कि उनके बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ा।

सर्वे में यह भी पाया गया कि 37% परिवारों को प्रतिदिन 20-25 लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन केवल 28% परिवार ही इस मात्रा में पानी प्राप्त कर पाते हैं, और वह भी तब जब वे इसके लिए भुगतान करते हैं। पानी की आपूर्ति के लिए ये परिवार निजी विक्रेताओं (34%), दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के टैंकरों (29%), और वॉटर एटीएम (21%) पर निर्भर हैं। केवल 14% परिवार सबमर्सिबल पंप और 2% पड़ोसियों से पानी लेते हैं। जो पानी ये परिवार खरीदते हैं, वह अक्सर पीने के लिए सुरक्षित नहीं होता, जिससे जलजनित बीमारियां जैसे दस्त और टाइफाइड का खतरा बढ़ जाता है।

दिल्ली की कुल आबादी करीब 2 करोड़ है, और शहर की दैनिक जल मांग 1,290 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) है, जिसमें से दिल्ली जल बोर्ड केवल 1,000 MGD पानी की आपूर्ति करता है। बाकी की कमी को पूरा करने के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में 86 MGD भूजल निकाला गया था, जो 2024 तक बढ़कर 135 MGD हो गया। सेंट्रल ग्राउंडवाटर बोर्ड (CGWB) की 2021 की रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में भूजल का स्तर "अति-दोहन" की श्रेणी में है, और इसमें उच्च नमक स्तर, लोहा, मैंगनीज, और यहां तक कि यूरेनियम जैसे भारी धातुओं की मौजूदगी पाई गई है।

दिल्ली की जल आपूर्ति मुख्य रूप से हरियाणा और उत्तर प्रदेश से यमुना नदी, मुन्नक नहर, और ऊपरी गंगा नहर के माध्यम से आती है। हालांकि, इन स्रोतों पर निर्भरता और जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा और सूखे ने पानी की उपलब्धता को और सीमित कर दिया है। दिल्ली जल बोर्ड की नौ जल शोधन संयंत्रों की क्षमता 2022 में 998 MGD थी, जो 2025 तक बढ़कर 1,000 MGD हो गई, लेकिन यह अभी भी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2025 में अपने हीट एक्शन प्लान 2025 के तहत 3,000 वॉटर एटीएम लगाने की घोषणा की थी, जो कम आय वाले क्षेत्रों में मुफ्त और साफ पानी उपलब्ध कराने का वादा करता था। लेकिन जून 2025 तक केवल 20 वॉटर एटीएम ही स्थापित हो पाए, और इनमें से कोई भी सर्वे वाली बस्तियों में नहीं था। जहां वॉटर एटीएम मौजूद हैं, जैसे सावदा घेवरा और सकुरपुर बस्ती, वहां 37% उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की कि मशीनें अक्सर खराब रहती हैं या अनियमित रूप से काम करती हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा वादा किया गया प्रतिदिन 20 लीटर मुफ्त पानी अक्सर उपलब्ध नहीं होता, और कई बार इसके लिए शुल्क लिया जाता है।

ग्रीनपीस इंडिया की अभियानकर्ता वैशाली उपाध्याय ने कहा, "पानी एक बुनियादी अधिकार है, लेकिन इन परिवारों के लिए यह हर दिन का संकट है। लोग पानी और भोजन, पानी और स्कूल फीस, या पानी और दवा के बीच चुनने को मजबूर हैं।" COHAS के सदस्य अंकित राणा ने बताया कि कई निवासियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या असुरक्षित पानी के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

पानी की बढ़ती लागत ने निम्न आय वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। सर्वे में शामिल 70% परिवारों ने बताया कि पानी के खर्च के कारण उन्हें भोजन, स्वास्थ्य, और शिक्षा जैसे आवश्यक खर्चों में कटौती करनी पड़ी। उदाहरण के लिए, एक परिवार जो 6,000 रुपये महीने कमाता है, अगर वह 900 रुपये पानी पर खर्च करता है, तो उसके पास भोजन, किराए, या बच्चों की स्कूल फीस के लिए बहुत कम बचता है। इससे बच्चों का स्कूल छोड़ने का खतरा बढ़ता है, और परिवारों को कर्ज लेने या अपनी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन ने इस संकट को और गंभीर कर दिया है। दिल्ली स्टेट एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (2023) के मसौदे के अनुसार, बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा पैटर्न के कारण 2050 तक दिल्ली को 2.75 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है। गर्मी की लहरें और कम अवधि में भारी बारिश ने जल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे निम्न आय वाले समुदायों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।

