हिजाब विवाद पर पूर्णविराम- डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिनों बाद सरकारी नौकरी जॉइन की, पटना सदर पीएचसी में मिली तैनाती। 

बिहार में हिजाब विवाद के केंद्र में रही आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने आखिरकार 23 दिनों के लंबे इंतजार के बाद अपनी सरकारी नौकरी जॉइन कर

Jan 8, 2026 - 12:51
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हिजाब विवाद पर पूर्णविराम- डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिनों बाद सरकारी नौकरी जॉइन की, पटना सदर पीएचसी में मिली तैनाती। 
हिजाब विवाद पर पूर्णविराम- डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिनों बाद सरकारी नौकरी जॉइन की, पटना सदर पीएचसी में मिली तैनाती। 

बिहार में हिजाब विवाद के केंद्र में रही आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने आखिरकार 23 दिनों के लंबे इंतजार के बाद अपनी सरकारी नौकरी जॉइन कर ली है। यह जॉइनिंग 7 जनवरी 2026 को हुई, जब उन्होंने पटना के सिविल सर्जन कार्यालय में औपचारिक रूप से योगदान दिया। इसके बाद उनकी तैनाती पटना सदर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में की गई। विवाद की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी, जब अपॉइंटमेंट लेटर वितरण कार्यक्रम के दौरान एक घटना सामने आई, जिसके बाद नुसरत ने शुरुआती जॉइनिंग डेट पर नौकरी नहीं जॉइन की। मूल रूप से जॉइनिंग की तारीख 20 दिसंबर 2025 तय थी, लेकिन वे उस दिन नहीं पहुंचीं। इसके बाद राज्य सरकार ने जॉइनिंग की समयसीमा पहले 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई और फिर अंतिम रूप से 7 जनवरी 2026 तक कर दी। इस दौरान कई कयास लगाए जा रहे थे कि वे नौकरी जॉइन करेंगी या नहीं, लेकिन अंतिम तारीख पर उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचकर औपचारिकताएं पूरी कीं। सिविल सर्जन ने इस जॉइनिंग की पुष्टि की और बताया कि सभी प्रक्रियाएं पूरी हो गई हैं। इस जॉइनिंग के साथ ही हिजाब विवाद से जुड़ी चर्चाएं थम गई हैं और मामला समाप्त हो गया है।

नुसरत परवीन एक आयुष डॉक्टर हैं, जो पटना स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज से एमडी की पढ़ाई कर रही हैं। विवाद के बाद वे शुरुआती दिनों में कॉलेज भी नहीं आईं और उनके आवास पर ताला लगा हुआ था। जॉइनिंग की पहली तारीख 20 दिसंबर को वे पटना सदर के सबलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में योगदान देने वाली थीं, लेकिन नहीं पहुंचीं। इसके बाद सरकार ने समयसीमा बढ़ाई। 31 दिसंबर की डेडलाइन भी बीत गई, लेकिन वे नहीं आईं। फिर सरकार ने अंतिम मौका देते हुए 7 जनवरी 2026 की तारीख तय की। इस दिन उन्होंने गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचकर जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी की। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए और औपचारिक योगदान दे दिया। इसके बाद उनकी पोस्टिंग पटना सदर पीएचसी में कर दी गई। इस पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग ने नियमों का पालन करते हुए समयसीमा बढ़ाई थी, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित न हो। जॉइनिंग के बाद अब वे नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर तैनात होंगी।

यह विवाद दिसंबर में अपॉइंटमेंट लेटर वितरण के दौरान शुरू हुआ था, जिसके बाद नुसरत ने शुरुआत में जॉइनिंग से इनकार जैसी स्थिति बनाई। पहले कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे 20 दिसंबर को जॉइन करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर समयसीमा बढ़ने के बावजूद 31 दिसंबर तक भी वे नहीं पहुंचीं। इस दौरान उनके कॉलेज न आने और घर पर ताला होने की खबरें आईं। लेकिन 7 जनवरी को वे सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचीं और जॉइनिंग पूरी की। सिविल सर्जन डॉ अविनाश कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की और बताया कि नुसरत ने सभी फॉर्मेलिटीज पूरी कर ली हैं। उनकी तैनाती पटना सदर पीएचसी में की गई है, जहां वे आयुष डॉक्टर के रूप में कार्य करेंगी। इस जॉइनिंग से विवाद पर पूर्णविराम लग गया और स्वास्थ्य विभाग में उनकी नियुक्ति प्रभावी हो गई।

जॉइनिंग की यह प्रक्रिया अंतिम डेडलाइन पर हुई, जो पहले दो बार बढ़ाई गई थी। मूल नियुक्ति पत्र में पटना सदर क्षेत्र में पोस्टिंग थी। विवाद के बाद भी विभाग ने नियमों के तहत मौके दिए। 23 दिनों की यह अवधि घटना के दिन से गिनी गई है, जिसमें जॉइनिंग में देरी हुई। अब नुसरत नियमित ड्यूटी पर हैं और विवाद से जुड़ी सभी अटकलें खत्म हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जॉइनिंग की औपचारिक पुष्टि की है। इस घटनाक्रम से आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी है। नुसरत की जॉइनिंग के साथ ही मामला बंद हो गया। डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिनों बाद 7 जनवरी 2026 को नौकरी जॉइन की। वे सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचीं और प्रक्रिया पूरी की। तैनाती पटना सदर पीएचसी में हुई। पहले की डेडलाइंस 20 दिसंबर और 31 दिसंबर बीतने के बाद अंतिम मौके पर जॉइनिंग हुई। इस से हिजाब विवाद समाप्त हो गया। विभाग ने समयसीमा बढ़ाकर मौका दिया था। अब वे अपनी पोस्टिंग पर ड्यूटी करेंगी। यह पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई। विवाद की शुरुआत अपॉइंटमेंट कार्यक्रम से हुई थी, लेकिन जॉइनिंग के बाद सब सामान्य हो गया।

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