प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी पर I-PAC का पहला बयान: 'चिंताजनक ट्रेंड' की शुरुआत, जांच में पूरा सहयोग जारी।
पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उसके ठिकानों पर की गई छापेमारी पर अपना पहला
पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उसके ठिकानों पर की गई छापेमारी पर अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया। फर्म ने इसे एक चिंताजनक ट्रेंड की शुरुआत बताया तथा कहा कि पेशेवर संगठनों के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है। यह छापेमारी गुरुवार को कोलकाता में हुई जिसमें I-PAC के कार्यालय तथा उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास को शामिल किया गया। I-PAC ने स्पष्ट किया कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग प्रदान कर रही है तथा आगे भी कानून के अनुसार ऐसा करती रहेगी।
छापेमारी के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कार्रवाई की जिसमें कोयला तस्करी से जुड़े मामले का उल्लेख किया गया। एजेंसी ने कुल दस स्थानों पर सर्च की जिसमें कोलकाता के अलावा दिल्ली के चार स्थान शामिल थे। कोलकाता में साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय तथा लाउडन स्ट्रीट पर प्रतीक जैन का आवास मुख्य केंद्र थे। प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया कि जांच शांतिपूर्ण तथा पेशेवर तरीके से चल रही थी लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई।
I-PAC ने अपने बयान में कहा कि गुरुवार का दिन उसके लिए मुश्किल तथा दुर्भाग्यपूर्ण रहा। फर्म ने इसे पेशेवर संगठन के लिए कठिन घटना बताया तथा कहा कि यह एक unsettling precedent स्थापित करता है। बावजूद इसके फर्म ने उच्चतम पेशेवर ईमानदारी के मानकों को बनाए रखने की बात दोहराई तथा कहा कि वह बिना विचलित हुए अपने काम को जारी रखेगी। I-PAC ने जोर दिया कि उसका काम पारदर्शी तथा पेशेवर राजनीतिक सलाह तक सीमित है तथा वह किसी भी राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित नहीं होता।
फर्म ने आगे स्पष्ट किया कि वह चुनाव नहीं लड़ती तथा न ही कोई राजनीतिक पद संभालती है। उसका कार्य केवल विभिन्न राजनीतिक दलों को सलाह देना है तथा पिछले वर्षों में उसने विभिन्न विचारधाराओं वाले दलों जैसे भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी तथा तृणमूल कांग्रेस के साथ काम किया है। I-PAC ने कहा कि उसका उद्देश्य युवा पेशेवरों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना है तथा वह इस दिशा में दृढ़ता से कार्यरत रहेगी।
यह घटना पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल पैदा कर रही है जहां विधानसभा चुनाव कुछ महीनों में होने हैं। छापेमारी के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन के आवास तथा I-PAC कार्यालय का दौरा किया तथा आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय तृणमूल कांग्रेस के संवेदनशील चुनावी दस्तावेजों तथा डेटा को जब्त करने का प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने टीएमसी की अध्यक्ष के रूप में हस्तक्षेप किया तथा कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया।
प्रवर्तन निदेशालय ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की जिसमें आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार तथा पुलिस की मदद से जांच के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटा लिए गए। एजेंसी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री तथा उनके सहयोगियों ने ED अधिकारियों पर दबाव बनाया तथा पंचनामा में बदलाव करवाया। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उसके अधिकारियों को धमकियां मिलीं तथा जांच बाधित हुई।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भी हाई कोर्ट का रुख किया तथा ED पर मनमानी तथा दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया। पार्टी ने जब्त दस्तावेजों के दुरुपयोग तथा प्रसार पर रोक लगाने की मांग की तथा कहा कि ये दस्तावेज केवल चुनावी रणनीति तथा संगठनात्मक डेटा से संबंधित हैं। मामले में अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी तथा आगे की कार्रवाई जारी है।
I-PAC ने बयान में दोहराया कि वह जांच में पूर्ण सहयोग दे रही है तथा प्रक्रिया को कानून के अनुसार आगे बढ़ा रही है। फर्म ने कहा कि वह अपने काम को consistency तथा accountability के साथ जारी रखेगी तथा किसी भी बाहरी घटना से प्रभावित नहीं होगी। यह पहला बयान था जिसमें फर्म ने छापेमारी को चिंताजनक ट्रेंड बताया तथा पेशेवर संगठनों की स्वतंत्रता पर जोर दिया। घटना के बाद I-PAC ने अपने साल्ट लेक कार्यालय में सामान्य कामकाज बहाल कर दिया तथा कर्मचारियों को कार्यालय लौटने के निर्देश दिए। फर्म ने कहा कि वह अपने पेशेवर दायित्वों को निर्वहन करती रहेगी तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में योगदान देती रहेगी। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया कि छापेमारी राजनीतिक नहीं बल्कि सबूत आधारित है तथा किसी राजनीतिक दल को लक्षित नहीं किया गया।
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