महिलाओं पर इस संकट का असर और भी गहरा है। हार्वर्ड लॉ स्कूल की एक रिपोर्ट (2023) के अनुसार, पानी लाने की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं और बच्चों पर होती है, जिससे उनकी स्वायत्तता और समय प्रभावित होता है। कई महिलाएं पानी लेने के लिए लंबी दूरी तय करती हैं, जिससे उनके काम करने या पढ़ाई करने का समय कम हो जाता है। इसके अलावा, असुरक्षित पानी के उपयोग से जलजनित बीमारियां बढ़ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ता है और परिवारों की आर्थिक स्थिति और खराब होती है।

दिल्ली सरकार ने 2015 से 20,000 लीटर तक मुफ्त पानी की योजना शुरू की थी, जिससे 24.72 लाख उपभोक्ताओं को लाभ हुआ। हालांकि, यह योजना मुख्य रूप से उन परिवारों के लिए है, जिनके पास मीटर्ड कनेक्शन हैं। अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले अधिकांश परिवारों के पास पाइप्ड जल आपूर्ति नहीं है, और वे इस योजना का लाभ नहीं उठा पाते। 2018 तक, 17% घरों में घर के भीतर नल का पानी उपलब्ध नहीं था।

दिल्ली जल बोर्ड ने 2022 में पानी की आपूर्ति को 953 MGD तक बनाए रखने का दावा किया था, और 2023 में इसे बढ़ाकर 1,000 MGD करने का लक्ष्य रखा। लेकिन यह आपूर्ति अभी भी मांग से कम है। इसके अलावा, 15,383 किलोमीटर की पाइपलाइन और 125 भूमिगत जलाशयों के बावजूद, अनौपचारिक बस्तियों तक पानी की पहुंच सीमित है। सरकार ने 407 स्टेनलेस स्टील के टैंकर और 250 नए टैंकरों को शामिल किया है, लेकिन ये टैंकर अनियमित रूप से आते हैं और अक्सर पानी की मांग को पूरा नहीं कर पाते।

सर्वे ने दिल्ली सरकार से तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रीनपीस और COHAS ने सुझाव दिया कि सरकार को 2026 तक 5,000 पूरी तरह कार्यात्मक वॉटर एटीएम लगाने चाहिए, जो 24 घंटे मुफ्त पानी प्रदान करें। इन एटीएम को न केवल आवासीय क्षेत्रों में, बल्कि बाजारों, बस स्टैंड, और मजदूर चौक जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी स्थापित करना चाहिए।

इसके अलावा, सरकार को जल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहिए। पाइपलाइनों का विस्तार, जल शोधन संयंत्रों की क्षमता बढ़ाना, और भूजल दोहन को कम करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों जैसे वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल उपचार पर ध्यान देना जरूरी है। डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि दिल्ली को एक चक्रीय जल अर्थव्यवस्था अपनानी चाहिए, जिसमें हर लीटर पानी का अधिकतम उपयोग हो और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम हो।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर भी इस संकट से निपटा जा सकता है। वाटर.ऑर्ग जैसी संस्थाएं भारत में सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) के माध्यम से परिवारों को सस्ते ऋण प्रदान कर रही हैं, ताकि वे अपने घरों में साफ पानी और शौचालय की सुविधा स्थापित कर सकें। दिल्ली में भी ऐसी पहल को बढ़ावा देने की जरूरत है।

दिल्ली में पानी का संकट निम्न आय वाले परिवारों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। अपनी आय का 15% पानी पर खर्च करने के कारण ये परिवार भोजन, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं। सरकार की मुफ्त पानी और वॉटर एटीएम की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, और जमीनी हकीकत में इनका लाभ सबसे जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच रहा।

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